समझदारों का निरोगी बचपन अभियान (व्यंग्य)

By संतोष उत्सुक | Dec 26, 2025

यह बात बहुत ज़्यादा तारीफ़ के काबिल है कि पिछले कई दशकों से, बेचारे बचपन को निरोगी रखने के संजीदा प्रयास निरंतर किए जाते रहे हैं। यह कार्य एक अभियान की तरह लिया जाता रहा है ठीक उसी तरह जैसे कुछ महीने के बच्चे, बड़े होते बच्चे, मोबाइल फोन को अपनाने के अभियान में लगे होते हैं। इस सन्दर्भ में उनके अभिभावक सरकारी योजनाओं की तरह, उनकी संजीदा मदद कर खुश हो रहे होते हैं। बचपन निरोगी अभियान के अंतर्गत महिलाओं को स्वस्थ रखने, बेहतर पोषित करने, उनके परिवार को सशक्त बनाने के लिए ईमानदार कोशिश की जाती है। वह बात अलग है कि सामान्य हस्पताल में, चिकित्सक के कमरे के बाहर लगी कतार में गर्भवती महिलाओं के बैठने के लिए स्टूल तक नहीं होता । 

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दूसरे किस्म के माहिर लोग विज्ञापन तैयार कर रहे होते हैं। अभियान की योजनाएं बचपन पर आकर्षक, सुविधाजनक और लाभदायक रौशनी डालती है। जिनसे पता चलता है कि पैदा होने के बाद बच्चों के लिए उचित अंतराल पर लगने वाली वैक्सीन भी कतार में खड़ी होती हैं। उनसे यह भी पता चलता है कि कौन कौन सी बीमारी से बचाव होगा लेकिन यह तो भाग्य और आर्थिक परिस्थिति ही बताती है कि अमुक वैक्सीन किन किन नक्षत्रों में पैदा हुए शिशुओं को मिलने वाली है या किसी भी हालत में नहीं मिलने वाली है। उधर भूख और स्वास्थ्य की ज़रूरत, परेशान हालात में किसी अंधेरे कोने में पड़ी होती है जिसे वास्तव में नीति और राजनीति नहीं देखना चाहती। 

हम यहां पर माताओं के कुपोषण बारे ज्यादा बात नहीं कर सकते क्यूंकि उनके लिए भी समझदार लोग हमेशा जागरूक रहते हैं। पुराने अभियान बेस्वाद होने पर नए अभियान स्वादिष्ट बना सकने की खिचड़ी पका रहे होते हैं।

- संतोष उत्सुक 

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