अमेरिका में सत्ता बदली तो अफगान शांति वार्ता पर बदला रुख, भारत की मौजूदगी से पाकिस्तान को लगेगा झटका

By अभिनय आकाश | Mar 08, 2021

जब भी तालिबान का जिक्र आता है तो कंधार विमान अपहरण की यादें ताजा हो जाती हैं। भारत का पड़ोसी देश अफगानिस्तान जो न एक मित्र देश है बल्कि यहां होने वाली राजनीतिक सरगर्मियां भी भारत को प्रभावित करती हैं। तालिबानअफगानिस्तान की प्रगति में बड़ी बाधा भी है। लेकिन बीते वर्ष जब अमेरिका ने तालिबान के साथ अफगान शांति वार्ता के साथ समझौता किया तो उस वक्त उसमें पाकिस्तान शामिल था लेकिन भारत नहीं। इसके साथ ही अफगानिस्तान सरकार को भी इस प्रक्रिया से बाहर रखा गया था। उस वक्त भारत के इस वार्ता में शामिल न होने से पाकिस्तान बेहद खुश था। इसकी ओर से बार-बार ये कहा जा रहा था कि अमेरिका की ओर से अफगान शांति समझौते में भारत को तरजीह नहीं दी गई और अपनी अहमियत का बखान करता रहा। लेकिन वक्त के साथ अमेरिका में सत्ता भी बदल गई और सत्ता बदलने के साथ ही फॉरेन पॉलिसी भी। अब अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने संयुक्त राष्ट्र द्वारा आयोजित रूस, चीन, पाकिस्तान, ईरान, भारत और अमेरिका के विदेश मंत्रियों एवं दूतों के सम्मेलन में दोनों पक्षों के एक साथ आने का आह्वान किया। जिससे पाकिस्तान के मुंह पर करारा तमाचा लगा है।

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ब्लिंकन ने दिए सुझाव

अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने अफगानिस्तान में सरकार और तालिबान के बीच रुकी हुई शांति प्रक्रिया को बहाल करने के लिए कई सुझाव दिए हैं। अफगानिस्तान के ‘टीओएलओन्यूज’ में ब्लिंकन द्वारा अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी को लिखा एक पत्र रविवार को प्रकाशित किया गया, जिसमें यह जानकारी दी गई। पत्र के अनुसार, ब्लिंकन ने संयुक्त राष्ट्र द्वारा आयोजित रूस, चीन, पाकिस्तान, ईरान, भारत और अमेरिका के विदेश मंत्रियों एवं दूतों के सम्मेलन में दोनों पक्षों के एक साथ आने का आह्वान किया,ताकि ‘‘अफगानिस्तान में शांति का समर्थन करने के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण पर चर्चा की जा सके।’’ ब्लिंकन ने आगामी सप्ताह में तालिबान और अफगानिस्तान सरकार के बीच तुर्की में उच्च स्तरीय बैठक का भी आह्वान किया। ‘टीओएलओन्यूज’ के अनुसार, विदेश मंत्री ने अफगानिस्तान के लिए अमेरिका के विदेश दूत जलमी खलीलजाद से अफगानिस्तान सरकार और तालिबान के साथ लिखित प्रस्ताव भी साझा करने को भी कहा है, ताकि बातचीत आगे बढ़ाने में मदद मिले। ब्लिंकन ने पत्र में यह भी स्पष्ट कर दिया कि अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन का प्रशासन एक मई की तय समय सीमा तक अमेरिकी बलों की देश से ‘‘पूर्ण वापसी’’ पर गौर कर रहा है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक मई की यह सीमा तय की थी। हालांकि विदेश मंत्रालय ने ‘टीओएलओन्यूज’ की इस खबर पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘‘ एक मई के बाद अफगानिस्तान में हमारे सैनिकों की मौजूदगी को लेकर हमने अभी तक कोई निर्णय नहीं किया है। सभी विकल्पों पर चर्चा जारी है।

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