हिमाचल कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह, कांग्रेस आरामदेह स्थिति में, भाजपा भयभीत है

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Nov 09, 2022

शिमला। हिमाचल प्रदेश कांग्रेस के दिग्गज नेता और अपने दिवंगत पति वीरभद्र सिंह की विरासत को आगे बढ़ा रहीं राज्य पार्टी प्रमुख प्रतिभा सिंह ने बुधवार को कहा कि मुख्यमंत्री बनने की उनकी कोई महत्वाकांक्षा नहीं है और आलाकमान मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार से जुड़े मुद्दे को हल करेगा। मंडी से लोकसभा सदस्य प्रतिभा सिंह ने पीटीआई-को दिए एक साक्षात्कार में दावा किया कि राज्य में कांग्रेस आरामदेह स्थिति में है जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के शीर्ष नेताओं के चुनाव प्रचार से दिखता है कि सत्तारूढ़ दल भयभीत है और यहां कमजोर जमीन पर है। उन्होंने कहा कि वीरभद्र सिंह की विरासत हिमाचल में मुख्य कारक है और उससे 12 नवंबर को पार्टी को मत मिलेंगे। राज्य भर में चुनाव प्रचार कर रहीं प्रतिभा सिंह ने कहा कि दिवंगत मुख्यमंत्री का हिमाचल प्रदेश के लोगों के साथ गहरा जुड़ाव था और वह लोगों के दिल में आज भी जिंदा हैं। कांग्रेस नेता ने दावा किया कि इस बार राज्य में मोदी का जादू नहीं चलेगा। वह राज्य में कांग्रेस की संभावनाओं को लेकर आश्वस्त हैं और उन्होंने कहा कि भाजपा महंगाई और बेरोजगारी सहित विभिन्न मोर्चों पर नाकाम रही है। 

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कांग्रेस नेता ने कहा, हमें आरामदेह स्थिति में हैं। हम (68 सदस्यीय सदन में) करीब 45 सीटें जीतेंगे। नौ बार के विधायक और पांच बार के सांसद वीरभद्र सिंह छह बार हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। उनका जुलाई 2021 में 87 वर्ष की आयु में निधन हो गया था। कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद के कई आकांक्षी होने को लेकर सत्तारूढ़ भाजपा द्वारा पार्टी पर निशाना साधे जाने के बीच प्रतिभा सिंह ने कहा कि उनकी व्यक्तिगत रूप से ऐसी कोई महत्वाकांक्षा नहीं है। उन्होंने कहा, मेरी कोई बड़ी महत्वाकांक्षा नहीं है। मैं बहुत महत्वाकांक्षी नहीं हूं। हमें लगता है कि हमें राज्य की सेवा और लोगों की सेवा करनी है। यह आलाकमान को तय करने दें कि राज्य के लिए सबसे अच्छा क्या है। वे ऐसा करेंगे।’’ प्रतिभा सिंह (66) तीन बार की सांसद हैं और 2005 से राजनीति में सक्रिय हैं। वह 1985 से सामाजिक कार्यों में शामिल रही हैं। उनके पुत्र विक्रमादित्य सिंह शिमला ग्रामीण से विधायक हैं और एक बार फिर चुनाव मैदान में हैं। उन्होंने कहा, ‘‘वीरभद्र जी जब तक जीवित थे, उस समय तक कोई दावेदार नहीं था, लेकिन उनके नहीं रहने पर, कोई यह महसूस कर सकता है कि वह वरिष्ठ हैं या उन्हें पेश किया जाना चाहिए, लेकिन पार्टी ने किसी को सामने नहीं किया है। उन्होंने कहा, जो लोग निर्वाचित होंगे, उनकी आवाज सुनी जाएगी और हमने फैसला आलाकमान पर छोड़ दिया है... यह आलाकमान को तय करना है कि कौन बेहतर शासन दे सकता है। 

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