ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी कितनी सुरक्षित है? बिटकॉइन के लिए यह तकनीक कितनी महत्वपूर्ण है?

By कमलेश पांडेय | Aug 09, 2021

ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी कितना सुरक्षित है? बिटकॉइन के लिए ब्लॉकचेन कितना महत्वपूर्ण है? इंटरनेट टेक्नोलॉजी और ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी में क्या अंतर या साम्यता हैं, ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी की जरूरत हमें क्यों है? इसके ऍप्लिकेशन्स में किस क्षेत्र में भविष्य है? रियल लाइफ ऍप्लिकेशन्स में यह कितना उपयोगी है।

ऐसे तो इंटरनेट में कोई भी चीज़ सिक्योर नहीं है। लेकिन, यदि हम ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी की बात करें, तो दावे के साथ कह सकते हैं कि अन्य टेक्नोलॉजी की तुलना में बहुत हद तक ब्लॉकचेन तकनीक “अनहैकेबल” है। ऐसा इसलिए कि ब्लॉकचेन में कोई भी ट्रांसक्शन करने के लिए पूरे नेटवर्क के सभी नोड्स को एग्री होना पड़ेगा, तभी जाकर वो ट्रांसक्शन वैलिड होगी।

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कहने का तातपर्य यह कि यहाँ पर कोई सिंगल एंटिटी ये नहीं कह सकती कि ट्रांसक्शन हुआ है या नहीं। वास्तव में इसे हैक करने के लिए आपको बैंक के जैसे केवल एक सिस्टम को हैक करने से नहीं होगा, बल्कि पूरे नेटवर्क में स्थित सभी सिस्टम्स को हैक करना होगा। इसलिए इस टेक्नोलॉजी में हैकिंग इतनी आसान चीज़ नहीं है। प्राय: सभी ब्लॉकचेन्स की कंप्यूटिंग रिसोर्सेज बहुत ही ट्रेमेंडस (ज्यादा) है, क्योंकि यहाँ एक कंप्यूटर नहीं है बल्कि नेटवर्क में बहुत सारे कंप्यूटर्स जुड़े हुए हैं।

# बिटकॉइन जैसे ब्लॉकचेन के लिए है, वैसे ही इंटरनेट के लिए था ईमेल

सन 1990 में, जब इंटरनेट टेक्नोलॉजी यानी टीसीपी, आईपी और एचटीपीपी, अपने नेटिव स्टेजेज में था, तब ईमेल एक बहुत बड़ा और पहला मेजर ऍप्लिकेशन था। लेकिन बाद में नए ऍप्लिकेशन्स जैसे कि वेब ब्राउजर्स आया। वेबसाइट्स तब बहुत पॉपुलर बन गए। लोग तब चैट सॉफ्टवेयर जैसे कि स्कीपे का बहुत इस्तेमाल करते थे। यदि हम अभी के बारे में विचार करें, तब आप अपने मोबाइल में ही बहुत सारे अलग-अलग ऍप्लिकेशन्स को चलता हुआ देख सकते हैं जो कि इंटरनेट का इस्तमाल करते हैं।

वैसे ही जब ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी पहली बार नई नवेली रूप में आई, तब बिटकॉइन भी ईमेल की तरह सबसे पहला बड़ा मेजर ऍप्लिकेशन रहा, जो कि इस टेक्नोलॉजी में खूब इस्तेमाल किया गया। तब दूसरे क्रिप्टोकरेंसीज ने इस ट्रेंड को बाद में फॉलो किया। अब ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी को बहुत सारे ऍप्लिकेशन्स जैसे कि सिक्योरिटी, ऑनलाइन वोटिंग इत्यादि में इस्तेमाल में लाया जाता है।

# इंटरनेट टेक्नोलॉजी बनाम ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी

अगर हम दोनों टेक्नोलॉजी की बात करें तो यह कह सकते हैं कि जैसे इंटरनेट कंप्यूटर्स को अलाऊ करती है इन्फॉर्मेशन एक्सचेंज करने के लिए, वैसे ही ब्लॉकचेन कंप्यूटर्स को अलाऊ करता है इन्फॉर्मेशन को रिकॉर्ड करने के लिए। इस प्रकार दोनों बहुत सारे कंप्यूटर्स (नोड्स) का इस्तेमाल करते हैं।

