समय के साथ तकनीक से चलने वाले प्लेटफार्मों ने निवेश को कैसे बनाया सुरक्षित?

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Feb 19, 2020

नई दिल्ली। हम इस समय इंटेलिजेंट मशीनों से घिरे हुए हैं; अमेज़ॅन हमें बता रहा है कि अगली किताब कौन-सी पढ़ना है, स्पॉटीफाई हमारे लिए प्लेलिस्ट क्यूरेट कर रहा है और नेटफ्लिक्स का अल्गोरिदम उस सामग्री को प्रभावित कर रहा है जो हम देखने वाले हैं, कुल मिलाकर टेक्नोलॉजी ने हम सभी के जीवन को सहज और सरल बना दिया है। हम बिजली से चलने वाली कारों का इंतजार कर रहे हैं, शायद तकनीक से चलने वाली कारों का, ऐसे में हर चीज की कल्पना को नियंत्रित करना मुश्किल हो रहा है कि तकनीक के साथ क्या संभव हो सकता है। और इसी वजह से कोई भी आश्चर्य कर सकता है कि जब टेक्नोलॉजी हमारे जीवन के हर क्षेत्र में प्रवेश कर रही है तो कैपिटल मार्केट्स कैसे पीछे रह सकते हैं?  

गेमचेंजरः फास्टिडियस डेटा एनालिसिस

जैसा कि उद्योग के विशेषज्ञ कहेंगे कि पूंजी बाजारों में सफलता का केवल एक ही मंत्र है और वह है आंकड़ों और उनसे मिलने वाले संकेतों की समझ। हालांकि, यह ही फीचर कुछ निवेशकों में चिंता का कारण बन सकता है क्योंकि किसी भी इंसान के लिए ऐतिहासिक और वर्तमान डेटा की इतनी बड़ी रेंज के साथ काम करना बेहद कठिन काम है। यह तथ्य पीड़ा को और बढ़ाता है कि वित्तीय बाजारों में डेटा अभूतपूर्व रूप से नाटकीय रूप से और अक्सर बदलता है। हालाँकि, अब उसी समस्या को तकनीक ने हल कर दिया है। 

निवेश के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करना, जिसे वॉल स्ट्रीट के सांख्यिकीविदों ने खोज निकाला है और उन्हें इससे विशाल डेटा सेट्स का कुशलतापूर्वक अध्ययन करने और उससे महत्वपूर्ण संकेत हासिल करने की अनुमति मिली जो अन्य सांख्यिकीय तरीकों में उपलब्ध नहीं थी। हमारे घर के करीब कुछ फुल-सर्विस ब्रोकरेज फर्म्स ने विभिन्न बाजारों में बेंचमार्क को लगातार बेहतर बनाने के लिए एआई के नेतृत्व वाले अल्गोरिदम का परीक्षण किया है। और इतना काफी नहीं! आइए जानते है कि उन्नत तकनीकों के इस्तेमाल से फाइनेंशियल प्लेटफार्म किस तरह सभी के लिए निवेश की दुनिया को सुरक्षित बना रहे हैं:

1.सीमलेस ऑन-बोर्डिंग - डिजिटलाइजेशन के साथ, किसी भी व्यक्ति को फिजिकल डीमैट अकाउंट खोलने की पूरी कठिन प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ता। भारत में अग्रणी फाइनेंशियल फर्मों ने पूरी प्रक्रिया को डिजिटलाइज कर दिया है, जिससे ब्रोकिंग का अनुभव उपयोगकर्ताओं के लिए सहज, आकर्षक और समझने में आसान हो गया है। इसके अलावा अब उपयोगकर्ताओं के पास मोबाइल एप्लिकेशन, ऑटोमेटेड केवाईसी ऑथेंटिकेशन सिस्टम, और एक पूरी तरह से डिजिटल क्लाइंट ऑन-बोर्ड प्रक्रिया जैसी नई सुविधाओं तक पहुंच है।

