Vanakkam Poorvottar: Himanta Biswa Sarma ने दिया विवादित बयान, बोले- Miya Community को परेशान करो ताकि ये Assam छोड़कर भागें

By नीरज कुमार दुबे | Jan 29, 2026

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने बेहद विवादास्पद बयान देते हुए कहा है कि राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया के दौरान चार से पांच लाख मियां मतदाताओं के नाम हटाये जाएंगे। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वह और उनकी पार्टी भाजपा मियां समुदाय के सीधे खिलाफ हैं और उन्हें परेशान किया जाना चाहिए ताकि वे असम छोड़ कर चले जाएं। टिनसुकिया जिले के डिगबोई में एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि बंगाली भाषी मुस्लिम समुदाय जिसे अपमानजनक रूप से मियां कहा जाता है, उसे कठिनाइयों में डालना उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी कहा कि मियां लोगों को असम में नहीं बल्कि बांग्लादेश में वोट डालना चाहिए।

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उन्होंने यहां तक कहा कि आम लोग भी किसी भी तरह से मियां समुदाय को परेशान करें, चाहे वह रोजमर्रा की छोटी बात ही क्यों न हो। उनका कहना था कि अगर इन्हें परेशानी नहीं होगी तो ये असम के और इलाकों में फैलते जाएंगे। उन्होंने कहा कि अगर रिक्शा वाला मियां 5 रुपए मांगे तो उसे चार रुपए ही दो। मुख्यमंत्री ने कहा कि असली वोट चोरी कैसे होती है? जब बाहर से आए घुसपैठिए मतदाता सूची में घुस जाते हैं तब वोट चोरी होती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस मुझे जितनी भी गालियाँ दे हमारा घुसपैठियों के विरुद्ध अभियान जारी रहेगा। यह असम के अस्तित्व का सवाल है। वहीं अपनी टिप्पणियों पर विवाद होने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि वह हिंदू मुस्लिम के बीच विवाद नहीं पैदा कर रहे बल्कि असमिया के पक्ष में और बांग्लादेशी घुसपैठियों के विरोध में बोल रहे हैं।

उधर, मुख्यमंत्री के इन बयानों पर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। रायजोर दल के अध्यक्ष और विधायक अखिल गोगोई ने कहा कि असम की जनता ने मुख्यमंत्री को किसी एक समुदाय को लगातार दबाव में रखने के लिए नहीं चुना है। कांग्रेस नेता अमन वदूद ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने राज्य में संविधान को निष्प्रभावी कर दिया है।

हम आपको बता दें कि निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार दिसंबर 27 को जारी प्रारूप मतदाता सूची में असम में कुल दो करोड़ 51 लाख मतदाता दर्ज हैं। इसमें मृत घोषित किये गये, स्थानांतरित और दोहराव वाले नाम हटाये गये हैं। अधिकारियों का दावा है कि साठ लाख से अधिक घरों का सत्यापन किया गया है। 25 जनवरी को कांग्रेस सहित छह विपक्षी दलों ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन सौंप कर इस प्रक्रिया को मनमाना, गैरकानूनी और असंवैधानिक बताया तथा वास्तविक मतदाताओं को चुन चुन कर निशाना बनाने का आरोप लगाया था।

देखा जाये तो असम में मूल निवासियों के अधिकारों को सुरक्षित रखने और बाहरियों तथा घुसपैठियों के खिलाफ जनमत बनाने का काम तेजी से हो रहा है। आगामी विधानसभा चुनावों की दृष्टि से मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा के बयान बेहद अहम हैं। मियां समुदाय की विदेशी, घुसपैठिया और अवैध मतदाता वाली छवि को उभार कर वोटों का गणित भी साधा जा रहा है। यह रणनीति विपक्ष को बचाव की मुद्रा में तो धकेलती ही है साथ ही असली मुद्दों जैसे- बेरोजगारी, महंगाई और विकास को हाशिये पर भी डाल देती है।

हम आपको यह भी बता दें कि आगामी विधानसभा चुनावों में भाजपा की तैयारियों को धार देने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह दो दिवसीय असम दौरे पर हैं। डिब्रूगढ़ से लेकर गुवाहाटी तक होने वाली उनकी बैठकों का मकसद आगामी विधानसभा चुनाव के लिए हर मोर्चे को साधना है। यह स्पष्ट है कि भाजपा आक्रामक रणनीति के साथ चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में हिमंत बिस्व सरमा को आगे रख कर पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम और अपने विकास मॉडल के जरिये मतदाताओं को फिर लुभाना चाहती है। एनडीए का लक्ष्य अब केवल सत्ता में वापसी नहीं बल्कि सौ से अधिक सीटों पर जीत दर्ज कर असम में राजनीतिक वर्चस्व की हैट्रिक लगाना है। माना जा रहा है कि अपने दौरे के दौरान अमित शाह असम गण परिषद, यूपीपीएल और बीपीएफ के साथ सीट बंटवारे को अंतिम रूप देंगे और एनडीए के सभी घटक दलों के बीच के मतभेदों को भी सुलझाएंगे। पिछले चुनाव के आंकड़े भी यही बताते हैं कि एनडीए गठबंधन की जीत में आपसी तालमेल की अहम भूमिका रही थी।

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