By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Mar 08, 2026
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के लंबा खिंचने की आशंका के बीच भारतीय खुदरा ईंधन कंपनियों ने अमेरिका, रूस और पश्चिम अफ्रीका से अतिरिक्त कच्चे तेल के लिए बातचीत शुरू कर दी है। उद्योग अधिकारियों और विश्लेषकों ने यह जानकारी दी। कच्चे तेल को पेट्रोल और डीजल जैसे ईंधनों में परिशोधित करने वाली रिफाइनरियों ने फिलहाल अपनी प्रस्तावित मरम्मत बंदी को टाल दिया है और सामान्य परिचालन दर बनाए रखी है ताकि देश की तात्कालिक जरूरतों के लिए पर्याप्त बफर स्टॉक बना रहे। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 88 प्रतिशत आयात करता है। फरवरी में इस आपूर्ति का लगभग आधा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आया था, जो ईरान और ओमान के बीच एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है।
उन्होंने कहा कि भारत के पास वर्तमान में लगभग 14.4 करोड़ बैरल कच्चा तेल भंडारण में है और महत्वपूर्ण बात यह है कि तेल की इस आपूर्ति की निरंतर भरपाई की जा रही है। मंत्रालय के आंकड़ों अनुसार, देश के पास इसके अलावा सामरिक पेट्रोलियम भंडार (एसपीआर) और सरकारी तेल कंपनियों के पास मौजूद स्टॉक को मिलाकर कुल क्षमता लगभग 74 दिनों के शुद्ध आयात के बराबर है। हालांकि, विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि वैकल्पिक स्रोतों से आपूर्ति सुनिश्चित होने के बावजूद कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, अधिक माल भाड़े और बीमा प्रीमियम के कारण आयात बिल बढ़ सकता है।
28 फरवरी के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 70 डॉलर से बढ़कर 92 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की कीमतें भी दोगुनी से अधिक बढ़कर 24-25 डॉलर प्रति दस लाख ब्रिटिश थर्मल यूनिट तक पहुंच गई हैं। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक है और अपनी कुल जरूरतों का लगभग आधा हिस्सा पश्चिम एशिया से प्राप्त करता है। होर्मुज जलडमरूमध्य में यातायात बाधित होने से देश की आपूर्ति श्रृंखला पर भारी दबाव पड़ा है।