Government Bond Yield बढ़ने से सरकार के उधारी खर्च और ब्याज भुगतान पर बढ़ा दबाव

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 25, 2026

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की अक्टूबर की मौद्रिक नीति समीक्षा के बाद सरकारी बॉण्ड पर प्रतिफल में तेज बढ़ोतरी से सरकार की उधारी की लागत बढ़ने और ब्याज भुगतान पर दबाव पड़ने का खतरा है। इससे अन्य खर्चों के लिए सरकार की वित्तीय गुंजाइश सीमित हो सकती है। विशेषज्ञों ने यह बात कही।

करूर वैश्य बैंक में ट्रेजरी प्रमुख वी रामचंद्र रेड्डी ने कहा, ‘‘अगर प्रतिफल ऊंचे स्तर पर बना रहता है, तो राजकोषीय घाटे की भरपाई के लिए धन जुटाने की लागत बढ़ जाएगी। इससे ब्याज भुगतान पर दबाव पड़ेगा और सरकार की वित्तीय गुंजाइश सीमित होगी।’’ उन्होंने कहा कि अक्टूबर की मौद्रिक नीति समीक्षा के बाद सरकारी प्रतिभूतियों के प्रतिफल में करीब 0.30 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी से चालू वित्त वर्ष में सरकार की नई उधारी की लागत पिछले साल के मुकाबले काफी बढ़ गई है। रॉकफोर्ट फिनकैप एलएलपी के संस्थापक एवं प्रबंध भागीदार वेंकटकृष्णन श्रीनिवासन ने कहा कि बॉण्ड पर प्रतिफल में बढ़ोतरी नकदी की सख्त स्थिति, वैश्विक बाजारों में प्रतिफल बढ़ने के दबाव और ब्रेंट कच्चे तेल की ऊंची कीमतों को दर्शाती है।

उन्होंने कहा, ‘‘बॉण्ड बाजार दिसंबर में होने वाली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक में संभावित ब्याज दर बढ़ोतरी को भी ध्यान में रख रहा है।’’ उन्होंने कहा कि आगे प्रतिफल की दिशा कच्चे तेल की कीमतों, महंगाई और आरबीआई के अगले कदम पर निर्भर करेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, सरकारी बॉण्ड प्रतिफल बढ़ने से सरकार को नए बॉण्ड जारी करते समय अधिक ब्याज देना पड़ता है। यदि प्रतिफल ऊंचे स्तर पर बना रहता है, तो सरकार का ब्याज खर्च बढ़ सकता है।

प्रमुख खबरें

पटना में Mallikarjun Kharge के भाषण के दौरान हंगामा, ‘मोदी का बाप भी जाएगा’ बयान पर मचा बवाल

मणिपुर में बंदूकों के बल पर शांति असंभव, Y Khemchand Singh ने की हथियार सौंपने की अपील

पूर्व जज Sanjay Kishan Kaul के संस्मरण पर Congress ने उठाए सवाल

Karwa Chauth से पहले घर पर ऐसे करें Body Polishing, पार्लर जाए बिना चमकेगी त्वचा