तेल के गिरते दामों का सरकार को नहीं मिल पा रहा फायदा, क्रूड ऑयल के शिप वापस भेजने को मजबूर

By अनुराग गुप्ता | Mar 30, 2020

नयी दिल्ली। ओपेक देशों के साथ रूस के तालमेल न बैठ पाने की वजह से साऊदी अरब ने प्राइस वॉर छेड़ दी थी। जिसकी वजह से क्रूड ऑयल की कीमतों में भारी कटौती देखी गई थी। लेकिन भारत सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर ड्यूटी में बढ़ोतरी कर राजकोषीय घाटे को कम करने का प्रयास किया था। मगर मौजूदा परिस्थिति इससे ठीक उलट हो गई। बता दें कि कोरोना वायरस की वजह से पनपे संकट को देखते को हुए भारत सरकार ने 21 दिन का पूर्ण लॉकडाउन घोषित कर दिया। यहां तक की सभी देशी-विदेशी विमानों की उड़ानों को भी रद्द कर दिया। जिसकी वजह से हो रही तेल की खपत पर भी लगाम लग गई। 

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 तेल कम्पनियों को नहीं मिल रहा मुनाफा

कोरोना वायरस की वजह से ऑयल और गैस की कम कीमतों का भी कन्ज्यूमर्स फायदा नहीं उठा पा रहे हैं और सीधा असर इस सेक्टर से पैदा होने वाले रेवेन्यू पर भी पड़ सकता है। हाल ही सरकार द्वारा बढ़ाए गए दामों का भी कोई फायदा नहीं मिल पा रहा है क्योंकि लॉकडाउन के चलते सड़कों पर सन्नाटा पसरा है और आवागमन भी तमाम व्यवस्थाओं पर सरकार ने फिलहाल रोक लगा दी है।

इस रोक के बाद पेट्रोलियम और गैस कम्पनियों का स्टॉक भी बढ़ गया है और बाजार में मांग न होने की वजह से उन्होंने अपना प्रोडक्शन भी रोक दिया है। इतना ही नहीं अब कम्पनियों के पास प्रॉडक्ट्स को रखने के लिए स्थान भी नहीं बचे हैं। ऐसे में वह जल्द ही नए स्थान की तलाश में जुट जाएंगे। 

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एक अधिकारी ने बताया कि भारत में पेट्रोलियम पदार्थों की मांग में कमी आने की वजह से क्रूड ऑयल लेकर आ रहे शिप को वापस भेजना पड़ रहा है। वहीं गेल के मुताबिक गैस की बिक्री में भी काफी गिरावट देखी गई है। इन दिनों वह घटकर 63 मिलियन मीट्रिक स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रतिदिन रह गई है। इतना ही नहीं ONGC ने भी अपने गैस प्रॉडक्शन में 10 प्रतिशत की कमी की है।

घट रही है पेट्रोल-डीजल की मांग

बीते दिनों इंडियन ऑयल ने साफ कर दिया था कि भारत में पेट्रोल डीजल और रसोई गैस का पर्याप्त भंडार है। उल्लेखनीय है कि कोरोना वायरस के कारण आवाजाही पर देशव्यापी पाबंदी के चलते वहनों और विमानों आदि का परिचालन प्रभावित होने से डीजल, पेट्रोल और विमान ईंधन की मांग घट गई है। मार्च में पेट्रोल की मांग 8% और डीजल की मांग 16% घट गई है। इसी तरह विमान ईंधन की मांग में भी 20% की गिरावट दर्ज की गई है।

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