By अंकित सिंह | Aug 11, 2025
प्रभासाक्षी के साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह हमने राहुल गांधी द्वारा चुनाव आयोग पर लगाया जा रहे आरोपों को लेकर चर्चा की। साथ ही साथ हमने मतदाता सूची पुनरीक्षण के मुद्दे पर भी प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे से सवाल पूछे। इस दौरान नीरज कुमार दुबे ने साफ तौर पर कहा कि चुनाव आयोग और संवैधानिक संस्थाओं को खटखड़े में खड़ा करना अब कांग्रेस की आदत सी बन गई है। नीरज दुबे ने कहा कि एसआईआर को लेकर जो राजनीति चल रही है वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। देश का सर्वोच्च न्यायालय इस मुद्दे को देख रहा है। ऐसे में विपक्ष को थोड़ा धैर्य दिखाने की आवश्यकता है।
संपादक नीरज दुबे ने कहा कि जब से राहुल गांधी विपक्ष के नेता बने हैं, तब से विपक्ष नाम की चीज नहीं रह गई है। वह मीडिया की सुर्खियों में ज्यादा रहना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि देश का बहुत बड़ा नुकसान हो रहा है। संसद नहीं चल रहा है। लोकसभा और राज्यसभा में एक महत्वपूर्ण विधेयक पारित हुआ और उसे पर कोई चर्चा नहीं हुई और 1 मिनट में यह पास हो गया। जिससे साफ तौर पर जाहिर हो रहा है कि यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है। विधेयक बिना किसी चर्चा के पास हो रहा है। अगर सदन सामान्य रूप से चले तो विपक्ष के तमाम सवालों का जवाब सरकार को देना पड़ेगा।
संपादक नीरज दुबे ने कहा कि विपक्ष को यह समझने की जरूरत है कि जो देश के हमारे टैक्स पेयर हैं, उनके पैसे को हम बर्बाद इस तरीके से क्यों कर रहे हैं। हमें विपक्ष की भूमिका के तौर पर राहुल गांधी जो कुछ भी कर रहे हैं उसे पर सोचने की जरूरत है। राहुल गांधी के तेवर अच्छे हैं लेकिन संसद चलना चाहिए ऐसा भी उन्हें कोशिश करनी होगी। नीरज दुबे ने यह भी सवाल किया कि चुनाव आयोग जो काम कर रहा है, उस पर आप चर्चा करने के लिए क्यों अड़े हुए हैं। पहले चुनाव आयोग को अपना काम कर लेने दीजिए। उसके बाद अगर आपको गड़बड़ी लगे तो आप इस पर हो-हल्ला कर सकते हैं।