हिजाब विवादः भारत का तालिबानीकरण करने की गहरी साजिश

By मृत्युजंय दीक्षित | Feb 16, 2022

कर्नाटक में उडुप्पी के एक छोटे से स्कूल से प्रारम्भ हुआ हिजाब विवाद अब एक बड़ा और विकराल रूप ले चुका है। देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन करके विवाद को और गहरा करने का प्रयास किया जा रहा है। जब विश्व के कई देशों ने मुस्लिम लड़कियों के हिजाब पहनने पर प्रतिबंध लगा दिया है, तब भारत में इस्लामिक कटटरपंथियों द्वारा हिजाब आंदोलन खड़ा कर देना एक राजनैतिक साजिश लग रही है जो प्रथम दृष्टया विपक्षी दलों का काम लग रहा है किन्तु इसके पीछे अंतरराष्ट्रीय साजिश होने की आशंका से भी इंकार नहीं किया जा सकता ।

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जिस तरह सेक्युलर दलों ने हिजाब विवाद को लपका तथा आग में घी डाल कर भड़काने का काम किया वो आश्चर्यचकित करने वाला है, कर्नाटक से लेकर महाराष्ट्र के मालेगांव तक इनकी भूमिका ''आग लगा दो, रोटी सेक लो'' वाली दिखाई दे रही है। महाराष्ट्र में एआईएएम, शरद पवार की एनसीपी ने तो मुस्लिम समाज की महिलाओें व कटटरपंथियों को भड़काकर हिजाब डे तक बना डाला है। एआईएएम नेता ओवैसी यहां तक बौखला गये हैं कि वह कह रहे हैं कि जब तक हिजाब नहीं तब तक किताब नहीं, वह यह भी कह रहे हैं कि एक दिन एक हिजाबी देश की प्रधानमंत्री भी बनेगी। यह पूरा का पूरा घटनाक्रम एक बहुत बडी साजिश है जिसे तथाकथित सेकुलर राजनैतिक दल अपनी राजनैतिक रोटियां सेकने के लिए अंजाम दे रहे हैं। यही कारण है कि विपक्ष हिजाब विवाद की आड़ में मोदी सरकार, भाजपा व संघ के खिलाफ नये सिरे से नफरत फैला रहा और मुसलमानों का तुष्टिकरण करने के लिए खूब बयानबाजी कर रहा है।

हिजाब विवाद को राजनैतिक रंग देने और नफरत की आग को भड़काने के लिए सोशल मीडिया का भी खूब इस्तेमाल किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो जारी किये गये हैं जिसमें जिसमें कुछ मुस्लिम महिलाएं हिजाब पहनकर क्रिकेट खेल रही हैं और कहीं फुटबाल और हॉकी खेल रहीं हैं। एक मुस्लिम महिला चिकित्सक का वीडियो आया जो हिजाब पहनकर हास्पिटल जा रही है और मरीजों को देख रही है। बिना हेलमेट राइडिंग करती और ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन कर भद्दे इशारे करती बुर्कानशीनों के वीडियो भी आ रहे हैं।

हिजाब आंदोलन में बॉलीवुड भी कूद पड़ा है जो फिल्म अभिनेत्रियां फिल्मों में बिकनी पहनती हैं वह भी हिजाब का समर्थन कर रही है। एक सिने अभिनेत्री ने तो यह तक कह डाला कि जब एक सिख पगड़ी बांधकर स्कूल जा सकता है तो मुस्लिम महिला हिजाब पहनकर क्यों नहीं जा सकती। यह कितनी घातक और विकृत सोच है।

राजनैतिक विश्लेषकों का मत है कि पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में बहुत सी मुस्लिम महिलाएं व युवतियां जो तीन तलाक कानून से बहुत खुश हैं तथा जिन गरीब मुस्लिम महिलाओं को उज्ज्वला योजना का लाभ मिला है, फ्री राशन मिला है आवास मिला है और सुरक्षा मिली है वे बीजेपी को वोट देने जा रही थीं अतः ऐसे में वातावारण को खराब कर उन महिलाओं को वोट देने से रोकने के लिए यह आंदोलन खड़ा  किया गया है।

