By अंकित सिंह | Apr 04, 2022
पाकिस्तान में राजनीतिक उथल-पुथल का दौर लगातार जारी है। सरकार के अल्पमत में आने के कयासों के बीच इमरान खान ने राष्ट्रपति को पाकिस्तान की नेशनल असेंबली को भंग करने की सिफारिश कर दी। राष्ट्रपति ने भी इमरान खान की सलाह मानते हुए नेशनल असेंबली को भंग कर दिया। हालांकि, इसके बाद पाकिस्तान की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू। दरअसल, रविवार को पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में इमरान सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा और वोटिंग होनी थी। लेकिन डिप्टी स्पीकर ने अविश्वास प्रस्ताव को संविधान के अनुच्छेद 5 खिलाफ बताते हुए इसे खारिज कर दिया। इसके ठीक बाद इमरान खान ने लोगों को संबोधित करते हुए बताया कि उन्होंने राष्ट्रपति को असेंबली भंग करने की सिफारिश की है। इमरान खान के इस कदम की आलोचना भी हो रही है। हालांकि सवाल यही है कि आखरी केंद्र तक के लड़ाई लड़ने की हुंकार भरने वाले इमरान खान ने आखरी ओवर को ही खत्म क्यों कर दिया?
हालांकि, विवाद इसी के बाद शुरू हुआ। विपक्ष इसे संविधान के खिलाफ बता रहा है। फिलहाल इमरान खान पाकिस्तान में कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने रहेंगे। लेकिन सियासी पिच पर इमरान खान ने ऐसी गुगली फेंके कि विपक्ष चौक गया है। खुद पाकिस्तान की राजनीति को समझने वाले विशेषज्ञों के लिए भी इसे समझना आसान नहीं है। क्रिकेट खिलाड़ी से राजनेता बने इमरान खान ने देश की राजनीतिक पिच पर एक माहिर खिलाड़ी के तौर पर उभरे हैं। वर्ष 2018 में पाकिस्तान की बागडोर संभालने के बाद से इमरान खान को सबसे बड़े राजनीतिक संकट का सामना करना पड़ रहा था क्योंकि उनकी पार्टी के सांसदों द्वारा बगावती तेवर अपनाए जाने और गठबंधन सहयोगियों में दरार के चलते खान की मुश्किलें लगातार बढ़ रही थीं।
असेंबली को भंग किए जाने के कुछ घंटे बाद पूर्व गृह मंत्री शेख रशीद ने कहा कि इमरान खान अगले 15 दिनों के लिए पद पर बने रहेंगे। रशीद ने एक बयान में कहा कि संसद के निचले सदन को भंग किए जाने की सिफारिश के बाद उन्होंने पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी प्रमुख इमरान खान से मुलाकात की। रशीद ने कहा कि देश में अगले आम चुनाव ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिं मशीन) के जरिये नहीं होंगे। पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने रविवार को कहा कि देश के खिलाफ ‘साजिश’ में शामिल प्रधानमंत्री इमरान खान और अन्य लोग घोर राजद्रोह के दोषी हैं और इनके खिलाफ संविधान के उल्लंघन का मामला चलाया जाना चाहिये। प्रतिपक्षा के नेता और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी ने कहा कि नेशनल असेंबली के उपाध्यक्ष कासिम सुरी ने इमरान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को खारिज करके एक ‘असंवैधानिक’ काम किया है।
ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त करने वाले खान 2018 में नया पाकिस्तान बनाने का वादा कर सत्ता में आये थे। हालांकि, वह मंहगाई समेत आम जनता की बुनियादी समस्याओं को दूर करने में नाकाम रहे। करीब 21 वर्षों तक क्रिकेट मैदान में अपनी पारी खेलने वाले इमरान खान का 26 वर्षों का राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा। सत्ता में रहने के दौरान खान पर अधिकतर विपक्षी नेताओं के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां करने के आरोप लगते रहे और यही कारण रहा कि विपक्षी नेता आसानी से एकजुट होकर खान के नेतृत्व वाली सरकार को अस्थिर करने में कामयाब होते दिखे। हालांकि, पिछली बार जब मार्च 2021 में इमरान खान सरकार को अविश्वास प्रस्ताव का सामना करना पड़ा था, तब वह आसानी से बहुमत साबित करने में कामयाब रहे थे। इमरान खान ने वर्ष 1996 पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) का गठन किया, जिसका अर्थ है न्याय के लिए आंदोलन। खान 2002 में चुनाव जीतकर नेशनल असेंबली के सदस्य बने। इसके बाद वह 2013 में दोबारा चुनाव जीतकर नेशनल असेंबली पहुंचे और उस दौरान उनकी पार्टी को लोगों का भारी समर्थन मिला। वर्ष 2018 के आम चुनाव में अपनी पार्टी को जीत दिलाने के बाद इमरान खान पहली बार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने। सत्ता में आने के बाद खान लगातार पाकिस्तान को एक इस्लामिक कल्याणकारी राष्ट्र बनाने की बात करते रहे। हालांकि, वह अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर विफल रहे और आवश्यक वस्तुओं के दाम बेकाबू हो गए।