By रेनू तिवारी | Feb 28, 2026
पहाड़ों की रानी शिमला का नगर निगम शुक्रवार को राजनीतिक अखाड़े में तब्दील हो गया। नगर निगम की मासिक आम बैठक (MC House Meet) के दौरान सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी झड़प हुई, जिसके बाद महापौर (Mayor) सुरेंद्र चौहान ने सदन की कार्यवाही में बाधा डालने के आरोप में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के 9 पार्षदों को निलंबित कर दिया। निलंबन की इस कार्रवाई के बाद सदन में घंटों तक नारेबाजी और गहमागहमी का माहौल बना रहा।
इस पर कांग्रेस पार्षदों ने भी जवाबी नारेबाजी की और भाजपा पर जानबूझकर बैठक बाधित करने तथा जनविरोधी रवैया अपनाने का आरोप लगाया। बाद में भाजपा पार्षदों ने मीडिया से कहा कि महापौर का कार्यकाल बढ़ाने वाला अध्यादेश छह जनवरी 2026 को समाप्त हो गया है और राज्य सरकार की ओर से इस संबंध में कोई नयी अधिसूचना जारी नहीं की गई है। उन्होंने कहा, “हमारा महापौर से कोई व्यक्तिगत विरोध नहीं है लेकिन आरक्षण रोस्टर के अनुसार अब एक महिला को महापौर चुना जाना चाहिए।” पार्षदों ने आरोप लगाया कि इस मुद्दे पर कांग्रेस का “महिला-विरोधी रुख” उजागर हो गया है।