TN Assembly का ऐतिहासिक फैसला, NEET Resolution पास कर विजय सरकार ने Social Justice की ओर बढ़ाया कदम

By अभिनय आकाश | Aug 11, 2026

तमिलनाडु विधानसभा ने NEET के अस्तित्व के ख़िलाफ़ एक प्रस्ताव पास किया। NEET मेडिकल प्रवेश परीक्षा है जो पेपर लीक विवाद के केंद्र में रही है; इस विवाद और 'कॉकरोच जनता पार्टी' नाम के युवा संगठन के नेतृत्व में हुए विरोध-प्रदर्शनों के कारण पिछले महीने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के तौर पर बीजेपी नेता धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफ़ा देना पड़ा था। सत्ताधारी टीवीके और कांग्रेस समेत उसके सहयोगियों के अलावा, मुख्य विपक्षी पार्टी डीएमके, एआईएडीएमके और अन्य दलों ने भी NEET-विरोधी प्रस्ताव का समर्थन किया, जबकि BJP के एकमात्र विधायक ने सदन से वॉकआउट किया। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री केजी अरुणराज द्वारा पेश किए गए इस प्रस्ताव में बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार से अंडरग्रेजुएट मेडिकल कोर्स में एडमिशन के लिए नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट (NEET) को खत्म करने की मांग की गई है।

NEET नहीं तो क्या?

इस प्रस्ताव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार से आग्रह किया गया है कि वह संबंधित केंद्रीय कानूनों में संशोधन करे और अंडरग्रेजुएट मेडिकल एडमिशन के लिए एकसमान NEET व्यवस्था को खत्म करे। विजयन सरकार ने प्रस्ताव दिया है कि राज्य में मेडिकल कोर्स में एडमिशन 12वीं कक्षा की परीक्षा के अंकों के आधार पर हों। यह वही रुख है जो पिछली DMK सरकार ने भी अपनाया था।

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प्रस्ताव के मुख्य तर्क

प्रस्ताव में बताया गया है कि तमिलनाडु विधानसभा ने सर्वसम्मति से 2021 का बिल नंबर 43 पास किया था, जिसमें अंडरग्रेजुएट मेडिकल कोर्स में एडमिशन के लिए राज्य को NEET से छूट देने की मांग की गई थी। हालांकि, इसमें कहा गया है कि राष्ट्रपति की मंज़ूरी न मिलने के कारण वह बिल अभी भी लंबित है।

इस तर्क के केंद्र में, अन्य बातों के अलावा, दो मुख्य बिंदु हैं:

प्रस्ताव में तमिलनाडु सरकार ने कहा है कि NEET सिस्टम का असर उन छात्रों पर बहुत ज़्यादा पड़ता है जो तमिल माध्यम से पढ़ाई करते हैं, और साथ ही उन छात्रों पर भी जो ग्रामीण और आर्थिक रूप से पिछड़े बैकग्राउंड से आते हैं और मेडिकल शिक्षा हासिल करना चाहते हैं।

इसमें महंगे कोचिंग सेंटरों पर बढ़ती निर्भरता और छात्रों की स्कूली शिक्षा पर परीक्षा के असर को लेकर भी चिंता जताई गई है।

प्रस्ताव में कहा गया है कि NEET के लिए बहुत ज़्यादा फ़ीस वसूलने वाले अनियंत्रित कोचिंग सेंटर बढ़ गए हैं, जिससे छात्र स्कूल के सिलेबस से अपना ध्यान हटाकर मुख्य रूप से NEET की तैयारी पर ध्यान देने को मजबूर हो रहे हैं।

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