By अभिनय आकाश | Oct 09, 2026
भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार, 9 अक्टूबर को जोरदार वापसी देखने को मिली। सेंसेक्स में 800 से अधिक अंकों का उछाल दर्ज किया गया, वहीं निफ्टी भी 22,500 के स्तर के करीब पहुंच गया। गुरुवार की भारी गिरावट के बाद निवेशकों ने निचले स्तरों पर बिकवाली का शिकार हुए शेयरों में खरीदारी की, जिससे बाजार में यह तेजी आई। खास बात यह रही कि अमेरिकी सरकार द्वारा प्रमुख टेक कंपनियों पर ग्रीन-कार्ड नियमों को लेकर लगाई गई पाबंदियों के बावजूद आईटी शेयरों में शानदार तेजी देखने को मिली। बाजार में यह रिकवरी काफी हैरान करने वाली रही, क्योंकि गुरुवार की तेज बिकवाली के बाद निवेशकों को आईटी सेक्टर पर और दबाव बढ़ने की आशंका थी। दरअसल, अमेरिकी सरकार ने टीसीएस (TCS), इंफोसिस (Infosys), विप्रो (Wipro) और एचसीएलटेक (HCLTech) जैसी दिग्गज कंपनियों को पर्म (PERM - Permanent Labour Certification) प्रोग्राम से निलंबित कर दिया है, जो एम्प्लॉयमेंट-बेस्ड ग्रीन कार्ड प्रक्रिया का एक अहम चरण माना जाता है। हालांकि, US परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन (PERM) प्रोग्राम के सीमित इस्तेमाल के बारे में कंपनियों की सफाई, TCS के हालिया तिमाही नतीजे और हालिया गिरावट के बाद सस्ती खरीदारी ने मार्केट के सेंटीमेंट को बेहतर बनाने में मदद की। सुबह 10:11 बजे, BSE सेंसेक्स 804.11 अंक या 1.12% की बढ़त के साथ 72,397.35 पर ट्रेड कर रहा था। इंडेक्स 71,776.67 पर खुला और शुरुआती कारोबार में 72,371.94 के हाई लेवल तक पहुंचा। निफ्टी 50 सुबह 10:13 बजे 22,314.95 पर खुलने के बाद 264.15 अंक या 1.19% बढ़कर 22,495.95 पर पहुंच गया। यह तेज़ी व्यापक थी, जिसमें सभी प्रमुख ब्रॉड-मार्केट इंडेक्स ऊपर कारोबार कर रहे थे। निफ्टी 100 में 1.16%, निफ्टी 200 में 1.21% और निफ्टी 500 में 1.12% की बढ़त हुई। निफ्टी मिडकैप 50 और निफ्टी मिडकैप 100 क्रमशः 1.35% और 1.39% चढ़े, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 0.64% की बढ़त हुई।
शुक्रवार को आई तेज़ी के पीछे एक और अहम वजह 'बार्गेन बाइंग' है। गुरुवार को सेंसेक्स 1,045.46 अंक या 1.44% गिरकर 71,593.24 पर बंद हुआ। निफ्टी 371.25 अंक या 1.64% गिरकर 22,231.80 पर बंद हुआ। इस भारी गिरावट से कई शेयर बिकवाली से पहले के मुकाबले सस्ते हो गए, जिससे उन निवेशकों के लिए मौके बने जो ऐसी कंपनियों के शेयर खरीदना चाहते हैं जिनमें उन्हें लंबे समय में ग्रोथ की संभावना दिखती है। इसे आम तौर पर 'बार्गेन बाइंग' या 'बाइंग द डिप' कहा जाता है। जब कम समय में बाज़ार में तेज़ी से गिरावट आती है, तो कुछ निवेशक कम कीमत पर शेयर खरीदने के लिए आगे आते हैं। उन्हें उम्मीद होती है कि भले ही निकट भविष्य में बाज़ार का मूड कमज़ोर रहे, लेकिन शेयरों का वैल्यूएशन ज़्यादा आकर्षक हो सकता है। इस खरीदारी से बाज़ार में वापसी (रिबाउंड) हो सकती है क्योंकि नई मांग से शेयरों की कीमतों को सहारा मिलता है। इससे 'शॉर्ट कवरिंग' भी हो सकती है, जिसमें जिन ट्रेडर्स ने कीमतों में गिरावट पर दांव लगाया था, वे अपनी पोजीशन बंद करने के लिए शेयर खरीदते हैं, जिससे कीमतों में और तेज़ी आती है।
गुरुवार को घोषित TCS के सितंबर तिमाही के नतीजों ने भी IT शेयरों के प्रति सकारात्मक माहौल बनाने में मदद की है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही के लिए 13,884 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफ़िट दर्ज किया, जो एक साल पहले के 12,075 करोड़ रुपये से लगभग 15% ज़्यादा है। रेवेन्यू सालाना आधार पर 11.2% बढ़कर 73,188 करोड़ रुपये हो गया। इसका सालाना आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) रेवेन्यू तिमाही-दर-तिमाही आधार पर लगभग 20% बढ़कर 3.1 बिलियन डॉलर हो गया, जो जुलाई-सितंबर तिमाही में 2.6 बिलियन डॉलर था। AI रेवेन्यू अब कंपनी के कुल रेवेन्यू का 10% से ज़्यादा हो गया है। TCS ने तिमाही के लिए 9.6 बिलियन डॉलर की कुल कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू भी बताई, जिससे निवेशकों को बिज़नेस की रफ़्तार का एक और संकेत मिला। AI परफॉर्मेंस IT कंपनियों में निवेश के नज़रिए से एक अहम हिस्सा बन गई है, क्योंकि क्लाइंट तेज़ी से ऑटोमेशन और AI-आधारित सेवाओं को अपना रहे हैं।
शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई, जिससे हालिया उछाल के बाद बाजारों को कुछ राहत मिली।सत्र के शुरुआती बाजार आंकड़ों के अनुसार, ब्रेंट क्रूड 1.31% गिरकर 102.91 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 1.14% फिसलकर 90.45 डॉलर पर रहा।हालांकि, ब्रेंट क्रूड का 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बने रहना भारत के आयात बिल, महंगाई और कॉरपोरेट लागत को लेकर चिंताओं को बनाए रखे हुए है। तेल की कीमतों में लगातार तेजी भारतीय रुपये पर दबाव डाल सकती है और ब्याज दरों के परिदृश्य को भी जटिल बना सकती है। इसके अलावा, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली भी एक बड़ी चिंता बनी हुई है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड (Geojit Investments Limited) के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ. वी. के. विजयकुमार के अनुसार, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में मजबूती भारतीय बाजार पर लगातार दबाव बनाए हुए हैं।