By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Mar 16, 2026
सरकार ने 10,900 करोड़ रुपये की पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत चरणबद्ध विनिर्माण कार्यक्रम के अंतर्गत स्थानीयकरण से जुड़े नियमों में ढील देते हुए इलेक्ट्रिक बस एवं ट्रक विनिर्माताओं को बड़ी राहत दी है। इसके तहत उन्हें 31 अगस्त तक दुर्लभ खनिजों वाले ‘ट्रैक्शन मोटर’ आयात करने की अनुमति दी गई है। भारी उद्योग मंत्रालय ने 13 मार्च की अलग-अलग अधिसूचनाओं में ई-ट्रक (एन2/एन3) और ई-बस (एम2/एम3) में उपयोग होने वाली ‘ट्रैक्शन मोटर’ के आयात को बंद करने की समयसीमा को आगे बढ़ा दिया है। इस फैसले से विनिर्माताओं को कलपुर्जों की कमी से राहत मिलने की उम्मीद है।
ई-बस और ई-ट्रक श्रेणियों में उपयोग होने वाली ‘ट्रैक्शन मोटर’ के स्थानीय विनिर्माण की समयसीमा दूसरी बार बढ़ाई गई है। इससे पहले पिछले वर्ष सितंबर में केंद्र सरकार ने इसे मार्च, 2026 तक टाल दिया था। चरणबद्ध विनिर्माण कार्यक्रम के तहत ‘पीएम इलेक्ट्रिक ड्राइव रिवोल्यूशन इन इनोवेटिव व्हीकल एन्हांसमेंट‘ (पीएम ई-ड्राइव) योजना में यह प्रावधान है कि ‘ट्रैक्शन मोटर’ के विनिर्माण में कम से कम चुंबक फिटिंग, रोटर असेंबली को मोटर में लगाना, स्टेटर असेंबली लगाना, शाफ्ट फिटिंग, बेयरिंग फिटिंग, एनक्लोजर फिटिंग, कनेक्टर फिटिंग और केबल फिटिंग जैसे कार्य देश में ही किए जाएं।
अब यह प्रावधान एक सितंबर, 2026 से प्रभावी किया जाएगा। सरकार इलेक्ट्रिक वाहन, इलेक्ट्रॉनिक, वैमानिकी और हरित ऊर्जा क्षेत्रों की आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित करने के लिए दुर्लभ खनिजों के आयात को लेकर चीन पर निर्भरता कम करने के उपाय कर रही है। हालांकि, अब तक स्थिर आपूर्ति श्रृंखला सुनिश्चित करना एक चुनौती बना हुआ है। केंद्र सरकार ने 7,280 करोड़ रुपये की लागत से ‘सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट’ (आरईपीएम) विनिर्माण प्रोत्साहन योजना को भी अधिसूचित किया है।