Chai Par Sameeksha: West Bengal में कानून का राज स्थापित करने में कैसे सफल हुए CM Suvendu Adhikari

By अंकित सिंह | May 25, 2026

प्रभासाक्षी न्यूज़ नेटवर्क के खास कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह पश्चिम बंगाल की राजनीति से जुड़े मुद्दों के अलावा उत्तर प्रदेश की राजनीति संबंधी मुद्दों पर चर्चा की गयी। प्रभासाक्षी संपादक नीरज कुमार दुबे ने सवालों के जवाब दिये। उन्होंने कहा कि शुभेन्दु अधिकारी के पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री का पद संभालते ही राज्य में तृणमूल कांग्रेस के गुंडाराज पर लगाम लगती दिखाई देने लगी है। इसका सबसे बड़ा फायदा झारखंड समेत सीमावर्ती राज्यों और पश्चिम बंगाल के बीच सफर करने वाले ट्रक चालकों को होता दिख रहा है। वर्षों से जिन मार्गों पर ‘भाइपो टैक्स’ और ‘डंडा टैक्स’ के नाम पर टीएमसी समर्थित गुंडों द्वारा अवैध वसूली की जाती थी, वहां अब माहौल तेजी से बदल रहा है। 

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उन्होंने कहा कि बहरहाल, राज्य में कानून व्यवस्था को मजबूत करने और गुंडाराज पर सख्ती से अंकुश लगाने की दिशा में मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी द्वारा उठाए गए कदमों की आम लोगों और परिवहन क्षेत्र से जुड़े संगठनों के बीच व्यापक सराहना हो रही है। ट्रक चालकों, व्यापारियों और स्थानीय निवासियों का कहना है कि लंबे समय बाद उन्हें सड़कों पर भयमुक्त माहौल महसूस हो रहा है। लोगों का मानना है कि यदि इसी तरह प्रशासनिक सख्ती जारी रही तो पश्चिम बंगाल में व्यापार, परिवहन और निवेश का माहौल और बेहतर होगा तथा आम नागरिकों का शासन व्यवस्था पर भरोसा भी मजबूत होगा।

उत्तर प्रदेश की राजनीति पर दुबे ने कहा कि आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को देखते हुए कांग्रेस ने एक बार फिर बसपा प्रमुख मायावती के करीब जाने की रणनीति बनानी शुरू कर दी है। चूंकि कांग्रेस इस समय समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में है, इसलिए उसके शीर्ष नेता खुलकर मायावती से संपर्क नहीं कर सकते थे। ऐसे में कांग्रेस से जुड़े कुछ दलित नेताओं के माध्यम से मायावती तक पहुंचने की कोशिश की गई, लेकिन मायावती ने इस प्रयास को पूरी तरह विफल कर दिया। लखनऊ स्थित अपने आवास पर पहुंचे कांग्रेस नेताओं को उन्होंने मिलने का समय तक नहीं दिया। इस घटनाक्रम ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नए संकेत दे दिए हैं।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस के लिए यह स्थिति इसलिए भी असहज हो गई क्योंकि उसी समय राहुल गांधी रायबरेली और अमेठी के दौरे पर थे तथा दलित समाज से जुड़े कार्यक्रमों में भाग ले रहे थे। हम आपको याद दिला दें कि राहुल गांधी पहले भी सार्वजनिक रूप से स्वीकार कर चुके हैं कि पिछले विधानसभा चुनावों के दौरान उन्होंने मायावती को गठबंधन का प्रस्ताव दिया था। राहुल गांधी ने यह भी कहा था कि उन्होंने मायावती को मुख्यमंत्री पद तक की पेशकश की थी, लेकिन बसपा प्रमुख ने प्रस्ताव ठुकरा दिया था। इसके बाद कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी के साथ हाथ मिलाया और लोकसभा चुनावों में इस गठबंधन को अपेक्षाकृत अच्छा परिणाम मिला। अब जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, कांग्रेस के भीतर फिर यह सोच मजबूत होती दिखाई दे रही है कि बसपा को साथ लाए बिना भाजपा के खिलाफ व्यापक सामाजिक समीकरण तैयार करना कठिन होगा।

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