By जे. पी. शुक्ला | Aug 31, 2026
पुरानी कार या बाइक खरीदने के बाद RC (Registration Certificate) अपने नाम ट्रांसफर कराना बेहद जरूरी है। अब केंद्र सरकार ने वाहन के मालिकाना हक के ट्रांसफर और अधिकृत डीलरों के जरिए पुराने वाहनों की बिक्री को लेकर नए नियमों का मसौदा पेश किया है। इसमें छह महीने की समय सीमा का प्रावधान चर्चा में है।
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने Central Motor Vehicles Rules, 1989 में बदलाव का मसौदा जारी किया है। इसका उद्देश्य खासकर संगठित सेकंड-हैंड वाहन कारोबार में वाहन के एक डीलर से दूसरे डीलर तक जाने और अंतिम खरीदार के नाम ट्रांसफर होने की प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी बनाना है।
- अधिकृत डीलर को वाहन मिलने के बाद उसकी जानकारी डिजिटल रूप से दर्ज की जाएगी। एक डीलर से दूसरे अधिकृत डीलर के पास वाहन जाने पर Form 29CA का इस्तेमाल प्रस्तावित है।
- डीलर से डीलर वाहन ट्रांसफर की संख्या अधिकतम दो रखने का प्रस्ताव है।
- Form 29C दाखिल होने के बाद वाहन छह महीने से ज्यादा समय तक डीलर के पास बिना Form 30 के नहीं रखा जा सकेगा।
प्रस्तावित नियम के अनुसार, यदि Form 29C दाखिल होने की तारीख से छह महीने के भीतर वाहन का मालिकाना हक Form 30 के जरिए किसी खरीदार को ट्रांसफर नहीं होता है तो वाहन का मालिकाना हक आखिरी अधिकृत डीलर के नाम अपने आप ट्रांसफर होने का प्रस्ताव है। यह बदलाव VAHAN सिस्टम में दर्ज किया जाएगा।
उदाहरण के तौर पर, अगर किसी वाहन को मालिक ने डीलर A को सौंपा और बाद में वह डीलर B के पास चला गया, तो छह महीने की समयसीमा के भीतर अंतिम खरीदार के नाम Form 30 से ट्रांसफर होना जरूरी होगा। ऐसा नहीं होने पर प्रस्ताव के मुताबिक आखिरी डीलर के नाम मालिकाना हक दर्ज हो सकता है।
यहां भ्रम दूर करना जरूरी है। मौजूदा सामान्य RC ट्रांसफर प्रक्रिया में खरीदार के लिए अलग समयसीमा लागू है। एक ही राज्य में वाहन की बिक्री होने पर सामान्यतः ट्रांसफर की सूचना और आवेदन निर्धारित समय में करना होता है। संबंधित परिवहन विभाग के अनुसार, सामान्य ट्रांसफर के लिए Form 29 और Form 30 का इस्तेमाल किया जाता है।
इसलिए नए मसौदे की छह महीने वाली शर्त को सीधे यह कहना कि “हर खरीदार छह महीने में RC ट्रांसफर नहीं कराएगा तो गाड़ी का मालिकाना हक बदल जाएगा”, सही नहीं होगा।
नए मसौदे में Form 29CA को अधिकृत डीलरों के बीच वाहन की आवाजाही दर्ज करने के लिए प्रस्तावित किया गया है। इससे क्या होगा :
- किस डीलर के पास वाहन है, इसका रिकॉर्ड रहेगा।
- वाहन के एक डीलर से दूसरे डीलर तक जाने की जानकारी VAHAN पर दर्ज होगी।
- वाहन के अंतिम खरीदार तक पहुंचने की प्रक्रिया ज्यादा ट्रैक योग्य होगी।
- पुराने वाहनों की बिक्री में पारदर्शिता बढ़ सकती है।
- किन वाहनों के ट्रांसफर पर रोक लग सकती है?
मसौदे में प्रस्ताव है कि कुछ परिस्थितियों में वाहन का डीलर को ट्रांसफर नहीं किया जा सकेगा। इनमें शामिल हैं:
- RC वैध नहीं होना
- इंश्योरेंस वैध नहीं होना
- PUC प्रमाणपत्र वैध नहीं होना
- पेंडिंग ट्रैफिक चालान
- बकाया टैक्स या यूजर फीस
- वाहन से जुड़ा कुछ कानूनी या आपराधिक मामला
- वाहन पर हायर-पर्चेज, लीज या हाइपोथिकेशन जैसी देनदारी होना।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ये अभी प्रस्तावित नियम हैं, अंतिम कानून नहीं। मंत्रालय ने मसौदे पर आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए हैं। अंतिम अधिसूचना जारी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कौन-से प्रावधान किस रूप में लागू होंगे।
- वाहन खरीदने के बाद RC ट्रांसफर को टालें नहीं।
- Form 29 और Form 30 की प्रक्रिया समय पर पूरी करें।
- खरीद-बिक्री से जुड़े दस्तावेज सुरक्षित रखें।
- वाहन का इंश्योरेंस और PUC वैध रखें।
- पेंडिंग चालान और टैक्स की स्थिति जांचें।
- सेकंड-हैंड वाहन खरीदते समय VAHAN रिकॉर्ड की जांच करें।
सरकार के नए मसौदे का मुख्य उद्देश्य पुराने वाहनों की खरीद-बिक्री में मालिकाना हक और डीलर-से-डीलर वाहन की आवाजाही का डिजिटल रिकॉर्ड मजबूत करना है। छह महीने की प्रस्तावित सीमा खासतौर पर अधिकृत डीलर के पास रखे वाहन से जुड़ी है। इसे हर निजी खरीदार पर लागू होने वाला नया छह महीने का RC नियम समझना सही नहीं होगा। फिलहाल यह एक मसौदा है, इसलिए वाहन मालिकों और खरीदारों को अंतिम अधिसूचना का इंतजार करना चाहिए। हालांकि, मौजूदा नियमों के तहत भी वाहन खरीदने के बाद RC अपने नाम कराने में देरी करना उचित नहीं है।
- जे. पी. शुक्ला