# चलिए कुछ नया जानते हैं इंटरनेट और ब्लॉकचेन तकनीकी के विषय में 

जहां डिजिटल रिवोल्यूशन के पहले जेनरेशन ने हमारे लिए इंटरनेट ऑफ इन्फॉर्मेशन लाया। वहीं, सेकंड जेनरेशन- जो कि पावर्ड बाय ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी है, उसने हमारे सामने इंटरनेट ऑफ वैल्यू पेश किया। वास्तव में यह एक ऐसा  नया प्लेटफॉर्म है जो कि बिज़नेस की दुनिया को रिशेप कर देगा तथा पुराने आर्डर ऑफ ह्यूमन अफेयर्स को और भी बेहतर बना देगा। दरअसल, ब्लॉकचेन इतना वास्ट, ग्लोबल डिस्ट्रिब्यूटेड लेजर और डेटाबेस है जो कि मिलियन्स ऑफ डिवाइसेस में कंटीन्यूअसली चल रहा है और ये किसी के लिए भी ओपन है। यहाँ न केवल इन्फॉर्मेशन बल्कि कोई भी चीज़ जिसकी कुछ वैल्यू है जैसे कि मनी, टाइटल्स, डीड्स, आइडेन्टिटीज, यहाँ तक कि वोट्स भी- इन्हें मूव्ड, स्टोर्ड और मैनेज्ड, सिक्योरली और प्राइवेटली किया जा सकता है।

यहाँ पर ट्रस्ट को एस्टेब्लिश करने के लिए मास कोलैबोरेशन चाहिए और कुछ क्लेवर कोड इसे इम्पलीमेंट करने के लिए, वहीं पुराने तौर-तरीकों में पॉवरफुल इंटरमीडिएरीज जैसे कि गवर्नमेंट्स और बैंक्स की जरुरत पड़ती है। इसलिए हम कह सकते हैं कि ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी हमसे ही बनती है, हमारे लिए ही काम करती है और इसे कंट्रोल हमलोग ही करते हैं, जो कि इसे बहुत ही सिक्योर और विश्वसनीय बनाता है।

# ये है ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी के पीछे की टेक्नोलॉजी 

ब्लॉकचेन के पीछे जो मुख्य टेक्नोलॉजी हैं वो प्रमुख रूप से निचे दिए गए तीन टेक्नोलॉजी हैं:- 

पहला, प्राइवेट की क्रिप्टोग्राफ़ी। 

दूसरा, पी2पी नेटवर्क (पीर-2-पीर)।

तीसरा, प्रोग्राम (द ब्लॉकचेन'स प्रोटोकॉल)।

# हमें क्यों है ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी की जरुरत?

ब्लॉकचेन एक ऐसा मैकेनिज्म है जो कि हम सभी लोगों को उनके हाईएस्ट टेक्नोलॉजी ऑफ एकाउंटेबिलिटी तक पहुँचने में मदद करता है। अब और कोई भी मिस्ड ट्रांसक्शन्स नहीं होगा। यह इंसानी और मशीनी गलतियाँ को कम कर देगा। ये सभी ट्रांसक्शन्स के पीछे कोई भी तीसरी पार्टी या गवर्नमेंट का कॉन्सेंट जरुरी नहीं, बल्कि सभी कनेक्टेड नोड्स या ट्रस्ट या सिक्योर वैलीडेशन ही माईने रखता है।

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सबसे क्रिटिकल एरिया जहाँ ब्लॉकचेन हमें मदद करता है और ये गारण्टी प्रदान करता है कि वैलिडिटी ऑफ अ ट्रांसक्शन उन्हें रिकॉर्ड करके, ये केवल एक मैन रजिस्टर में नहीं किया जा रहा है, बल्कि नेटवर्क में कनेक्ट हुए सारे डिस्ट्रिब्यूटेड सिस्टम के रेजिस्टर्स, इन सभी रेजिस्टर्स में सिक्योर वेलिडेशन होने के बाद ही ट्रांसक्शन को वैलिड  कहा जायेगा।

# ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी के ऍप्लिकेशन्स में फॉलोइंग एरियाज में है भविष्य

बता दें कि ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी के ऍप्लिकेशन्स में विभिन्न प्रकार के 6 फॉलोइंग एरियाज में भविष्य है।

पहला, स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट्स- कोई भी इंडस्ट्री हो अगर वो हैविली कॉन्ट्रैक्ट्स पर निर्भर करती हो, जैसे कि इन्शुरन्स, फाइनेंसियल इंस्टीट्यूशन्स, रियल एस्टेट, कंस्ट्रक्शन, एंटरटेनमेंट और लॉ, तो वो सारे इंडस्ट्रीज इस टेक्नोलॉजी से बेनेफिटटेड होंगे। क्योंंकि इस टेक्नोलॉजी की मदद से, बिना किसी डिस्प्यूट के आपके सारे कॉन्ट्रैक्ट्स को अपडेट, मैनेज, ट्रैक और सिक्योर किया जा सकता है। स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट्स वो है जो कि एम्बेडेड होते हैं ईफ़/देन स्टेटमेंट्स से और जिन्हें एक्जीक्यूट करने के लिए इंटरमेडियरी पार्टी का इन्वॉल्वमेंट की जरुरत नहीं है।

