By नीरज कुमार दुबे | Jan 19, 2024
चीन और मालदीव की बढ़ती निकटता का और प्रत्यक्ष सबूत देते हुए मालदीव में चीनी राजदूत वांग लिक्सिन ने जो कुछ कहा है उस पर सबको ध्यान देना चाहिए। इसके अलावा, चीनी राजदूत जिस तरह प्रभावी भूमिका में काम करती दिख रही हैं उससे साफ प्रदर्शित हो रहा है कि माले की सरकार अब बीजिंग से ही संचालित हो रही है। इस सबके चलते मालदीव में इस समय की जो राजनीतिक स्थिति है वह दर्शा रही है कि राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू तेजी से जनाधार खोते जा रहे हैं, मगर इस हकीकत से वाकिफ होने के बावजूद वह चीन की ओर झुके चले जा रहे हैं। इस समय देश के विकास या भविष्य की योजनाओं के बारे में मालदीव के मंत्रियों से ज्यादा चीन की राजदूत के बयान आ रहे हैं जो दर्शा रहे हैं कि बीजिंग माले पर कितना प्रभाव बढ़ा चुका है। इस सबके बीच वह कारण भी सामने आ गया है जिसके चलते राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने भारत को 15 मार्च तक अपने सैनिकों को वापस बुलाने के लिए कहा है।
इसके अलावा, जहां तक मालदीव की ओर से चीन से ज्यादा पर्यटक भेजने का आग्रह किये की बात है तो इस दिशा में भी चीन ने मदद शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि चीन से इस साल की पहली चार्टर उड़ान 14 फरवरी को मालदीव पहुंचने की उम्मीद है। बताया जा रहा है कि मांग के आधार पर चीनी एयरलाइन सीधी वाणिज्यिक उड़ानें शुरू करेगी जिससे टिकट की कीमतें कम हो जाएंगी। माले में चीनी राजदूत का मानना है कि इस कदम से अधिक चीनी पर्यटक मालदीव जाने के लिए प्रोत्साहित होंगे। बताया जा रहा है कि चीन और मालदीव के बीच इन उड़ानों के विवरण को अंतिम रूप देने पर विचार-विमर्श के लिए आने वाले महीनों में चीन के विशेष प्रतिनिधि मालदीव का दौरा करेंगे।
इसके अलावा, चीनी राजदूत ने इस बात की पुष्टि भी की कि कई चीनी कंपनियों ने रासमाले (फुशिदिग्गारु फाल्हू) आवास परियोजना से जुड़ने में रुचि दिखाई है। उन्होंने कहा कि जल्द ही चीनी कंपनियों के प्रतिनिधि माले पहुँचेंगे। उन्होंने कहा कि इस परियोजना को सर्वोत्तम तरीके से कैसे क्रियान्वित किया जा सकता है, इस पर हमारी निगाह बनी हुई है और जल्द ही इस संदर्भ में विचार-विमर्श करने के लिए एक प्रतिनिधिमंडल के मालदीव पहुंचने की उम्मीद है।
इसके अलावा, चीनी राजदूत ने कहा कि मालदीव का विदेश मंत्रालय दोनों देशों के बीच हुए समझौतों के तहत आने वाली सभी योजनाओं पर तेजी से काम कर रहा है। सरकारी ऋणों के पुनर्भुगतान में उदारता की पेशकश करने के चीन के फैसले के बारे में राजदूत ने कहा कि हम चाहते हैं कि मालदीव को कर्ज की चिंता नहीं रहे और वह आसानी से भुगतान कर सके इसके लिए चीजें तय की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि हम मालदीव सरकार की स्थिति को समझते हैं इसलिए उस पर पैसा वापस करने के लिए कोई दबाव नहीं डालेंगे।
दूसरी ओर, उस कारण की बात करें जिसके चलते मुइज्जू ने भारतीय सैनिकों को वापस जाने के लिए 15 मार्च की तारीख तय की है तो आपको बता दें कि दरअसल उन्होंने ऐसा इसलिए किया है क्योंकि 17 मार्च को मालदीव की मजलिस यानि संसद के चुनाव होने हैं। हम आपको याद दिला दें कि भारत से पंगा लेते ही मुइज्जू की पार्टी पीपल्स नेशनल कांग्रेस (पीएनसी) माले के मेयर का चुनाव हार गयी थी। लेकिन इस हार के बावजूद मुइज्जू ने भारत विरोधी तेवर कम नहीं किये हैं। अब 17 मार्च को मजलिस के चुनाव होने हैं। मुइज्जू का मानना है कि 15 मार्च तक भारतीय सैनिक यदि माले छोड़कर चले जाएं तो वह इसे अपनी जीत और अपने एक बड़े चुनावी वादे के पूरा होने के तौर पर प्रचारित कर अपनी पार्टी को मजलिस चुनाव में जितवा सकते हैं। मुइज्जू जानते हैं कि मालदीव पर पकड़ बनाये रखने के लिए मजलिस चुनाव जीतना जरूरी है। मुइज्जू जानते हैं कि भारत समर्थक मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी यदि मजलिस चुनाव जीत गयी तो उनके लिए काम कर पाना बहुत मुश्किल हो जायेगा। इसलिए वह चीन की मदद ले रहे हैं और चीन भी बढ़-चढ़कर मदद कर रहा है। इसके लिए चीनी राजदूत ने मुइज्जू की पार्टी की प्रवक्ता की तरह मालदीव और चीन संबंधों से जनता को होने वाले लाभ के बारे में बताना शुरू कर दिया है।
बहरहाल, देखना होगा कि मालदीव की जनता मजलिस चुनावों में क्या निर्णय सुनाती है। जहां तक मुइज्जू और चीन की ओर से खेले जा रहे खेल की बात है तो इन दोनों को ही समझना होगा कि उनकी हर कुटिल चाल को विफल करने के लिए भारत पूरी तरह सतर्क है। बताया जा रहा है कि आने वाले दिनों में जो घटनाक्रम होने वाले हैं वह पूरी दुनिया को हैरानी में डाल सकते हैं।
-नीरज कुमार दुबे