India-Russia Oil Trade | भारत ऊर्जा जरूरतों के लिए रूस पर निर्भरता को धीरे-धीरे कम कर रहा है, USTR ने किया दावा

By रेनू तिवारी | Feb 11, 2026

भारत और रूस के बीच तेल व्यापार वर्तमान में एक बहुत ही महत्वपूर्ण और संवेदनशील दौर से गुजर रहा है। हाल ही में वाशिंगटन में हुई उच्चस्तरीय वार्ताओं के बाद भारत और अमेरिका के व्यापारिक रिश्तों में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जैमीसन ग्रीयर ने स्पष्ट किया है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए रूस पर निर्भरता को धीरे-धीरे कम कर रहा है और अमेरिकी बाजार की ओर रुख कर रहा है।

अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) जैमीसन ग्रीयर ने मंगलवार को कहा कि भारत ने रूसी तेल की खरीद को पहले ही “धीरे-धीरे कम करना” शुरू कर दिया है और अमेरिका एवं अन्य स्रोतों से ऊर्जा की खरीद को फिर से बढ़ा रहा है। भारत और अमेरिका ने शनिवार को अंतरिम व्यापार समझौते के लिए एक रूपरेखा पर पहुंचने की घोषणा की जिसके तहत दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने के लिए कई वस्तुओं पर आयात शुल्क कम करेंगे।

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‘फॉक्स बिजनेस’ के साथ साक्षात्कार में इस सवाल पर कि क्या भारत वास्तव में रूसी तेल खरीदना बंद कर रहा है, ग्रीयर ने कहा: संक्षिप्त उत्तर हां है। उन्होंने पहले ही रूसी ऊर्जा उत्पादों की अपनी खरीद को कम करना शुरू कर दिया है। उन्होंने अन्य स्रोतों से खरीद को फिर से बढ़ाना शुरू कर दिया है।

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इस बदलाव के क्या मायने हैं?

चीन पर निर्भरता कम करना: अमेरिका भारत को एक विश्वसनीय व्यापारिक भागीदार और 'फ्रेंड-शोरिंग' (Friend-shoring) के केंद्र के रूप में देख रहा है, ताकि चीन से अपनी आपूर्ति श्रृंखला को हटाया जा सके।

ऊर्जा कूटनीति: अमेरिका से ऊर्जा आयात बढ़ने का मतलब है कि भारत अपनी लंबी अवधि की ऊर्जा सुरक्षा के लिए डॉलर आधारित व्यापार और अमेरिकी स्थिरता पर अधिक भरोसा कर रहा है।

आर्थिक प्रोत्साहन: आयात शुल्क कम होने से इलेक्ट्रॉनिक्स, कृषि उत्पाद और मशीनरी जैसे क्षेत्रों में भारतीय व्यापारियों को सीधा लाभ होने की संभावना है। 

खरीद में कमी के आंकड़े

आयात में गिरावट: जनवरी 2026 के आंकड़ों के अनुसार, भारत का रूसी तेल आयात घटकर लगभग 12.15 लाख बैरल प्रतिदिन (bpd) रह गया है। यह दिसंबर 2025 (12.5 लाख bpd) और पिछले साल की तुलना में काफी कम है।

हिस्सेदारी: भारत के कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी जो कभी 35-40% तक पहुँच गई थी, अब घटकर 25% से नीचे आ गई है। 

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