ई-कॉमर्स कारोबार के कंपनी के रूप में पंजीकरण के नियम पर उच्च न्यायालय ने केंद्र से जवाब मांगा

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Nov 23, 2020

नयी दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियमों के एक प्रावधान को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा है। इस प्रावधान के तहत वस्तुओं और सेवाओं की ऑनलाइन बिक्री करने वाली इकाई के लिए भारत में कंपनी के रूप में पंजीकरण कराना अनिवार्य है। मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ ने सोमवार को ऑनलाइन कंटेंट का सृजन करने वाले एक व्यक्ति की याचिका पर उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय को नोटिस जारी करते हुए इस मामले में अपना रुख स्पष्ट करने को कहा है।

इसे भी पढ़ें: हिंदूजा समूह निजी बैंकों में प्रवर्तक की हिस्सेदारी 26 प्रतिशत करने के पक्ष में सहमत

याचिकाकर्ता ध्रुव सेठी ने कहा कि यह नियम एकल स्वामित्व वाले कारोबार के लिए कंपनी के रूप में पंजीकरण को अनिवार्य बनाता है। ऐसे में कंपनी के रूप में पंजीकरण के बिना ई-कॉमर्स कारोबार नहीं किया जा सकता है। सेठी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद ग्रोवर और सम्यक गंगवाल ने अदालत से कहा कि इस नियम की वजह से प्रत्येक ऐसा कारोबार जो कंपनी नहीं है, वह ई-कॉमर्स क्षेत्र से बाहर हो जाएगा। या फिर उन्हें अपने उत्पादों की बिक्री अमेजन या फ्लिपकार्ट जैसे मंचों के जरिये करनी पड़ेगी। पीठ ने सुनवाई के दौरान सुझाव दिया कि याचिकाकर्ता अमेजन पर सूचीबद्ध होकर अपने उत्पादों और सेवाओं की बिक्री कर सकता है। इस पर अधिवक्ताओं ने कहा कि ऐसा करने पर उसे अमेजन को भुगतान करना होगा, जो खुद के जरिये उत्पादों की बिक्री पर नहीं करना होता है।

All the updates here:

प्रमुख खबरें

Raisina Dialogue 2026: फिनलैंड के राष्ट्रपति 4 दिवसीय दौरे पर पहुंचे भारत, व्यापार और नवाचार प्रमुख एजेंडा

T20 World Cup 2026 में व्यूवरशिप का बना नया वर्ल्ड रिकॉर्ड, पिछले सभी कीर्तिमान हुए ध्वस्त

तेहरान की गुप्त बैठक से ‘ईरान के ओपेनहाइमर’ तक: मोसाद के उन ऑपरेशनों की कहानी जिसने हिला दिया ईरान

BTS का धमाका! नए एल्बम Arirang का 14-गानों वाला ट्रैकलिस्ट जारी, जानें रिलीज डेट और 2026 वर्ल्ड टूर का पूरा शेड्यूल