Yes Milord: दूसरों को न्याय देने वाले HC जज खुद न्याय के लिए पहुंचे अदालत, याचिका में क्या 10 तर्क दिए?

By अभिनय आकाश | Jul 19, 2025

दूसरों को न्याय देने वाले हाई कोर्ट के जज खुद के न्याय के लिए देश की सर्वोच्च अदालत के समक्ष पहुंचे हैं। सुनने में आपको पहुंच अजीब लग रहा होगा कि जो व्यक्ति कुर्सी पर बैठकर लोगों के मामले में फैसला सुनाया करता था। न्याय करता था और लोगों को इंसाफ देता था। वही शख्स अब खुद के न्याय के लिए अदालत पहुंचा है। वो भी देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट के सामने। आखिर क्या हुआ उस जज के साथ, किस मामले में उन्हें न्याय चाहिए। दरअसल, दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व और मौजूदा इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ गंभीर भ्रष्टाचार के आरोपों पर शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र में उनके खिलाफ महाभियोग लाया जा रहा है। ये मामला तब शुरू हुआ जब मार्च 2025 में उनकी दिल्ली स्थित सरकारी आवास में आग लगने के बाद भारी मात्रा में नगदी बरामद हुई। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की जांच समिति ने जस्टिस वर्मा को दोषी ठहराया था। इसके बाद तत्कालीन मुख्य न्यायधीश संजीव खन्ना ने उनकी बर्खास्तगी की सिफारिश की थी। जस्टिस यशवंत वर्मा ने इस जांच समिति की रिपोर्ट और महाभियोग की सिफारिश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। 

इसे भी पढ़ें: आरजी कर पीड़िता का नाम किया था उजागर, कोलकाता के पूर्व पुलिस आयुक्त ने HC से मांगी माफी

याचिका में 10 तर्क दिए

राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भेजी गई महाभियोग सिफारिश अनुच्छेद 124 और 218 का उल्लंघन है।

1999 की फुल कोर्ट बैठक में बनी इन-हाउस प्रक्रिया सिर्फ प्रशासनिक व्यवस्था है, न कि संवैधानिक या वैधानिक। इसे न्यायाधीश को पद से हटाने जैसे गंभीर निर्णय का आधार नहीं बनाया जा सकता।

जांच समिति का गठन बिना औपचारिक शिकायत के सिर्फ अनुमानों और अप्रमाणित जानकारियों से किया। यह इन-हाउस प्रक्रिया के मूल उद्देश्य के ही खिलाफ है।

22 मार्च 2025 को प्रेस विज्ञप्ति में आरोपों का सार्वजनिक उल्लेख किया। इससे मीडिया ट्रायल शुरू हो गया और उनकी प्रतिष्ठा को गहरा नुकसान पहुंचा।

न साक्ष्य दिखाए, न आरोपों के खंडन करने का मौका दिया। मुख्य गवाहों से मेरी अनुपस्थिति में पूछताछ हुई। सीसीटीवी फुटेज को सबूत के तौर पर नहीं लिया गया।

समिति ने नकदी किसने रखी, वह असली थी या आग कैसे लगी जैसे मूल प्रश्नों को अनदेखा कर समिति की रिपोर्ट अनुमानों और पूर्वधारणाओं थी, न कि किसी ठोस सबूत पर। यह गंभीर कदाचा करने के लिए अपर्याप्त है।

जांच रिपोर्ट मिलने के कुछ ही घंटों में तत्कालीन चीफ जस्टिस ने इस्तीफा देने या महाभियोग का सामना करने की चेतावनी दी। पक्ष रखने का अवसर नहीं दिया।

पिछले मामलों में न्यायाधीशों को व्यक्तिगत सुनवाई का मौका मिला था। इस मामले में परंपरा की अनदेखी हुई।

रिपोर्ट गोपनीय बनाए रखने के बजाय उसके अंश मीडिया में लीक और तोड़-मरोड़ कर दिए गए, जिससे छवि खराब हुई जिसकी कभी भरपाई नहीं हो सकेगी।

इसे भी पढ़ें: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बिजली वितरण निगमों के निजीकरण के खिलाफ याचिका खारिज की

संसद में आएगा महाभियोग प्रस्ताव

इस बीच, कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाने की पूरी तैयारी है। सभी पार्टियों से बात हो चुकी है और संसद की राय एकजुट है। उन्होंने कहा, 'लगभग सभी बड़े राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेताओं से चर्चा की है। जिन पार्टियों के सिर्फ एक-एक सांसद हैं, उनसे भी बात करूंगा, ताकि संसद का यह रुख सर्वसम्मति वाला हो। वहीं, कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि यह फैसला सरकार का नहीं, बल्कि सांसदों का है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा है कि उनकी पार्टी के सांसद भी महाभियोग प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करेंगे। यानी विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों संवैधानिक कार्रवाई के पक्ष में हैं।

प्रमुख खबरें

Women Health: क्या प्रेग्नेंसी वाला Sugar, Delivery के बाद भी बना रहता है? जानें पूरा सच

Ram Navami पर PM Modi का राष्ट्र के नाम संदेश, प्रभु राम के आशीर्वाद से पूरा होगा Viksit Bharat का संकल्प

Donald Trump का सनसनीखेज दावा, Iran ने दिया था Supreme Leader बनने का Offer!

Bengal में किसकी सरकार? Pre-Poll Survey ने खोला राज, TMC और BJP की सीटों का पूरा गणित