By रेनू तिवारी | Mar 16, 2026
पश्चिम एशिया में जारी भीषण युद्ध के बीच वैश्विक अर्थव्यवस्था की जीवन रेखा कहे जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस समुद्री मार्ग को खुला रखने के लिए लगभग सात देशों से अपने युद्धपोत भेजने की अपील की है। हालांकि, तेल की कीमतों में उछाल के बावजूद अभी तक किसी भी देश ने इस पर ठोस प्रतिबद्धता नहीं जताई है। फ्लोरिडा से वाशिंगटन लौटते समय पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि जो देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस मार्ग पर निर्भर हैं, उन्हें ही इसकी सुरक्षा का भार उठाना चाहिए। ट्रंप के मुख्य बिंदु इस प्रकार रहे:
अमेरिका की कम निर्भरता: ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका के पास तेल के अपने पर्याप्त स्रोत हैं, इसलिए यह मार्ग उनके लिए उतना अनिवार्य नहीं है।
चीन का जिक्र: ट्रंप ने कहा कि चीन का 90% तेल इसी मार्ग से गुजरता है, जबकि अमेरिका को यहाँ से बहुत कम तेल मिलता है।
अपील: अमेरिका पहले ही चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन से इस गठबंधन में शामिल होने का आह्वान कर चुका है।
ट्रंप ने कहा, ‘‘मैं इन देशों से मांग कर रहा हूं कि वे आगे आएं और अपने क्षेत्र की सुरक्षा करें क्योंकि यह उनका ही क्षेत्र है।’’ उन्होंने फ्लोरिडा से वाशिंगटन लौटते समय एयर फोर्स वन विमान में पत्रकारों से बातचीत में यह भी दावा किया कि यह समुद्री मार्ग अमेरिका के लिए उतना जरूरी नहीं है, क्योंकि अमेरिका के पास तेल तक अपनी पहुंच है। ट्रंप ने कहा कि चीन को लगभग 90 प्रतिशत तेल इसी मार्ग से मिलता है, जबकि अमेरिका को वहां से बहुत कम तेल मिलता है।
हालांकि उन्होंने यह बताने से इनकार कर दिया कि क्या चीन इस गठबंधन में शामिल होगा। इससे पहले ट्रंप चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन से इसमें शामिल होने की अपील कर चुके हैं। इस बीच, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ‘सीबीएस’ से कहा कि तेहरान से ‘‘कई देशों ने अपने जहाजों को सुरक्षित गुजरने देने के लिए संपर्क किया है लेकिन इस बारे में फैसला हमारे सैन्य अधिकारियों को करना है।’’ उन्होंने कहा कि ‘‘कई देशों’’ के कुछ जहाजों को गुजरने की अनुमति दी गई है, हालांकि उन्होंने इसके बारे में अधिक जानकारी नहीं दी। ईरान ने कहा है कि यह जलडमरूमध्य सभी देशों के लिए खुला है, लेकिन अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए नहीं।
अराघची ने यह भी कहा कि युद्ध समाप्त करने के लिए अमेरिका से बातचीत करने का उन्हें कोई कारण नजर नहीं आता, क्योंकि उनके अनुसार इजराइल और अमेरिका ने 28 फरवरी को समन्वित हमलों के साथ इस लड़ाई की शुरुआत की थी, जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका-ईरान के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता चल रही थी। अमेरिका में चीन के दूतावास के प्रवक्ता लियु पेंग्यू ने कहा कि ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर और निर्बाध बनाए रखना सभी पक्षों की जिम्मेदारी है और चीन तनाव कम करने के लिए संवाद बढ़ाएगा। इधर युद्ध का असर पूरे क्षेत्र में बढ़ता जा रहा है। ‘इंटरनेशनल कमिटी फॉर रेड क्रॉस’ के अनुसार, ईरान में 1,300 से अधिक लोग मारे गए हैं, जिनमें सैकड़ों महिलाएं और बच्चे शामिल हैं।
इजराइल में भी ईरानी मिसाइल हमलों में कम से कम 12 लोगों की मौत हुई है। वहीं, लेबनान में ईरान समर्थित हिजबुल्ला और इजराइल के बीच संघर्ष में 820 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और लाखों लोग विस्थापित हुए हैं। सोमवार तड़के ईरान ने फिर इजराइल की ओर मिसाइलें दागीं। इससे मध्य इजराइल और तेल अवीव क्षेत्र में कई जगह नुकसान हुआ। इजराइली सेना का कहना है कि ईरान क्लस्टर बमों का इस्तेमाल कर रहा है, जो हवाई रक्षा प्रणालियों को चकमा देकर कई स्थानों पर छोटे विस्फोटक गिराते हैं।