By अभिनय आकाश | Apr 30, 2025
मद्रास उच्च न्यायालय ने 22 वर्षीय एक व्यक्ति को यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत 17 वर्षीय लड़की के साथ यौन संबंध बनाने के लिए दस साल के कारावास की सजा सुनाई, जो मुकदमे के दौरान उसकी पत्नी बन गई। हाई कोर्ट ने कड़े शब्दों में फैसला सुनाते हुए कहा कि पॉक्सो अधिनियम बहुत स्पष्ट है कि 18 वर्ष की आयु से पहले सहमति का कोई सवाल ही नहीं है। पीठ ने कहा कि पीड़िता के साथ आरोपी की बाद की शादी उसके बचपन में किए गए अपराध को माफ नहीं करती है। इस तरह के बचाव को स्वीकार करना पॉक्सो अधिनियम के मूल उद्देश्य को कमजोर करेगा।
उच्च न्यायालय ने यह देखते हुए कि वह घटना के समय नाबालिग थी, कहा कि सहमति या भागने पर कोई विचार नहीं किया जा सकता क्योंकि वह कानूनी रूप से पोक्सो अधिनियम में दी गई परिभाषा के तहत एक बच्ची थी। अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि ऐसे अपराधों को न केवल एक व्यक्ति के खिलाफ अपराध माना जाना चाहिए, बल्कि समाज के खिलाफ अपराध माना जाना चाहिए।