Firozabad Glass Industry पर Middle East संकट का असर, Gas की कमी से 5 लाख लोग बेरोजगार।

By Ankit Jaiswal | Apr 02, 2026

उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में कांच उद्योग इस समय गंभीर संकट से गुजर रहा है। बता दें कि यह शहर चार सौ साल पुरानी कांच निर्माण परंपरा के लिए जाना जाता है, लेकिन इस वक्त यहां की भट्टियां धीमी पड़ गई हैं और हजारों मजदूरों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है।

बताया जा रहा है कि मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण गैस की आपूर्ति बाधित हुई है, जिससे देश के कई उद्योग प्रभावित हुए हैं। भारत में गैस का उपयोग उद्योग, परिवहन और घरेलू स्तर पर बड़े पैमाने पर होता है, ऐसे में आपूर्ति घटने पर सबसे पहले उद्योगों पर असर पड़ता है।

फिरोजाबाद में स्थिति यह है कि जहां आमतौर पर इस समय उत्पादन अपने चरम पर होता है, वहां अब भट्टियां बंद पड़ी हैं और मजदूर खाली बैठे नजर आ रहे हैं। कई जगहों पर कारीगर मोबाइल फोन पर समय बिताते दिख रहे हैं, क्योंकि उनके पास काम नहीं है।

एक भट्ठी संचालक के अनुसार जहां पहले 500 से ज्यादा लोग काम करते थे, अब वहां 200 से भी कम लोगों को काम मिल पा रहा है। छोटे कारीगरों ने तो अपनी इकाइयां बंद कर दी हैं और गैस उपलब्ध होने का इंतजार कर रहे हैं।

गौरतलब है कि फिरोजाबाद के कांच उद्योग से सीधे तौर पर करीब दो लाख लोग जुड़े हैं, जबकि अप्रत्यक्ष रूप से यह संख्या पांच लाख तक पहुंचती है। ऐसे में इस संकट का असर बड़े पैमाने पर देखने को मिल रहा है।

उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि अगर हालात जल्दी नहीं सुधरे तो पूरा उत्पादन सीजन खत्म हो सकता है। मौजूद जानकारी के अनुसार मार्च की शुरुआत से गैस आपूर्ति में 20 प्रतिशत से ज्यादा की कमी आई है, जिससे उत्पादन करीब 40 प्रतिशत तक गिर गया है।

निर्यात के मोर्चे पर भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। बताया जा रहा है कि पिछले महीने कांच उत्पादों का निर्यात लगभग 20 प्रतिशत तक गिर गया है। वहीं कई निर्माता, जो अमेरिका और यूरोप को सामान भेजते हैं, उनके यहां उत्पादन एक तिहाई तक घट गया है।

आम तौर पर मार्च से अगस्त के बीच त्योहारों के लिए बड़े ऑर्डर तैयार किए जाते हैं, लेकिन इस बार हालात अलग हैं और मार्च में एक भी कंटेनर बाहर नहीं जा सका है।

गौरतलब है कि सिर्फ उत्पादन ही नहीं, बल्कि माल ढुलाई भी बड़ी समस्या बन गई है। मध्य पूर्व के समुद्री रास्तों पर तनाव के कारण परिवहन और बीमा लागत में भारी बढ़ोतरी हुई है, जिससे निर्यात महंगा हो गया है।

मौजूद जानकारी के अनुसार यूरोप भेजे जाने वाले कंटेनरों की लागत 60 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ गई है, जबकि खाड़ी देशों को निर्यात लगभग ठप हो गया है। कई जगहों पर माल बंदरगाहों पर ही फंसा हुआ है।

जानकारों का मानना है कि भारत एशिया के उन देशों में शामिल है जो इस स्थिति से सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं, क्योंकि देश की आपूर्ति व्यवस्था समुद्री मार्गों पर काफी निर्भर है।

गौरतलब है कि यह संकट सिर्फ कांच उद्योग तक सीमित नहीं है, बल्कि कपड़ा और अन्य विनिर्माण क्षेत्रों में भी असर देखने को मिल रहा है। कई छोटे और मध्यम उद्योग बढ़ती लागत के कारण मुश्किल में हैं और उनके सामने टिके रहने की चुनौती खड़ी हो गई है।

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