By अनन्या मिश्रा | May 01, 2026
कई घरों में सुबह की शुरुआत आमतौर पर चाय और बिस्कुट या हल्के स्नैक्स से होती है। जब घर के बड़े ऐसा करते हैं, तो बच्चे भी यही आदत अपना लेते हैं। लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक यह आदत बच्चों के लिए बिल्कुल अच्छी नहीं होती है। चाय और बिस्कुट से शरीर को जरूरी पोषण नहीं मिल पाता है। वहीं लंबे समय तक ऐसा नाश्ता करने से बच्चे के फिजिकल और मेंटल हेल्थ पर भी बुरा असर पड़ सकता है।
सुबह का नाश्ता बच्चे के पूरे दिन की एनर्जी, ओवरऑल हेल्थ और दिमाग के काम के लिए बहुत जरूरी है। चाय-बिस्कुट में न के बराबर पोषण होता है। बिस्कुट ज्यादातर चीनी, मैदा और अनहेल्दी फैट से बना होता है। इनमें फाइबर, प्रोटीन, मिनरल्स और विटामिन जैसे पोषक तत्व न के बराबर पाए जाते हैं।
वहीं चाय में भी कोई खास पोषण नहीं होता है। चाय और बिस्कुट मिलकर 'खाली कैलोरी' देते हैं। जोकि पेट तो भरते हैं, लेकिन शरीर को जरूरी पोषण और ताकत नहीं देते हैं। इसी वजह से यह कॉम्बिनेशन बच्चों के लिए पूरी तरह से अनहेल्दी है।
चाय में टैनिन नामक तत्व पाया जाता है। जोकि शरीर में आयरन को सही तरीके से अवशोषित होने से रोकता है। अगर रोज सुबह बच्चा चाय पीता है, तो उनके शरीर में आयरन की कमी हो सकती है। जोकि आगे चलकर एनीमिया का खतरा बढ़ सकता है। इससे बच्चे की इम्युनिटी और ग्रोथ दोनों पर निगेटिव असर पड़ सकता है।
बिस्कुट में चीनी अधिक होती है, जिससे ब्लड शुगर तेजी से बढ़ता है और फिर अचानक से गिर जाता है। इस उतार-चढ़ाव के कारण बच्चे चिड़चिड़े हो सकते हैं। बच्चे का ध्यान कम लगने की शिकायत भी हो सकती है। वहीं बच्चे का बार-बार कुछ अनहेल्दी खाने की इच्छा हो सकती है।
बच्चों के लिए कैफीन वाली चाय सही नहीं होती है। यह उनकी नींद को खराब कर सकती है और बेचैनी को बढ़ा सकती है। इससे बच्चे की ध्यान लगाने की क्षमता और व्यवहार भी प्रभावित हो सकता है।
चाय-बिस्कुट का कॉम्बिनेशन शरीर को ज्यादा देर तक एनर्जी नहीं देता है। थोड़ी देर में बच्चा फिर भूख महसूस करने लगता है। जिससे वह ज्यादा खाना खा सकते हैं। या फिर बार-बार अनहेल्दी स्नैक्स मांग सकते हैं।
हर रोज चाय-बिस्कुट खाने से बच्चे के शरीर को पूरा पोषण नहीं मिल पाता है। जिससे बच्चे के विकास पर असर पड़ता है। ऐसी आदत की वजह से बच्चे जल्दी थक जाते हैं और उनकी इम्युनिटी कमजोर हो सकती है। शरीर में पोषक तत्वों खासकर कैल्शियम और आयरन की कमी हो सकती है।
ज्यादा चीनी या तला भुना नाश्ता देने से बच्चे का मोटापा बढ़ सकता है। वहीं बच्चे को दांत से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।
पोषण की कमी वाला नाश्ता बच्चे के दिमाग पर बुरा असर डाल सकता है। बच्चे को कॉन्स्ट्रेशन में समस्या होती है। याददाश्त कमजोर हो सकती है और शिक्षा के प्रदर्शन में भी गिरावट देखने को मिल सकती है।
सांभर और नारियल की चटनी के साथ इडली
दही के साथ होल व्हीट वेजिटेबल पराठा
दूध के साथ पीनट बटर या पनीर सैंडविच
होल ग्रेन टोस्ट के साथ उबले अंडे
दूध और फलों के साथ ओट्स दलिया
मेवे और बीजों के साथ फ्रूट स्मूदी
पनीर स्टफिंग वाला बेसन चिल्ला
मूंगफली के साथ वेजिटेबल पोहा
सब्जियों के साथ उपमा
सादा या मीठा दलिया
माता-पिता को ध्यान रखना चाहिए कि आदत एकदम से नहीं छूटती है। इसलिए धीरे-धीरे चाय-बिस्कुट की जगह फल, दूध या हेल्दी नाश्ता देना शुरू करें।
बच्चे वही सीखते हैं, जो अपने पेरेंट्स को करते हुए देखते हैं। जब आप हेल्दी नाश्ता करेंगे, तो उसी आदत को बच्चा भी अपनाएगा।
अलग-अलग शेप और अच्छे तरीके से रंग-बिरंगे फलों को सजाकर खाना दें। जो बच्चे को पसंद आए।
रोजाना एक ही समय पर नाश्ता करने की आदत डालें। इससे बच्चे की आदत पड़ जाएगी।
बच्चों को आसान भाषा में यह बताएं कि अच्छा खाना उनके शरीर को ताकत देता है और सीखने व खेलने में मदद करता है।
बता दें कि पेरेंट्स को यह समझना जरूरी हो जाता है कि चाय-बिस्कुट बच्चे को पोषण पूरा नहीं देते हैं। इससे बच्चे के दिमाग और शरीर पर निगेटिव असर पड़ सकता है। इसलिए बच्चे को हमेशा ऐसा नाश्ता देना चाहिए, जो पोषक तत्वों से भरपूर और संतुलित हो। क्योंकि पोषण से भरपूर नाश्ता बच्चों को पूरा दिन के लिए एनर्जी देता है और पढ़ाई में ध्यान लगाने में भी मदद करता है।