By डॉ. अनिमेष शर्मा | Feb 27, 2026
भारतीय बाजार में नकली और मिलावटी दवाओं के मामले समय-समय पर सामने आते रहे हैं। आम लोगों के मन में अक्सर यह सवाल रहता है कि वे जो दवा ले रहे हैं, वह असली है या नहीं। देखने में असली और नकली दवा में अंतर समझना लगभग नामुमकिन होता है, लेकिन इसका असर बहुत गंभीर हो सकता है। नकली दवाएं बीमारी को ठीक करने की बजाय मरीज की हालत और खराब कर सकती हैं। इसके अलावा, स्वास्थ्य सेवाओं और दवा कंपनियों पर लोगों का भरोसा भी कम होता जा रहा है। इसी समस्या से निपटने के लिए सरकार और दवा नियामक संस्थाओं ने क्यूआर कोड वेरिफिकेशन सिस्टम शुरू किया है, जिससे कोई भी व्यक्ति अपने स्मार्टफोन से दवा की असलियत तुरंत जांच सकता है।
क्यूआर कोड वेरिफिकेशन एक डिजिटल सुरक्षा व्यवस्था है, जिसमें दवा की पैकेजिंग पर एक खास क्यूआर कोड दिया जाता है। इस कोड में दवा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी स्टोर रहती है, जैसे बैच नंबर, निर्माण तिथि, एक्सपायरी डेट और निर्माता का लाइसेंस नंबर। जब कोई व्यक्ति इस कोड को स्कैन करता है, तो उसे दवा की पूरी जानकारी तुरंत अपने फोन की स्क्रीन पर दिखाई देती है। इससे यह पता लगाना आसान हो जाता है कि दवा असली है या नकली।
आज के समय में लगभग हर स्मार्टफोन में क्यूआर कोड स्कैन करने की सुविधा मौजूद होती है। अगर आपके फोन में यह फीचर नहीं है, तो आप प्ले स्टोर या ऐप स्टोर से कोई भी क्यूआर स्कैनर ऐप डाउनलोड कर सकते हैं।
दवा की पैकिंग पर दिए गए क्यूआर कोड को अपने फोन के कैमरे से स्कैन करें। जैसे ही स्कैन पूरा होगा, दवा से जुड़ी सभी जरूरी जानकारी आपके मोबाइल स्क्रीन पर दिखने लगेगी। इसमें बैच नंबर, मैन्युफैक्चरिंग डेट, एक्सपायरी डेट और कंपनी का लाइसेंस नंबर शामिल होता है। यह प्रक्रिया केवल कुछ सेकंड में पूरी हो जाती है और आपको दवा की सच्चाई का पता चल जाता है।
स्कैन करने के बाद जो जानकारी आपके फोन पर दिखाई देती है, उसे दवा की पैकिंग पर छपी जानकारी से मिलाना जरूरी है। अगर दोनों जानकारियां बिल्कुल एक जैसी हैं, तो समझिए कि दवा असली है और इसे इस्तेमाल करना सुरक्षित है।
लेकिन अगर स्क्रीन पर “No Record Found” दिखे या जानकारी मेल नहीं खाती है, तो सावधान हो जाएं। ऐसी स्थिति में उस दवा का उपयोग तुरंत बंद कर दें और इसकी जानकारी सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) को दें। यह कदम आपके और दूसरों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है।
1. सबसे पहले दवा की पैकेजिंग पर क्यूआर कोड खोजें।
2. ध्यान रखें कि फिलहाल यह नियम भारत की टॉप 300 दवा ब्रांडों पर लागू है।
3. अब अपने स्मार्टफोन के कैमरे या क्यूआर स्कैनर ऐप से कोड स्कैन करें।
4. स्क्रीन पर दिख रही जानकारी को पैकेट पर छपी जानकारी से मिलाएं।
5. अगर जानकारी मेल नहीं खाती या कोई रिकॉर्ड नहीं मिलता है, तो तुरंत CDSCO को शिकायत दर्ज करें।
एक जरूरी बात यह है कि अभी सभी दवाओं पर क्यूआर कोड उपलब्ध नहीं है, लेकिन भविष्य में इसे सभी दवाओं के लिए अनिवार्य किया जा सकता है। इससे नकली दवाओं पर पूरी तरह रोक लगाने में मदद मिलेगी।
नकली दवाओं से बचने के लिए सिर्फ तकनीक ही नहीं, बल्कि जागरूकता भी बहुत जरूरी है। हमेशा भरोसेमंद मेडिकल स्टोर से ही दवाएं खरीदें और बिल जरूर लें। अगर किसी दवा पर शक हो, तो तुरंत जांच करें और संबंधित अधिकारियों को सूचित करें। आपके द्वारा उठाया गया छोटा सा कदम न केवल आपकी बल्कि कई अन्य लोगों की जिंदगी बचा सकता है।
- डॉ. अनिमेष शर्मा