By अंकित सिंह | Aug 20, 2025
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप झूठे थे, लेकिन उन्होंने जेल जाने से पहले अपने पद से इस्तीफा देकर संवैधानिक सिद्धांतों का पालन किया। उनकी यह टिप्पणी संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में उनकी गिरफ्तारी को लेकर कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में आई। यह आदान-प्रदान अमित शाह द्वारा निचले सदन में तीन विधेयक पेश किए जाने के तुरंत बाद हुआ, जिसमें संविधान (एक सौ तीसवां संशोधन) विधेयक, 2025 भी शामिल था।
अमित शाह ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अब मेरी बात सुनिए, मैं सारा रिकॉर्ड साफ़ करना चाहता हूँ। मुझ पर झूठे आरोप लगाए गए थे। मैंने नैतिक ज़िम्मेदारी के चलते गिरफ़्तारी से पहले ही इस्तीफ़ा दे दिया था। और जब तक अदालत ने मुझे बरी नहीं कर दिया, तब तक मैंने कोई पद नहीं संभाला। जुलाई 2010 में, गुजरात के तत्कालीन गृह राज्य मंत्री अमित शाह को गैंगस्टर सोहराबुद्दीन शेख, उसकी पत्नी कौसर बी और सहयोगी तुलसीराम प्रजापति के कथित फर्जी मुठभेड़ मामले में केंद्रीय जाँच ब्यूरो ने गिरफ्तार किया था। एजेंसी ने फ़ोन रिकॉर्ड और अन्य सबूतों का हवाला देते हुए उन पर एक साज़िश का आरोप लगाया था।
गिरफ़्तारी से पहले शाह ने अपने मंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया था। उसी साल बाद में ज़मानत मिलने से पहले उन्हें साबरमती जेल में न्यायिक हिरासत में रखा गया था। दिसंबर 2014 में, एक विशेष सीबीआई अदालत ने सबूतों के अभाव का हवाला देते हुए उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया।