गाढ़ी होगी आम आदमी की दाल, भरपूर होगी पैदावार तो सुर्खियां नहीं बनेंगे दाल के दाम

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | May 07, 2022

खाद्यान्न में रिकॉर्ड उत्पादन के बाद योगी सरकार अब खाद्यान्न सुरक्षा से एक कदम आगे पोषण सुरक्षा के बारे में सोच रही है। इसमें सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूमिका दलहनी फसलों की होगी। इसके पीछे वजह है कि आम आदमी खासकर शाकाहारी लोंगों के लिए प्रोटीन का एकमात्र स्रोत दाल ही है।

कैसे हासिल होगा ये लक्ष्य

उत्पादन में गुणवत्ता बीज की महत्ता को देखते हुए दलहन की विभिन्न फसलों की नयी प्रजातियों के प्रमाणित (सर्टिफाइड) एवं आधारीय (फाउंडेशन) बीज का वितरण 28751 कुंतल से बढ़कर 82000 कुंतल किया जाएगा। ये बीज किसानों को अनुदानित दर पर दिए जाएंगे। दलहनी फसलों का क्षेत्रफल बढ़ाने के लिए अंतःफसली एवं जायद की फसलों में दलहनी (उर्द, मूंग) फसलों को प्रोत्साहन दिया जाएगा। असमतल भूमि पर स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली का प्रयोग करते हुये उत्पादन में वृद्धि, फरो एंड रिज तकनीक से खेती कर उत्पादन में वृद्धि और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद की गारंटी दी जाएगी।

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आत्मनिर्भरता से विदेशी मुद्रा भी बचेगी

भारत दुनिया का सबसे बड़ा दाल का उत्पादक, उपभोक्ता और आयतक है। सर्वाधिक आबादी के नाते इस उपभोग का सर्वाधिक हिस्सा यूपी का ही है। ऐसे में पूरे दुनिया के दाल उत्पादक देशों (कनाडा, आस्ट्रेलिया, अमेरिका, टर्की,और म्यानमार) की नजर न केवल भारत और उत्तर प्रदेश के पैदावार बल्कि छह महीने के भंडारण पर भी रहती है। ऐसे में अगर पैदावार कम है तो यहां की भारी मांग के मद्देनजर अतंराष्ट्रीय बाजार में दाल यूं ही तेज हो जाती है। इस पर रुपये के मुकाबले डालर की क्या स्थिति है इसका भी बहुत असर पड़ता है। रुपये के मुकाबले अगर डॉलर के दाम अधिक हैं तो आयात भी महंगा पड़ता है। इस तरह दाल के आयात में देश को बहुमूल्य विदेशी मुद्रा भी खर्च करना होता है। अगर उत्तर प्रदेश दालों के उत्पादन में आत्मनिर्भर हो जाय तो विदेशी मुद्रा भी बचेगी।

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