UN में बोले इमरान- इस्लामोफोबिया के चलते हो रहा है बंटवारा, हिजाब हथियार बन गया

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Sep 28, 2019

संयुक्त राष्ट्र। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने शुक्रवार को यहां कहा कि 9/11 हमलों के बाद इस्लामोफोबिया (इस्लाम का भय) चिंताजनक ढंग से बढ़ा है और यह विभाजन पैदा कर रहा है जहां हिजाब पहनने को कुछ देशों ने समुदाय के खिलाफ “हथियार” बना लिया है। खान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने पहले संबोधन में जलवायु परिवर्तन, धन शोधन एवं इस्लामोफोबिया सहित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। खान ने कहा कि पश्चिमी देशों में अरबों मुस्लिम अल्पसंख्यकों की तरह रह रहे हैं तथा 9/11 के हमले के बाद से इस्लामोफोबिया चिंताजनक गति से बढ़ा है। उन्होंने कहा कि इस्लामोफोबिया विभाजन पैदा कर रहा है, हिजाब एक हथियार बन गया है, एक महिला अपने वस्त्र निकाल सकती है किंतु वह अधिक वस्त्र नहीं पहन सकती। यह 9/11 के बाद हुआ है तथा यह इसलिए शुरू हुआ क्योंकि कुछ पश्चिमी देशों ने इस्लाम की तुलना आतंकवाद से की है।

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उन्होंने कहा कि यूरोपीय देशों में यह मुस्लिमों को हाशिए पर डाल रहा है और इससे कट्टरपंथ बढ़ रहा है। कुछ आतंकवादी वंचित मुस्लिम समुदायों से हैं। हम मुस्लिम नेताओं ने इस समस्या का समाधान नहीं किया। सभी मुस्लिम नेता नरमपंथी बन गए और हमारी सरकार ने ‘प्रबुद्ध नरमपंथ’ की कहावत गढ़ दी। खान की ये टिप्पणियां ऐसे वक्त में आईं हैं जब इससे एक दिन पहले उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान, तुर्की और मलेशिया ने संयुक्त रूप से अंग्रेजी भाषा में एक इस्लामी टीवी चैनल शुरू करने का फैसला किया है जिसके जरिए इस्लाम के भय के कारण पैदा हो रही चुनौतियों का सामना किया जाएगा और गलत धारणाओं को दूर किया जाएगा।

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खान ने ट्वीट किया था, “राष्ट्रपति एर्दोआन, प्रधानमंत्री महातिर और मैंने आज एक बैठक की जिसमें हमने तय किया कि हम तीन देश संयुक्त रूप से अंग्रेजी भाषा में एक चैनल शुरू करेंगे जो इस्लाम के प्रति भय की चुनौतियों का सामना करने और हमारे महान धर्म- इस्लाम के खिलाफ गलत धारणों को सही करने का काम करेगा।” उन्होंने कहा कि गलतफहमियां जो लोगों को मुस्लिमों के खिलाफ एकजुट करती हैं उन्हें दूर किया जाएगा, ईशनिंदा के मुद्दे को सही परिप्रेक्ष्य में समझाया जाएगा, हमारे अपने लोगों और दुनिया को शिक्षित/ सूचित करने के लिए फिल्मों एवं श्रृंखलाओं का निर्माण किया जाएगा, मुस्लिमों (से जुड़े विषयों) को मीडिया में विशेष स्थान दिया जाएगा। 

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जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर खान ने कहा कि इस पर कई नेता बात करते हैं लेकिन इसमें गंभीरता का अभाव है। उन्होंने कहा, “हम स्थिति की गंभीरता को नहीं समझ रहे हैं। हमारे पास कई विचार हैं लेकिन वित्तपोषण के बिना वे महज भ्रम हैं।” खान ने कहा, “हमारा देश उन शीर्ष 10 देशों में से है जो जलवायु परिवर्तन से सबसे ज्यादा प्रभावित है। हमें 80 प्रतिशत जल हिमखंड से मिलता है। ये हिमखंड तेज गति से पिघल रहे हैं। ये ग्लेशियर भारत में हिमालय, कराकोरम और हिंदू कुश में भी हैं। मुझे डर है कि अगर कुछ नहीं किया गया तो लोगों को बड़ी आपदा झेलनी पड़ सकती है।” ग्लोबल वार्मिंग पर अपने प्रयासों को रेखांकित करते हुए खान ने कहा कि जब उनकी सरकार सत्ता में आई थी तो उन्होंने खैबर पख्तूनख्वा में एक अरब पौधे लगाए थे और 10 अरब और पौधे लगाने की योजना है। खान ने कहा कि एक देश कुछ नहीं कर सकता, इसके लिए पूरे विश्व को संयुक्त रूप से प्रयास करना होगा। साथ ही उन्होंने संयुक्त राष्ट्र से उन देशों पर दबाव बनाने को कहा जो ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन अधिक करते हैं।

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