हरसिमरत कौर बोलीं, किसानों के समर्थन में उठाई गई मेरी आवाज को नहीं सुना गया

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Sep 18, 2020

नयी दिल्ली। किसान विधेयकों के विरोध में केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने के एक दिन बाद शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) की वरिष्ठ नेता हरसिमरत कौर बादल ने शुक्रवार को कहा कि उन्हें दुख है कि किसानों के समर्थन में उठाई गई उनकी आवाज को नहीं सुना गया और साथ ही उन्होंने सरकार से इन विधेयकों को विस्तृत विचार-विमर्श के लिए संसदीय समिति के पास भेजने की मांग की। बादल ने एक साक्षात्कार में कहा, ‘‘इन तीन विधेयकों पर संसद की बहस में भाग लेने और अपना विरोध दर्ज कराने का कर्तव्य निभाने के लिए मैं अपनी मां को अस्पताल के आईसीयू में छोड़कर आई।इसके बाद मैंने इन प्रस्तावित विधेयकों के विरोध में इस्तीफा दे दिया।’’ उन्होंने अपने पति और शिअद अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के गुरुवार रात लोकसभा में इन विधेयकों पर कड़ा विरोध करने के बाद इस्तीफा दे दिया था। सुखवीर सिंह बादल ने दावा किया कि प्रस्तावित विधेयकों से पंजाब में कृषि क्षेत्र ‘‘नष्ट’’ हो जाएगा और उन्होंने घोषणा की कि हरसिमरत कौर बादल इन तीन विधेयकों के विरोध में सरकार में मंत्री पद छोड़ देंगी। हरसिमरत कौर बादल पहली बार 2014 में केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्री बनीं थीं और भाजपा की अगुवाई वाली राजग सरकार के 2019 से शुरू हुए दूसरे कार्यकाल में यह मंत्रालय उनके पास बना रहा। उन्होंने कहा कि वे सरकार से गुहार लगाती हैं कि किसानों की सहमति लिए बिना इन विधेयकों पर आगे न बढ़ें। शिअद ने तीनों विधेयकों के खिलाफ मतदान किया। ये विधेयक हैं- आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक, कृषि उत्पाद व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) विधेयक, और कृषि सेवाओं एवं मूल्य आश्वासन परकिसानका (संरक्षण एवं सशक्तिकरण) समझौता विधेयक। इन विधेयकों को लोकसभा में मतदान के दौरान ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। कांग्रेस और कई अन्य विपक्षी दल भी इन विधेयकों का विरोध कर रहे हैं, जबकि शिअद इन विधेयकों के खिलाफ सामने आने वाला राजग का एकमात्र सदस्य दल है। बादल ने कहा, ‘‘मैं मंत्रिपरिषद में अध्यादेश आने के बाद से इसका विरोध करती रही हूं। मैं किसानों के सभी संदेह और डर को दूर करने के लिए किसानों और सरकार के बीच सेतु का काम कर रही थी। मैं सरकार से अपील करती हूं कि जब तक किसानों की सभी आशंकाएं दूर न हो जाएं, तब तक इन विधेयकों पर आगे न बढ़ा जाए।’’ उन्होंने आगे कहा, ‘‘मुझे इस बात का बहुत दुःख है कि मेरी आवाज मंत्रिपरिषद में नहीं सुनी गई और सरकार ने इसे किसानों सहित सभी हितधारकों के साथ परामर्श के लिए संसद की प्रवर समिति को नहीं भेजा। अगर मेरी आवाज सुनी गई होती, तो किसान विरोध करने के लिए सड़कों पर न आते।’’ 

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