Illegal Bangladeshi Immigrants के साथ ही Rohingyas पर भी कसा शिकंजा, UN तक पहुँची बात, No Man's Land में फँसे लोग

By नीरज कुमार दुबे | Jun 19, 2026

पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद भारत-बांग्लादेश सीमा पर हालात तेजी से बदल रहे हैं। चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा नेताओं ने खुलकर घुसपैठियों के खिलाफ अभियान चलाने की बात कही थी। कई मंचों से अवैध बांग्लादेशियों को “घुसपैठिया”, “दीमक” और “भार” जैसे शब्दों से संबोधित किया गया था। मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी ने “डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट” नीति का एलान करते हुए साफ कहा कि अवैध रूप से रह रहे लोगों को वापस भेजा जाएगा। इसके बाद सीमा पर कार्रवाई और तेज हो गई।

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इसी बीच बांग्लादेश की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। ढाका ने आरोप लगाया है कि भारत कई लोगों को जबरन सीमा पार धकेल रहा है। बांग्लादेश सीमा रक्षक बल के अनुसार मई 2025 से जनवरी 2026 तक दो हजार से अधिक लोगों को भारत से बांग्लादेश में धकेला गया। इनमें कुछ भारतीय नागरिक और म्यांमार के लोग भी शामिल बताए गए। कई मामलों में सीमा पर दोनों देशों की सेनाओं के बीच तनावपूर्ण हालात बन गए। कुछ परिवार कई दिनों तक नो मैन्स लैंड में फंसे रहे।

हालांकि भारत मानता है कि अवैध घुसपैठ अब राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुकी है। सीमावर्ती राज्यों में जनसंख्या संतुलन तेजी से बदल रहा है। फर्जी आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और राशन कार्ड के जरिए लाखों बांग्लादेशी वर्षों से भारत में बसते चले गए। इससे रोजगार, संसाधनों और आंतरिक सुरक्षा पर दबाव बढ़ा है। यही कारण है कि अब केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर पहचान, सत्यापन और निष्कासन की प्रक्रिया को तेज कर रही हैं।

इसके अलावा, सीमा विवाद के साथ-साथ तस्करी का मुद्दा भी तेजी से उभरा है। बांग्लादेश सीमा रक्षक बल ने हाल ही में भारत भेजी जा रही बड़ी मात्रा में लहसुन और यूरिया खाद जब्त की है। अधिकारियों का कहना है कि सीमा पार तस्करी रोकने के लिए लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। यह साफ संकेत है कि सीमा केवल घुसपैठ का ही नहीं, बल्कि अवैध कारोबार का भी बड़ा गलियारा बनी हुई है।

रोहिंग्या शरणार्थियों का मुद्दा भी इस पूरे विवाद को और जटिल बना रहा है। बांग्लादेश के शिविरों में रह रहे रोहिंग्या भारत की सख्ती से भयभीत हैं। कई रोहिंग्या संगठनों ने आरोप लगाया कि भारत में उन्हें लगातार प्रताड़ना, हिरासत और हिंसा का सामना करना पड़ रहा है। कुछ मामलों में समुद्र में धकेलने जैसे आरोप भी लगे। दूसरी ओर भारतीय सुरक्षा एजेंसियों का तर्क है कि रोहिंग्या नेटवर्क का इस्तेमाल कई कट्टरपंथी और अपराधी संगठन कर सकते हैं, इसलिए सख्ती आवश्यक है।

उधर, भारत और बांग्लादेश के संबंधों पर भी इसका असर पड़ने लगा है। गंगा जल संधि और तीस्ता जल बंटवारे जैसे पुराने विवाद पहले से लंबित हैं। अब सीमा पर बढ़ते तनाव ने दोनों देशों के रिश्तों को और संवेदनशील बना दिया है। इस बीच, संयुक्त राष्ट्र ने दोनों देशों से मानवाधिकारों का सम्मान करते हुए संवाद के जरिए समाधान निकालने की अपील की है।

बहरहाल, एक बात बिल्कुल स्पष्ट है। भारत अब अवैध घुसपैठ को किसी भी कीमत पर स्वीकार करने के मूड में नहीं दिख रहा। सीमा पार से आने वाले लोगों को यह समझ लेना चाहिए कि भारत कोई खुला मैदान नहीं है जहां फर्जी पहचान बनाकर वर्षों तक छिपा जा सके। जो लोग अवैध तरीके से भारत में प्रवेश करेंगे, कानून तोड़ेंगे या देश की सुरक्षा और सामाजिक संतुलन को बिगाड़ने की कोशिश करेंगे, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई तय है।

बांग्लादेशी घुसपैठियों के लिए यह साफ चेतावनी है कि भारत की सीमा, कानून और संप्रभुता के साथ खिलवाड़ अब भारी पड़ेगा। अवैध प्रवेश, फर्जी दस्तावेज और तस्करी के नेटवर्क पर शिकंजा कस चुका है। सीमा सुरक्षा बल से लेकर राज्य प्रशासन तक अब पूरी ताकत के साथ सक्रिय हैं। आने वाले दिनों में यह अभियान और व्यापक होने वाला है इसलिए घुसपैठियों को चाहिए कि वह जल्द से जल्द भारत से चले जायें।

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