By निधि अविनाश | Feb 16, 2021
डॉ जेसनूर दयारा जिन्होंने हाल ही में गुजरात की पहली ट्रांस महिला डॉक्टर बनने के लिए एक रूसी विश्वविद्यालय से एमबीबीएस की डिग्री हासिल की, उनका जन्म गुजरात के छोटे से शहर गोधरा में हुआ था। वह बचपन से समझ गई थी की उनका शरीर भले ही पुरुष का है लेकिन अंदर से वह एक महिला जैसा महसूस करती है। वह अपने बचपन को याद करते हुए बताती है कि कैसे बचपन में वह साड़ी पहनने के लिए तरसती थी और लिपस्टिक का इस्तेमाल अपनी माँ और बहन की तरह करती थी। भले ही वह महिला की तरह महसूस करती थी लेकिन उन्होंने अपने आंतरिक स्त्री को छिपाए रखा, वह नहीं चाहती थी कि उनका परिवार दयारा के बारे में गलत महसूस करे। दयारा जब मेडिकल की पढ़ाई के लिए विदेश गई तब वह पूरी तरह से अजाद हुई और उन्हें एक नई पहचान मिली। उन्होंने हिम्मत करी और वास्तविकता को अपनाया। दायरा की इस वास्तविकता को उनके परिवार वालों ने भी अपनाया।
आपको बता दें कि लोकसभा में पारित सरोगेसी (विनियमन) विधेयक, 2019, के अनुसार किसी भी एक पुरुष या एक एलजीबीटीक्यू जोड़े या एक लिव-इन रिलेशनशिप जोड़े को सरोगेसी का ऑप्शन चुनने की अनुमति नहीं देता है। विधेयक को उच्च सदन और राष्ट्रपति की मंजूरी का इंतजार है। डॉ दयारा ने कहा, "एक माँ बनने के लिए, मैं दुनिया भर में सरोगेसी के ऑप्शन की तलाश में रहूंगी,मुझे खुद को स्वीकार करने और अपने परिवार और समाज को मुझे स्वीकार करने के लिए बहुत हिम्मत की जरूरत लगी है। मैं बायोलॉजिकल माता-पिता बनकर अपने और अपने जैसे अन्य लोगों के लिए एक नया अध्याय लिखना चाहती हूं। ”