Gopal Krishna Gokhale Birth Anniversary: नरम दल के नेता थे गोपाल कृष्ण गोखले, गांधी जी मानते थे राजनीतिक गुरु

By अनन्या मिश्रा | May 09, 2025

आज ही के दिन यानी की 09 मई को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के संघर्ष के दौरान गोपाल कृष्ण गोखले का जन्म हुआ था। वह एक प्रभावशाली नेताओं में से एक थे। वह एक समाज सुधारक थे, जिनका लक्ष्य अहिंसा की विचारधारा को आगे बढ़ाना था। गोपाल कृष्ण गोखले जन-जन तक शिक्षा को पहुंचाना चाहते थे। वहीं उन्होंने सभी तरह के जातीय भेदभाव को खत्म करने के लिए कई तरह के काम किए थे। तो आइए जानते हैं उनकी बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर गोपाल कृष्ण गोखले के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...

रत्नागिरी में 09 मई 1866 को गोपाल कृष्ण गोखले का जन्म हुआ था। इनके पिता का नाम कृष्णा राव गोखले और मां का नाम वलूबाई गोखले था। वह एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखते थे। लेकिन वह एक मेधावी छात्र थे। गोखले के मन में हमेशा राष्ट्रभक्ति की भावना थी। जिसने आगे चलकर उनको देश के लिए बहुत कुछ करने के लिए प्रेरित किया था। साल 1881 में गोखले ने मैट्रिक की परीक्षा पास की और साल 1882 में राजाराम कॉलेज से आगे की पढ़ाई पूरी की। उनको हर महीने छात्रवृत्ति भी मिला करती थी।

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कांग्रेस अध्यक्ष बने गोखले

बता दें कि कानून की पढ़ाई करने के बाद गोपाल कृष्ण गोखले राष्ट्रभावना के चलते नरम दल के नेता के रूप में काम करते रहे। वह साल 1905 में कांग्रेस के अध्यक्ष बने थे। फिर साल 1907 आते-आते यह पार्टी दो टुकड़ों में बंट गई। हालांकि वैचारिक मतभेद होने के बाद भी उन्होंने गरम दल के नेता लाला लाजपत राय की रिहाई के लिए अंग्रेजों के खिलाफ अभियान चलाने का काम किया था।

उन्होंने अपनी जीवनकाल में कई क्रांतिकारी परिवर्तन किए थे। गोखले ने साल 1905 में भारतीय शिक्षा के विस्तार के लिए सर्वेंट्स ऑफ इंडिया सोसाइटी की स्थापना की थी। गोखले का मानना था कि भारतीयों को इस तरह की शिक्षा प्राप्त होनी चाहिए, जो उनके मन में नागरिक कर्तव्य और देशभक्ति की अलख जगाए।

इसके बाद साल 1912 में गोपाल कृष्ण गोखले ने दक्षिण अफ्रीका में महात्मा गांधी से मुलाकात की थी और उन्हीं के अनुरोध पर गांधी जी भारत आए थे। वहीं महात्मा गांधी ने अपनी आत्मकथा 'सत्य के साथ मेरे प्रयोग' में उन्होंने गोपाल कृष्ण गोखले को अपना राजनीतिक गुरु बताया था।

मृत्यु

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अग्रणी गोखले भारत भूमि को गुलामी से आजाद कराने के लिए देशप्रेम की भावना से ओतप्रोत थे। वहीं 19 फरवरी 1915 को उनका निधन हो गया था।

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