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2.जटिल ट्रेडिंग पैटर्न को सरल बनाना - एआई और बिग डेटा एनालिटिक्स के साथ ब्रोकिंग फर्म जटिल ट्रेडिंग पैटर्न को सरल बना रही हैं जो निवेशकों और व्यापारियों की निवेश यात्रा में बड़ी दिक्कतें बनी हुई थी। मशीन लर्निंग और बिग डेटा का लाभ उठाकर ये वित्तीय प्लेटपार्म ग्राहकों को पर्सनलाइज्ड सेवाएं प्रदान करते हैं, जो रियल टाइम में कम्प्लायंस और रिस्क का आकलन करते हैं।

3.चौबीसों घंटे सहायता - ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म सभी को सही जानकारी से सुसज्जित बनाने में मदद के लिए चैट-बॉट और मोबाइल एप्लिकेशन का इस्तेमाल कर रहे हैं। जैसे ‘ओके गूगल’ आपको एक नंबर डायल करने में या अपनी पसंद का गाना बजाने की सुविधा देता है, वैसे ही इन ऐप्स तक फाइनेंशियल डेटा, कन्वर्सेशन या नोट्स से जुड़ी कोई भी जानकारी हासिल करने के लिए पहुंचा जा सकता है। इसके अलावा, केवल एआई-बॉट के साथ एक सरल चैट के दौरान कोई भी व्यक्ति बिना किसी दिक्कत के ऐप से अपने वित्तीय लक्ष्यों और निवेश की यात्रा का प्रबंधन कर सकता है। 

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4.निवेश की सलाह लेना हुआ आसानः अब उपयोगकर्ताओं को ब्रोकर का पीछा करने की आवश्यकता नहीं है, जो बहुत ज्यादा नहीं तो भी बहुत ज्यादा खर्च मांगता था। अब तकनीकी प्रगति के कारण, विशेषज्ञ सेवाएं हर समय उपलब्ध हैं। बैकग्राउंड में जटिल एआई-एल्गोरिदम विशाल डेटा सेट्स का विश्लेषण करता रहता है और वित्तीय प्लेटफार्म बड़ी संख्या में दर्शकों को वास्तविक समय में निवेश से जुड़ा मार्गदर्शन और सलाह प्रदान करते हैं। पहले भी उल्लेखित फोरकॉस्ट इंजन बाजार के मानकों को पछाड़ने में ट्रैक रिकॉर्ड से अपनी उपयोगिता साबित कर चुका है। चौबीसों घंटे उपलब्ध कराई जा रही सहायता के साथ निवेशक निश्चित रूप से अपने पोर्टफोलियो को रिटेल इक्विटी निवेश में विविधता लाकर सुरक्षित महसूस करते हैं।

5.अधिक नवाचार के लिए क्षेत्र खोलना - वित्तीय प्लेटफार्मों ने ऐसे एआई-पावर्ड इंजनों के जरिये डेटा वैज्ञानिकों, बाजार विशेषज्ञों, विश्लेषकों और टेक्नोक्रेट्स की सामूहिक प्रगति को चैनलबद्ध किया है। निवेश की यात्रा को सुविधाजनक बनाने के लिए जब विविध पृष्ठभूमि वाले लोग साथ आए हैं तो उन्होंने मिलकर पूंजी बाजार को और अधिक प्रगति के लिए खोल दिया है। 

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पूंजी बाजार के क्षेत्र में तकनीकी प्रगति कोई नई बात नहीं है। 1980 के दशक के मध्य से दुनिया भर के शोधकर्ता और वैज्ञानिक आम जनता के लिए कस्टमाइज्ड, कम्प्यूटरीकृत स्टॉक पिकर लाने की कोशिश कर रहे हैं। बेशक, यह घटनाक्रम समाज के कुलीन लोगों तक सीमित रहे हैं जिन्हें इस तरह की तकनीक में निवेश करने का विशेषाधिकार मिला है। हालांकि, स्वदेशी ब्रोकरेज फर्मों के इस रैंक में शामिल होने से बेहतर-तकनीकी सुविधाओं तक पहुंच का लोकतांत्रिकरण हुआ है। प्रवेश में अवरोधों को हटाने और अधिक नवीनता के साथ इस सेगमेंट में आने के लिए रिटेल इक्विटी निवेश आज के उपयोगकर्ताओं को सुरक्षित भविष्य और जीवन जीने के बेहतर मानकों के लिए एक सुरक्षित शर्त है। 

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