कथित हनी ट्रैप ब्लैकमेलिंग कांड में दाल में कुछ काला नहीं बल्कि पूरी दाल ही काली है !

By दिनेश शुक्ल | Oct 03, 2019

मध्यप्रदेश के कथित हनी ट्रैप ब्लैकमेलिंग कांड की जाँच के लिए बनी एसआईटी के अंदर तीसरे प्रमुख को कमान सौंप दी गई है। मंगलवार 01 अक्टूबर देर रात मंत्रालय के गृह विभाग से जारी किए गए कई आईपीएस अधिकारीयों की स्थानंतरण सूची के साथ ही नए एसआईटी प्रमुख के आदेश भी जारी किए गए। जिसके अनुसार एसआईटी प्रमुख संजीव समी के स्थान पर सीनियर आईपीएस राजेन्द्र कुमार को इसकी कमान सौंपी दी गई। कथित हनी ट्रेप ब्लेकमेलिंग कांड में कई आईपीएस और आईएएस अधिकारीयों के इस पूरे कांड में संलिप्तता होने की बात कही जा रही है। जिसके चलते पिछले नौ दिनों में एसआईटी गठित होने के बाद पहले अध्यक्ष डी.श्रीनिवास वर्मा को 24 घंटों के अंदर ही हटा दिया गया तो दूसरे अध्यक्ष संजीव समी को जाँच के बीच में ही हटाते हुए नए एसआईटी चीफ को नियुक्त कर दिया गया है।

इस पूरे मामले को लेकर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने प्रमुख सचिव, डीजीपी और एसआईटी चीफ रहे संजीव समी को सीएम हाउस तलब किया था। बताया जाता है कि बैठक के दौरान इस केस को लेकर मुख्यमंत्री ने अहतीयात बरतने के निर्देश भी दिए थे साथ ही मीडिया रिपोर्ट में यह भी आया था कि मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अधिकारीयों को निर्देश दिए है कि कथित हनी ट्रेप ब्लेकमेलिंग कांड से प्रदेश की छवि खराब हुई है। उसके दूसरे ही दिन मंत्रालय से पुलिस के आला अधिकारीयों के स्थानांतरण कर दिए गए। इसकी एक प्रमुख वजह स्पेशल डीजी साइबर क्राइम पुरूषोत्तम शर्मा और पुलिस महानिदेशक बी.के.सिंह के बीच उपजा विवाद बताया जा रहा है। जिसमें गाजियाबाद में बिना अनुमति के साइबर क्राइम से जुडे काम के लिए फ्लैट को हनी ट्रेप कांड से जोड़ने के आरोप पुरूषोत्तम शर्मा ने लगाए थे। जिस पर मुख्यमंत्री कमलनाथ से भी नाराजगी जाहिर की थी।

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इस मामले में फंसे कई आईएएस और आईपीएस अधिकारीयों सहित नेताओं के नाम आने से पॉवर लॉबी में हलचली मची हुई थी। वही 24 सितंबर को एसआईटी प्रमुख को बदलकर तेजतर्रार, सख्त मीज़ाज और दवाब में न आने वाले ऑफिसर संजीव समी को कमान देने के बाद खलबली मच गई थी। यही वजह थी कि राजनीतिक गलियारों से लेकर आईएएस और आईपीएस लॉबी में हलचल मची हुई थी। बताया जा रहा है कि यही कारण रहा सात दिन के अंदर ही संजीव समी को एसआईटी प्रमुख पद से हटा दिया गया। नई बनी एसआईटी टीम में अब सीनियर आईपीएस राजेन्द्र कुमार को अध्यक्ष बनाते हुए अतिरिक्त महानिदेशक साइबर क्राइम मिलिंद कानस्कर और इस जाँच में शुरू से जुड़ी इंदौर एसपी रूचिवर्धन मिश्रा को सदस्य के तौर पर लिया गया है। नए जारी आदेश के अनुसार उक्त अधिकारी जाँच में सहयोग के लिए अन्य पुलिस अधिकारीयों की सेवाएं ले सकेंगे।

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कुल मिलाकर बात की जाए तो कथित हनी ट्रेप ब्लैकमेलिंग कांड में रसूखदार लोगों की संलिप्तता को देखते हुए अब लीपापोती की तैयारी शुरू हो चुकी है। इस कांड की पाँचों मुख्य आरोपी श्वेता विजय जैन, बरखा सोनी भटनागर, श्वेता स्वप्निल जैन, आरती दयाल और मोनिका यादव को कोर्ट ने न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार कोर्ट के आर्डर के बाद जेल जाते समय श्वेता स्वप्निल जैन ने अपने पति से पार्टी मनाने की बात कही है। जिस तरह एसआईटी बनाकर जाँच करना और उनके प्रमुखों को बार-बार बदलना कही न कही दाल में कुछ काला नहीं पूरी दाल ही काली होने की तरफ अंदेशा दे रही है। जिसमें अब प्रदेश की कमलनाथ सरकार के हाथ भी काले नज़र आने लगे है।

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