US Tech Sell-off का असर: Japan से South Korea तक बाजार Crash, AI शेयरों में मचा कोहराम

By Ankit Jaiswal | Jun 28, 2026

वैश्विक शेयर बाजारों में एक बार फिर भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। शुक्रवार को एशिया के अधिकांश प्रमुख बाजारों में तेज गिरावट दर्ज की गई। सबसे ज्यादा दबाव तकनीकी कंपनियों के शेयरों पर रहा, जिससे निवेशकों के बीच चिंता का माहौल बन गया। मौजूद जानकारी के अनुसार दक्षिण कोरिया, जापान, चीन और हांगकांग के बाजारों में बड़े पैमाने पर बिकवाली देखने को मिली है।

बता दें कि यह गिरावट केवल एशिया तक सीमित नहीं रही। इससे पहले अमेरिकी बाजारों में भी तकनीकी कंपनियों के शेयरों में बड़ी बिकवाली देखने को मिली थी। इसका सीधा असर एशियाई बाजारों पर पड़ा। विशेष रूप से दुनिया की बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनी एप्पल के शेयरों में 6 प्रतिशत से अधिक की गिरावट ने निवेशकों का भरोसा कमजोर किया है। कंपनी ने स्मृति चिप और भंडारण उपकरणों की बढ़ती लागत के कारण अपने कुछ उत्पादों की कीमतें बढ़ाने की घोषणा की थी, जिसके बाद बाजार की धारणा प्रभावित हुई।

गौरतलब है कि एक दिन पहले तक चिप निर्माण क्षेत्र की बड़ी कंपनी माइक्रोन टेक्नोलॉजी के बेहतर नतीजों ने एआई क्षेत्र को लेकर सकारात्मक माहौल बनाया था। लेकिन इसके तुरंत बाद बढ़ती लागत और भविष्य की कमाई को लेकर चिंता बढ़ने से निवेशकों ने तकनीकी शेयरों में मुनाफावसूली शुरू कर दी।

विश्लेषकों का मानना है कि पिछले कुछ महीनों में एआई से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में काफी तेजी आई थी। ऐसे में कई निवेशकों ने तिमाही समाप्त होने से पहले लाभ सुरक्षित करने के लिए बिकवाली का रास्ता अपनाया है। यही कारण है कि तकनीकी क्षेत्र में गिरावट अन्य क्षेत्रों की तुलना में अधिक देखने को मिली है।

चीन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ा प्रमुख सूचकांक लगभग 5 प्रतिशत गिर गया, जबकि संचार तकनीक से संबंधित सूचकांक में 6 प्रतिशत से अधिक की कमजोरी दर्ज की गई है। वैश्विक एआई ढांचे के लिए उपकरण उपलब्ध कराने वाली कंपनी झोंगजी इनोलाइट के शेयरों में भी लगभग 6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं हांगकांग का तकनीकी सूचकांक भी लगातार दबाव में बना हुआ है।

इधर अमेरिकी वायदा बाजारों में भी कमजोरी दर्ज की गई। इसके पीछे यह खबर रही कि एआई क्षेत्र की प्रमुख कंपनी ओपनएआई की प्रस्तावित सार्वजनिक हिस्सेदारी बिक्री अगले वर्ष तक टल सकती है। इससे इस क्षेत्र में निवेश के मूल्यांकन को लेकर नई चिंताएं पैदा हुई हैं।

हालांकि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई और ब्रेंट कच्चा तेल 74 डॉलर प्रति बैरल से नीचे पहुंच गया, लेकिन इसका सकारात्मक असर शेयर बाजारों पर नहीं दिखाई दिया। वहीं जापान की मुद्रा येन भी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कई दशक के निचले स्तर के करीब बनी हुई है, जिससे वहां की आर्थिक स्थिति पर भी निवेशकों की नजर बनी हुई है।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा गिरावट का मतलब यह नहीं है कि एआई क्षेत्र की संभावनाएं खत्म हो गई हैं। लेकिन बढ़ती लागत, ऊंचे मूल्यांकन, मुनाफावसूली और भविष्य की कमाई को लेकर बढ़ती अनिश्चितता ने फिलहाल निवेशकों को सतर्क रहने के लिए मजबूर कर दिया है। आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक संकेतक और बड़ी तकनीकी कंपनियों के नतीजे बाजार की अगली दिशा तय कर सकते हैं।

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