बीटिंग रिट्रीट से हटी गांधी जी की पसंदीदा धुन, 26 धुनों में 'अबाइड विद मी' को जगह नहीं, कांग्रेस ने साधा सरकार पर निशाना

By रेनू तिवारी | Jan 23, 2022

नयी दिल्ली/पणजी। इस साल के बीटिंग रिट्रीट समारोह से महात्मा गांधी के पसंदीदा गाने की धुन 'अबाइड विद मी' को हटाने के केंद्र के फैसले पर आपत्ति जताते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने कहा कि सरकार के इस कदम ने 'सोचने वाले और संवेदनशील' लोगों को चोट पहुंचाई है। 1847 में स्कॉटिश एंग्लिकन कवि और भजन विज्ञानी हेनरी फ्रांसिस लिटे द्वारा लिखित 'एबाइड विद मी' 1950 से बीटिंग रिट्रीट समारोह का हिस्सा था। भारतीय सेना ने शनिवार को घोषणा की कि इसे इस साल के समारोह से हटा दिया गया है। इस वर्ष के समारोह के लिए, भजन को लोकप्रिय देशभक्ति गीत "ऐ मेरे वतन के लोगन" से बदल दिया गया है, जिसे कवि प्रदीप ने 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान भारतीय सैनिकों द्वारा किए गए सर्वोच्च बलिदान को मनाने के लिए लिखा था।

सरकार ने ‘बीटिंग रिट्रीट’ समारोह से ‘अबाइड विथ मी’ धुन को हटाया

केंद्र सरकार ने महात्मा गांधी के प्रिय रहे भजनों में से एक ‘ अबाइड विथ मी’ को इस साल से ‘बीटिंग रिट्रीट’ समारोह से हटाने का फैसला किया है क्योंकि उसका मानना है कि देश की आजादी के 75वें साल आलोक में मनाए जा रहे ‘‘आजादी का अमृत महोत्सव’ में भारतीय धुन अधिक अनुकूल हैं। वहीं, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने सरकार के इस कदम पर आपत्ति जताई है और कहा कि यह विचारशील और संवेदनशील लोगों को आहत करता है।

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 सालों पुरानी है ‘अबाइड विथ मी’ की रचना

उल्लेखनीय है कि ‘अबाइड विथ मी’ की रचना स्कॉटिश एंजलिकन कवि और भजन ज्ञानी हेनरी फ्रांसिस लाइट ने सन 1847 में की थी और वर्ष 1950 से ही यह ‘बीटिंग रिट्रीट’ समारोह का हिस्सा है। भारतीय सेना ने शनिवार को घोषणा की कि इस साल से समारोह में इसे शामिल नहीं किया जाएगा। सूत्रों ने बताया कि केंद्र चाहता था कि अधिकतर भारतीय धुनों को समारोह में शामिल किया जाए, जिसके फलस्वरूप फैसला किया गया कि 29 जनवरी को आयोजित होने वाले समारोह में केवल भारतीय मूल के धुनों को ही बजाया जाएगा। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2020 में भी ‘अबाइड विथ मी’ को समारोह से हटाने का फैसला किया था लेकिन बाद में विवाद होने पर इसे यथावत रहने दिया गया।

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‘अबाइड विथ मी’ की जगह बजेगी ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ धुन

उन्होंने बताया कि इस वर्ष के समारोह के लिए ‘ अबाइड विथ मी’ भजन के स्थान पर लोकप्रिय देशभक्ति गीत ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ को लिया गया है जिसकी रचना कवि प्रदीप ने वर्ष-1962 के भारत-चीन युद्ध में भारतीय जवानों द्वारा दी गई शहादत को याद करने के लिए की थी। सूत्रों ने रेखांकित किया कि ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ भारतीय धुन है और उन सभी के प्रति सम्मान प्रकट करती है जिन्होंने देश की सुरक्षा और अखंडता के लिए अपने जीवन का बलिदान किया। इस साल से ‘बीटिंग रिट्रीट’ समारोह से इस भजन को हटाने का सरकार का फैसला इंडिया गेट पर जल रही अमर जवार जवान ज्योति को राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की ज्योति से मिलाने के फैसले के बाद आया है।

ज्योति को मिलाने का संक्षित समारोह शुक्रवार को आयोजित किया गया था। कुछ सैन्य अधिकारियों ने ज्योति को मिलाने के फैसले का बचाव किया था वहीं, कांग्रेस सहित कई विपक्षी पार्टियों ने आरोप लगाया था कि भाजपा नीति केंद्र सरकार ‘‘इतिहास को मिटा’’रही है।

बीटिंग रिट्रीट में बजेंगी ये सभी धुन

गौरतलब है कि सेना द्वारा शनिवार को इस साल विजय चौक पर होने वाले ‘बीटिंग रिट्रीट’ समारोह के लिए जारी ब्रॉशर में 26 धुनों की सूची दी गई है जिन्हें बजाया जाएगा। इनमें ‘हे कांछा’, ‘चन्ना बिलौरी’, ‘जय जन्म भूमि’, ‘ नृत्य सरिता’, ‘ विजय जोश’, ‘ केसरिया बन्ना’, ‘वीर सियाचीन’ आदि शामिल हैं। सरकार के इस फैसले पर टिप्पणी करते हुए कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने रविवार को पणजी में पत्रकारों से कहा, ‘‘ अबाइड विथ मी’ पुराना भजन है जिसकी रचना 1847 में की गई थी। यह महात्मा गांधी का प्रिय भजन है। वर्ष 1950 में जबसे हम गणतंत्र हुये हैं गणंतत्र दिवस समारोह का आखिरी कार्यक्रम बीटिंग रिट्रीट का समापन इसी धुन से होता रहा है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ यह बहुत दुखी करने वाला है कि ईसाई भजन जो अब ईसाई भजन नहीं रह गया है बल्कि धर्मनिरपेक्ष भजन है, गणतंत्र दिवस परेड से हटाया जा रहा है। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह दुखी करने वाला है कि सरकार ने भारत की आजादी के 75वें साल में भजन को हटाने का फैसला किया है।

कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘इस फैसले ने विचारशील और संवेदनशील लोगों को बहुत आहत किया है। मुझे उम्मीद है कि गणतंत्र दिवस पर बेहतर समझ होगी और इसे बहाल किया जाएगा जिसपर हमारी टुकड़ी मार्च करेगी।’’ उल्लेखनीय है कि बीटिंग रिट्रीट के साथ 24 जनवरी से शुरू करीब एक सप्ताह के गणतंत्र दिवस समारोह का समापन होता है।हालांकि, सरकार ने इस साल से 23 जनवरी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती से ही गणतंत्र दिवस समारोह शुरू करने का फैसला कियाहै।

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