पति पत्नी और करवा चौथ (व्यंग्य)

By संतोष उत्सुक | Oct 28, 2026

पति की उम्र बढ़ाने के लिए पत्नी को पटाने, करवा चौथ का व्रत ज़िंदगी में फिर आ गया है। एक राष्ट्रीय अखबार ने एक बढ़िया खबर छापी कि  चांद देखे बगैर भी खोला जा सकता है व्रत। एक पीएचडी ज्योतिषाचार्य ने समझाया कि अगर मौसम खराब हो, बादल छाए रहने के कारण चांद दिखाई न दे तो भी चिंता करने की ज़रूरत नहीं। कहीं से भी चांद देखने की सूचना मिलते ही व्रत खोला जा सकता है। वीडियो काल पर चांद देखना वैध माना गया है।  

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इंसान ने अपनी बनाई कृत्रिम बुद्धि के कारण कुदरत द्वारा दी नैसर्गिक बुद्धि को नकारना शुरू कर दिया है लेकिन दूसरी तरफ पूरे होश और जोश के साथ परम्परा और संस्कृति की लकीरों को पीटा जा रहा है। काफी कोशिश करने पर भी परम्पराएं छूट नहीं पा रही। परिस्थितियों में निरंतर बदलाव, ज़िंदगी में उगती जा रही वक़्त की कमी के कारण कुछ परम्पराएं बदल भी  रही हैं। करवा चौथ की रात को खाने का तरीका बदला है। रिसोर्ट और होटल में जाकर व्रत खोल रहे हैं जोकि पौराणिक पारम्परिक संस्कृति के अनुसार गलत माना जाना चाहिए। पूजा समय पर नहीं करते लेकिन पूरा दिन त्यौहार  मान लिया जाता है। पतियों ने भी व्रत रखना शुरू कर दिया गया है लेकिन मनोरंजक दिखावा और रिश्तों में छलावा बढ़ रहा है। इसलिए लगता नहीं अब इस व्रत से पति की जान बच सकती है। क्या वैवाहिक संस्था की व्यवस्था परिवर्तन चाहती है ।

पति की लम्बी आयु के लिए रखा जाने वाला व्रत बदलाव के कई रास्ते तय कर चुका है। करवा खरीदने बारे सोशल मीडिया पर अफवाहें उग रही हैं जिससे महिलाएं धोखा खा रही हैं। उधर धार्मिक नियमों के रखवालों को गुस्सा आ रहा है। उनके अनुसार धर्म पुस्तकों की पंडिताई गौण हो गई है क्यूंकि लोगों फेस टू फेस न होकर फेस बुक पर विशवास कर रहे हैं। धर्म और धर्म शास्त्र के प्रति निष्ठा कम करने में एंटी सोशल पंडिताई का सर्वश्रेष्ठ अविस्मरणीय योगदान है। हालांकि वे वहम न करने को कह रहे हैं।

विदेश में करवा चौथ का व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए दिलचस्प दुविधा है। वहां का समय भारतीय समय के असमानांतर है। उनका व्रत शुरू करने का समय कुछ और होता है जो भारतीय समय से बिलकुल अलग होता है। क्या उन्हें व्रत का फल मिलता होगा। वैसे व्रत रखना स्वास्थ्य के लिए हमेशा लाभदायक रहा है। उसमें बाज़ार के दखल की ज़रूरत नहीं होती लेकिन बाज़ार शातिर होता है किसी भी अवसर उत्सव त्यौहार यहां तक कि दुःख के अवसरों को भी नहीं बख्शता। बदलाव लाना मुश्किल काम है।

- संतोष उत्सुक

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