By अभिनय आकाश | Jan 29, 2026
एक तरफ रूस का सबसे सस्ता तेल दूसरी तरफ अमेरिका का दबाव जो ना किसी की धमकी से डरता है ना किसी के लालच में फंसता है। आज हम बात करेंगे उस गेम की जिसमें भारत ने एक चाल चली और रूस को मजबूरी में $10 प्रति बैरल का डिस्काउंट देना पड़ गया। दरअसल पिछले कुछ महीनों से रूस पर अमेरिका के सबसे कड़े प्रतिबंध लागू हैं। लकोइल, रुसफ जैसे दिग्गज रूसी कंपनियां सीधे अमेरिकी निशाने पर है। अमेरिका ने भारत पर दबाव बनाया। यहां तक कि भारतीय सामानों पर 25% एक्स्ट्रा टेरिफ लगा डाला। मैसेज साफ था अगर रूस से तेल खरीदोगे तो कीमत चुकानी पड़ेगी और भारत ने भारत ने बिना शोर मचाए ना कोई बयानबाजी की बस चुपचाप गेम पलट दिया। पिछले दो महीनों में भारत ने रूस से तेल आयात में बड़ी कटौती कर दी। यह वही भारत था जो 2022 के बाद रूस का सबसे बड़ा तेल ग्राहक बन चुका था। लेकिन जैसे ही भारत ने ब्रेक लगाया रूस की परेशानी बढ़ गई क्योंकि रूस के पास अब यूरोप नहीं, अमेरिका नहीं और चीन पहले से ही मोलभाव कर रहा था।
इसलिए रूस अब कह रहा है लो सस्ता तेल बस हमारे साथ बने रहो। यहीं से बड़ा ट्विस्ट आया। भारत अब वो देश नहीं जो सिर्फ सस्ते तेल के पीछे भागे। भारत जानता है आज सस्ता तेल मिलेगा। कल उसी सप्लायर की मजबूरी बढ़ेगी और परसों वही देश दबाव बनाएगा। इसलिए भारत खेल खेल रहा है। सेफ गेम का भारत की यह रणनीति वाशिंगटन में भी नोटिस की गई। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने संकेत दिए कि भारत पर लगाया गया 25% अतिरिक्त टेरिफ हटाया जा सकता है क्योंकि भारत ने रूसी तेल के आयात में भारी कटौती की है। यानी भारत ने बिना बोले दोनों तरफ संतुलन बना लिया है।