Monsoon में Car Damage पर Insurance Claim कैसे लें? ये नियम जानना है जरूरी

By अंकित सिंह | Sep 01, 2026

पूरे भारत में गाड़ी मालिकों के लिए भारी बारिश और सड़कों पर जमा पानी हर साल एक बड़ी मुसीबत बन जाता है। हर मॉनसून में, हज़ारों कारें और दो-पहिया वाहन पानी से भरी सड़कों पर फँस जाते हैं, पेड़ों के गिरने से उन्हें नुकसान पहुँचता है या वे बढ़ते पानी में डूब जाते हैं। इसके बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठता है: नुकसान का हर्जाना कौन भरेगा? इसका जवाब मौसम पर कम और आपकी गाड़ी के ग्लव बॉक्स में रखी इंश्योरेंस पॉलिसी पर ज़्यादा निर्भर करता है।

गाड़ियों के लिए जल-जमाव (waterlogging) सबसे बड़े खतरों में से एक है। बजाज जनरल इंश्योरेंस के कमर्शियल मामलों के चीफ टेक्निकल ऑफिसर, अमरनाथ सक्सेना ने कहा, "हालांकि बाढ़ से होने वाले बाहरी नुकसान को 'ओन डैमेज' मोटर पॉलिसी में कवर किया जाता है, लेकिन पॉलिसीधारकों को 'इंजन प्रोटेक्टर' जैसे ऐड-ऑन कवर पर भी विचार करना चाहिए। यह कवर पानी घुसने से इंजन के अंदर होने वाले नुकसान की भरपाई करता है।"

सक्सेना ने आगे कहा, "अगर गाड़ी बह जाती है या उसकी मरम्मत का खर्च उसकी 'इंस्योर्ड डिक्लेयर्ड वैल्यू' (IDV) के लगभग 75 से 80 प्रतिशत से ज़्यादा हो जाता है, तो पॉलिसी की शर्तों के अनुसार क्लेम का निपटारा 'टोटल लॉस' या 'कंस्ट्रक्टिव टोटल लॉस' के तौर पर किया जा सकता है।" पॉलिसीधारकों को पानी में डूबी गाड़ी को दोबारा स्टार्ट करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इससे गाड़ी के इंजन को और नुकसान हो सकता है। इंश्योरेंस कंपनी को तुरंत सूचना देने और गाड़ी को अधिकृत गैराज में ले जाने से क्लेम की प्रक्रिया तेज़ी से पूरी हो सकती है।

ऐसी गलतियाँ जिनसे आपका इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट हो सकता है

अजीब बात है कि सबसे ज़्यादा नुकसान अक्सर बाढ़ के बाद ही होता है। एक्सपर्ट्स सभी एकमत होकर सलाह देते हैं कि गहरे पानी में बंद हो चुकी गाड़ी को दोबारा स्टार्ट करने की कोशिश न करें। भारद्वाज कहते हैं कि अगर इंजन में पानी चला गया है और मालिक उसे दोबारा स्टार्ट करने की कोशिश करता है, तो इंजन को होने वाले नुकसान को आम तौर पर स्टैंडर्ड कॉम्प्रिहेन्सिव पॉलिसी के तहत 'कॉन्सिक्वेंशियल लॉस' (नतीजतन होने वाला नुकसान) माना जाता है। जब तक गाड़ी में 'इंजन प्रोटेक्शन ऐड-ऑन' न हो, तब तक इंश्योरेंस कंपनी क्लेम के उस हिस्से को रिजेक्ट कर सकती है।

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डहुजा भी मालिकों को सलाह देते हैं कि वे पानी में डूबी या बुरी तरह पानी से घिरी गाड़ियों को स्टार्ट न करें, क्योंकि इससे इंजन का नुकसान और बढ़ सकता है, जो शायद बेस पॉलिसी के तहत कवर न हो। जोशी बताते हैं कि पानी से खराब हुए इंजन को बार-बार क्रैंक करने से 'हाइड्रोस्टैटिक लॉक' हो सकता है, जिससे रिपेयर का खर्च काफी बढ़ जाता है। ऐसे नुकसान तभी कवर होते हैं जब मालिक ने 'इंजन प्रोटेक्शन ऐड-ऑन' लिया हो। 

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