By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Mar 26, 2022
मुंबई। मशहूर फिल्म निर्माता करण जौहर ने शनिवार को कहा कि हिंदी सिनेमा कभी-कभी झुंड में चलने की मानसिकता का शिकार हो जाता है, जहां फिल्म निर्माता कुछ नया करने के बजाय लोकप्रिय चलन वाली चीजों के पीछे भागने लगते हैं। जौहर एबीपी नेटवर्क के ‘भारत के विचार’ सम्मेलन में बोल रहे थे, जहां उन्होंने दक्षिण भारतीय फिल्म उद्योग के उदय और बॉलीवुड के लिए सीख पर चर्चा की। जौहर (49) ने फिल्म आलोचक मयंक शेखर से बातचीत में कहा, ‘‘मैं अपने आप को भी उसी श्रेणी में रख रहा हूं जब मैं कहता हूं कि हिंदी सिनेमा, मुझे लगता है कि कई बार हम झुंड में चलने की मानसिकता का शिकार हो जाते हैं।’’ उन्होंने उदाहरण दिए कि कैसे ऐसी कहानियों की बाढ़ आ गयी है जो या तो बायोपिक हैं या छोटे शहरों की कहानियां हैं।
स्टार बनने और सुपरस्टार के बारे में जौहर का मानना है कि खासतौर से हिंदी सिनेमा में ‘‘यह कलाकार का एक दौर है और अब हम सुपरस्टार के दौर में नहीं जी रहे हैं।’’ इस बीच, यह पूछने पर कि वह सोशल मीडिया पर बॉलीवुड से नफरत करो, बॉलीवुड पर प्रतिबंध लगाओ और उन्हें इंगित करते हुए कुछ हैशटैग्स के साथ बॉलीवुड की आलोचना को कैसे देखते हैं, तो इस पर जौहर ने कहा कि वह शुरुआत में इससे प्रभावित हुए लेकिन बाद में लोगों के एक बड़े वर्ग से मिले प्यार और समर्थन पर ध्यान दिया। उन्होंने कहा, ‘‘भावनात्मक रूप से दो साल पहले यह मेरे और मेरे परिवार के लिए बहुत कठिन समय था।