Prabhasakshi NewsRoom: जुबानी जंग के बीच तीसरे देश में India और Pakistan ने की गुप्त बातचीत

By नीरज कुमार दुबे | Jun 26, 2026

नई दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच जारी तीखी बयानबाजी और तनावपूर्ण माहौल के बावजूद दोनों देशों के कुछ प्रमुख व्यक्तियों ने हाल के दिनों में अनौपचारिक स्तर पर संवाद की नई पहल की है। भारत और पाकिस्तान के रणनीतिक मामलों के जानकारों, पूर्व राजनयिकों, सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों, मीडिया प्रतिनिधियों और शिक्षाविदों ने कोलंबो तथा बैंकाक में ट्रैक टू वार्ताओं के ताजा दौर में भाग लिया। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच संकट की स्थिति में संवाद के रास्ते खुले रखना और तनाव को नियंत्रण में रखने के उपायों पर चर्चा करना था।

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इन वार्ताओं में आतंकवाद, जल विवाद और सीमा पर तनाव जैसे संवेदनशील मुद्दों पर स्पष्ट और खुली चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने यह भी विचार किया कि ट्रैक टू संवाद से निकले सुझावों को भविष्य में औपचारिक ट्रैक वन वार्ता तक किस प्रकार पहुंचाया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि ट्रैक वन वार्ता में दोनों देशों के सरकारी अधिकारी सीधे तौर पर भाग लेते हैं।

खास बात यह है कि यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत और संगठन के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने हाल ही में भारत और पाकिस्तान के बीच संवाद के दरवाजे खुले रखने की बात कही थी। संघ नेताओं ने दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क बनाए रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया था। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने पाकिस्तान के साथ संवाद बनाए रखने को लेकर दत्तात्रेय होसबाले के बयान का बचाव करते हुए कहा था कि उनका आशय पाकिस्तान की जनता से था, न कि वहां की सत्ता या आतंकवाद समर्थक तंत्र से। भागवत ने स्पष्ट किया था कि संघ की कोई अलग विदेश नीति नहीं है और वह पाकिस्तान के मुद्दे पर केंद्र सरकार की नीति के साथ खड़ा है। उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान में भी ऐसे लोग मौजूद हैं जो भारत विभाजन को गलत मानते हैं और दोनों देशों के लोगों के बीच बेहतर संबंध चाहते हैं। भागवत ने यह भी कहा था कि अन्याय और आतंक के खिलाफ कड़ा रुख जरूरी है, लेकिन संवाद के कुछ रास्ते खुले रखने चाहिए, क्योंकि भविष्य में स्थायी शांति और स्थिरता के लिए जनसंपर्क महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। हालांकि नई दिल्ली के जानकारों का मानना है कि ट्रैक टू वार्ताएं जारी रहने के बावजूद निकट भविष्य में दोनों देशों के बीच औपचारिक सरकारी वार्ता शुरू होने की संभावना बहुत कम है।

उल्लेखनीय है कि भारत और पाकिस्तान के संबंध मई 2025 के संघर्ष के बाद से बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। भारत लगातार यह रुख दोहराता रहा है कि आतंकवाद जारी रहने तक पाकिस्तान के साथ सार्थक संवाद संभव नहीं है। साथ ही साल 2019 के बाद से दोनों देशों के संबंध और अधिक ठंडे पड़ गए हैं। व्यापार लगभग नगण्य है, राजनयिक मिशन सीमित क्षमता के साथ काम कर रहे हैं और लोगों के बीच संपर्क भी काफी कम हो चुका है।

हम आपको बता दें कि भारत और पाकिस्तान के बीच कभी आठ प्रमुख मुद्दों पर नियमित वार्ता होती थी। इनमें शांति और सुरक्षा, विश्वास बहाली उपाय, जम्मू-कश्मीर, सियाचिन, वुलर बैराज, सर क्रीक, आर्थिक सहयोग, आतंकवाद और मादक पदार्थों की तस्करी सहित विभिन्न क्षेत्रों में मैत्रीपूर्ण आदान प्रदान शामिल थे। लेकिन नवंबर 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के बाद यह प्रक्रिया रोक दी गई थी। बाद में 2011 में वार्ता फिर शुरू हुई, किंतु जनवरी 2013 में नियंत्रण रेखा पर भारतीय सैनिकों की हत्या के बाद इसे दोबारा स्थगित कर दिया गया था।

दिसंबर 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लाहौर यात्रा के बाद दोनों देशों ने व्यापक द्विपक्षीय वार्ता दोबारा शुरू करने पर सहमति बनाई थी, लेकिन 2016 में पठानकोट वायुसेना अड्डे सहित कई आतंकी हमलों ने इस प्रक्रिया को फिर पटरी से उतार दिया। तब से लेकर अब तक लगभग तेरह वर्षों से दोनों देशों के बीच औपचारिक संवाद पूरी तरह ठप है।

हालांकि मौजूदा ट्रैक टू पहल यह संकेत देती है कि आधिकारिक संबंधों में जमी बर्फ के बीच भी दोनों देशों के कुछ प्रभावशाली वर्ग संवाद और तनाव नियंत्रण के रास्ते तलाशने की कोशिश कर रहे हैं। भारत और पाकिस्तान की सरकारें इन बैठकों पर सार्वजनिक रूप से चुप्पी साधे हुए हैं, लेकिन इन अनौपचारिक प्रयासों को दक्षिण एशिया में स्थिरता बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

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