तारीफ पे तारीफ! इमरान भारत के गुण गा रहे हैं या पश्चिमी देशों को उसकी कूटनीति के प्रति उकसा रहे हैं

By अभिनय आकाश | Apr 09, 2022

एक बार एक नौकर और उसका बंगाली मालिक ट्रेन में सफर कर रहे थे। तभी बगल की सीट पर बैठे एक हट्टे-कट्टे व्यक्ति से उसकी झड़प हो गई। उस आदमी ने नौकर को दो थप्पड़ रसीद कर दी। सरेआम अपनी पिटाई से शर्मशार नौकर ने सोचा कि सभी लोग इस बात का उपहास उड़ाएंगे। उसके दिमाग में एक ख्याल आया। उसने जवाब में बंगाली में कहा 'आमाके मारले अमारा बसाके पीटये दिखाओ" (मुझे मार दिया तो मार दिया लेकिन मेरे मालिक को हाथ लगा कर दिखाओ) वो बलशाली नौजवान पहले तो नौकर के उकसावे में आकर मालिक को आंखे दिखाया। लेकिन फिर जब उसने मालिक के चेहरे के भाव पर कोई भी असर न पड़ता देख शांत बैठ गया। ऐसा ही कुछ इन दिनों वैश्विक राजनीति में भी देखने को मिल रहा है। पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के कप्तान इमरान खान पिछले कई दिनों से अमेरिका की आलोचना में भारत की कूटनीति की प्रशंसा करने लगे हैं। पहली नजर में देखें तो इमरान भारत की तारीफ पे तारीफ किए जा रहे हैं। लेकिन अगर इसे थोड़ा हटके देखें तो इमरान इमरान भारत के गुण गा रहे हैं या फिर पश्चिमी देशों को उसकी कूटनीति के प्रति उकसा रहे हैं। 

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इमरान खान हर बार कहते रहे कि वह आखिरी गेंद तक खेलेंगे। लेकिन अब लग रहा है कि वो आखिरी गेंद आ ही गई। इमरान खान ने एक बार फिर से अपने देश को संबोधित करते हुए कहा कि मैं फिर से अपनी कौम को कहता हूं कि हमें यह फैसला करना है कि हमें किस तरह का पाकिस्तान चाहिए। मैं आपको आज से अफसोस और तकलीफ भी होती है कहते हुए कि हमारे साथ ही हिंदुस्तान आजाद हुआ था। इमरान ने कहा कि मैं हिंदुस्तान को बहुत बेहतर जानता हूं मेरी दोस्ती अभी थी क्रिकेट की वजह से बड़ा प्यार भी मिला। मुझे बड़ा अफसोस है कि सिर्फ आर एस एस की आईडियोलॉजी की वजह से और कश्मीर में जो उन्होंने किया उसकी वजह से हमारे तालुकात नहीं है। लेकिन मैं आपको एक दुखी बहुत ही बड़े खुद्दार कम है। कभी किसी की जरूरत नहीं है कि वहां इस तरह की बातें करें। किसी सुपर पावर की जरूरत नहीं है कि वह यह भी कहते हैं कि जनाब फौरन रिलेशन में यह कहे जो हम कह रहे हैं। अब देख रहे हैं कि रूसी और से प्रतिबंधों के बावजूद तेल खरीद रहे हैं। इमरान खान का भी यही प्रॉब्लम है। मैं कहता हूं कि किसी से भी हमारी लड़ाई नहीं है।

इमरान की कुर्सी तो अब जाने ही वाली है लेकिन उसके साथ ही उनकी इज्जत भी वैश्विक पटल के साथ ही खुद के देश में तार-तार हो चुकी है। इसलिए वो बार-बार अपने ऊपर आई विपदा और फेल वैश्विक कूटनीति को भारत की आड़ में ढक देना चाहते हैं। इसके साथ ही वो पश्चिमी देशों को भारत की कूटनीति  की शिकायत करने में लगे है। उन्हें लग रहा है कि आंतक के हिमायती मुल्क और दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रकि देश को अमेरिका, ब्रिटेन एक ही चश्में से देखें और व्यवहार भी करें। अमेरिकी राष्‍ट्रपति जो बाइडन हों या अमेरिका के डिप्‍टी नेशनल सिक्‍योरिटी एडवाइजर दलीप सिंह दोनों ने ही भारत को धमकाने की कोशिश भी की लेकिन इसका भारत की सेहत पर कोई खास असर नहीं पड़ा। आलम तो ये भी देखने को मिला की व्हाइट हाउस को सफाई देते हुए ये कहना पड़ा कि बाइडेन प्रशासन की तरफ से भारत को कोई चेतावनी नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि दलीप सिंह ने रूस से तेल आयात को लेकर भारतीय पक्ष के साथ सकारात्मक वार्ता की थी। वाइट हाउस ने इसके साथ यह भी कहा कि भारत, रूस की तुलना में अमेरिका से अधिक ऊर्जा आयात करता है। 

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कुल मिलाकर कहा जाए तो रूस हो या अमेरिका, भारत किसी भी सुपरपावर की कठपुतली नहीं बनना चाहता है। अलबत्‍ता वह खुद ही एक तरह की पावर बनने की राह पर है। वह अपनी नीतियों पर चलता रहा है। इसमें सबसे ऊपर राष्‍ट्रीय हितों को रखा गया है। वहीं पाकिस्तान का तो इतिहास कहता है कि न तो कोई प्रधानमंत्री 5 साल का कार्यकाल पूरा कर पाया है और ना ही इज्जत से कुर्सी छोड़ पाया है। इमरान खान भी इसी परंपरा का हिस्सा बनने की चौखट पर खड़े हैं। 

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