दूसरा, सप्लाई चैन मैनेजमेंट- जब भी कोई वैल्यू बदलते हैं या कोई एसेट का स्टेटस बदलता है तब ये सारे प्रोसेस को मैनेज करने के लिए ब्लॉकचेन एक बहुत ही बढ़िया ऑप्शन है।

तीसरा, एसेट प्रोटेक्शन- चाहे आप एक संगीतकार हों, जो कि अपने गाने की रॉयलटीज ठीक तरह से पाना चाहता है या आप कोई प्रॉपर्टी ओनर हो, अगर आप अपने एसेट की प्रोटेक्शन चाहते हैं तब ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी आपकी बहुत मदद कर सकता है, आपकी रियल-टाइम ओनरशिप की एक इनडिस्प्यूटेबल रिकॉर्ड बनाकर।

चतुर्थ, पर्सनल आइडेंटिफिकेशन- गवर्नमेंट्स अक्सर बहुत सारे एमाउंट्स के डेटा को मैनेज करती है, जैसे कि पर्सनल डेटा बर्थ से डेथ रिकार्ड्स तक, मैरिज सर्टिफिकेट्स, पासपोर्ट्स और सेन्सस डेटा इत्यादि। ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी इन सारे डेटा को स्ट्रीमलाइनड सॉल्यूशन के हिसाब से आसानी से मैनेज कर सकता है और उन्हें सिक्योरली स्टोर कर सकता है।

पंचम, पेमेंट प्रोसेसिंग- ब्लॉकचेन की ये खासियत है कि वो किसी भी बड़ी कंपनी की पेमेंट प्रोसेसिंग को आसानी से संभाल सकता है। ये इंटरमेडियरीज़ की जरुरत को पूरी तरह से ख़त्म कर सकता है जिन्हें कि हम पेमेंट प्रोसेसिंग में अक्सर देखते हैं।

षष्टम, क्राउडफंडिंग- ट्रेडिशनल क्राउडफंडिंग की तुलना में एक ब्लॉकचेन पावरड क्राउड फंडिंग कैंपेन में ज्यादा सिक्योर इन्वेस्टमेंट होती है। नए प्रोजेक्ट के लिए एक इंटरेस्टेड कम्युनिटी से। लेकिन ऐसे इंस्टेन्स में, फंडिंग मुख्य रूप से बिटकॉइन या दूसरे क्रिप्टो करेंसीज के आकार में होगी।

# रियल लाइफ ऍप्लिकेशन्स ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी का

अब आपलोग इस टेक्नोलॉजी के बेसिक कंसेप्ट को समझ गए होंगे तो चलिए अब जानते हैं कि आखिर इन्हें कहाँ रियल लाइफ ऍप्लिकेशन्स में इस्तमाल किया जाता है-

पहला, फॉलो माई वोट:- ये हमारे वोट करने के तरीकों को बदलना चाहता है और दुनिया में सबसे पहला ओपन सॉर्स ऑनलाइन वोटिंग सॉल्यूशन बनना चाहता है। 

दूसरा, आर्केड सिटी:- ये एक ट्रू डिसेंट्रलाइज़्ड राइडशेयरिंग सर्विस है जो कि ‘उबेर किलर’ के नाम से भी जाना जाता है। 

तीसरा, शोकार्ड:- ये आपके आइडेंटिटी को स्टोर करता है बिटकोइन्स ब्लॉकचेन में ताकि आपकी इजी वेरिफिकेशन हो सके। 

चतुर्थ, सिम्बाईओंट:- ये ब्लॉकचेन में बेहतर स्मार्ट सिक्योरिटीज प्रदान करता है। 

पंचम, बिटनेशन:- ये एक “गवर्नेंस 2.0” इनिशिएटिव जो कि एक कोलाबोरेटिव प्लेटफॉर्म के साथ काम करके डोल्ट योरसेल्फ गवर्नेन्स की स्थापना करना चाहता है। 

षष्टम, चैनलिंक:- ये ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर वेरीफाई और वैलिडेट करता है ऑथेंटिसिटी और रियल-वर्ल्ड आइटम्स के टाइटल को।

- कमलेश पांडेय

वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार

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