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अगर कटटरपंथियों के दबाव में आकर उनकी यह मांग एक मान ली गयी तो उनकी डिमांड और बढ़ती जायेगी। विद्यालयों में बच्चों के बीच समानता बढ़ाने के लिए यूनिफार्म का प्रावधान किया गया है। कुछ तत्व इस बात को अनदेखा कर इस्लाम के नाम पर हंगामा कर रहे हैं। क्या इन लोगों को पता नहीं है कि भारतीय संविधान के अनुसार प्राथमिक शिक्षा  सबके लिए अनिवार्य है। इस अनिवार्यता के बावजूद आज भी देशकी 66 प्रतिशत मुस्लिम महिलाएं निरक्षर हैं। इसी मजहबी कट्टरता ने मुस्लिम महिलाओं की साक्षरता दर को इतना नीचे रखा। बेटियों को घरों से निकलने नहीं दिया जाता। दूसरा उन पर बुर्के को लाद दिया जाता था। बेटियों को सिर से पांव तक बेडियों की तरह जकड़ दिया गया। आज केंद्र सरकार ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के अंतर्गत शिक्षा के लिए विशेष प्रारंभ किये हैं जिसके सुखद परिणाम प्राप्त हो रहे थे लेकिन मुस्लिम समाज के कुछ ठेकेदारों और उनके हमराह राजनैतिक दलों को यह बात पसंद नहीं आ रही है।

उडुप्पी जिले का एक हिजाब विवाद आज पत्थरबाजी व हिंसक प्रदर्शनों में बदल गया है। दिल्ली के शाहीन बाग में नारा-ए-तकदीर व अल्लाह हू अकबर के नारे गूंज रहे हैं। बुर्कानशीं मुस्लिम लड़की कटटरपंथियों की पोस्टर गर्ल बन बन चुकी है। पाकिस्तान, तुर्की से उसे बधाई मिल रही है और तो और मलाला जैसे लोग उसके समर्थन में ट्वीट कर रहे हैं।

इस बवाल में देशमें जिहाद, अलगाववाद व इस्लामिक कटटरता की फैक्टरी कहलायी जाने वाली संस्था एसडीपीआई, पीएफआई की संलिप्तता जगजाहिर हो गई है। हिजाब की आड़ में भारत में दंगे की आग को भड़काने की साजिश भी बेनकाब हो चुकी है। इस आग को भड़काने में पाक खुफिया एंजेसी आईएसआई व सिख फार जस्टिस जैसे संगठनों की भूमिका सामने आ रही है।

कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष डी के शिवप्रसाद व कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भडकाऊ ट्वीट किये। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने देशमें गृहयुद्ध छिडने की बात कह दी। कांग्रेस सहित सभी दल एक बार फिर तुष्टिकरण के चलते नीचता पर उतर आये हैं। उप्र में एक सपा नेता ने हिजाब पर विवादित बयान दिया कि हिजाब पर हाथ डालने वालों  का हाथ काट देंगे, आखिर यह लोग चाहते क्या हैं। स्पष्ट है कांग्रेस तथा अन्य विपक्षी दल एसडीपीआई, पीएफआई तथा आईएसआई व सिख फार जस्टिस जैसे संगठनों का सहारा लेकर चुनाव में है।

देशके सभी विद्यालय समता, समानता व एकरूपता के केंद्र हैं न कि जाति, पंथ, मत पंथ भाषा भाषा या खानपान के आधार पर अलगाववाद के अड्डे। अभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने एक साक्षात्कार में कहा था कि कांग्रेस देशको उपलब्धियां तो नहीं दे सकीं लेकिन उसने समस्याएं खूब दे दी है। हिजाब समस्या भी अब कांग्रेस की ही देन मानी जायेगी क्यांकि देशकी अदालतों में मुस्लिम छात्राओं का केस तो कांग्रेस वकील ही लड़ रहे हैं।

यह कटु सत्य है कि दुनिया के कई मुस्लिम और यूरोपियन देशों में हिजाब और बुर्के पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जा चुका है। भारत देश भी केवल संविधान से ही चलेगा कट्टरपंथियों की सनक से नहीं। अगर इन  अराजक तत्वों को यहीं पर नहीं रोका गया तो कल यह लोग स्कूलों में मस्जिद बनाने जैसी मांग करने लग जायेंगे।

- मृत्युंजय दीक्षित

इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। इस लेख से जुड़े सभी दावे या विचार के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है। जरूरी नहीं कि प्रभासाक्षी उनके व्यक्त किए गए विचारों से सहमत हो।

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