By रेनू तिवारी | Oct 12, 2026
कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) पर आधारित भारत की खुदरा महंगाई दर सितंबर में बढ़कर 5.54 प्रतिशत हो गई, जिसकी मुख्य वजह खाने-पीने की चीज़ों की बढ़ती कीमतें थीं। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के नेशनल स्टैटिस्टिक्स ऑफिस (NSO) के सरकारी आंकड़ों के अनुसार, ग्रामीण और शहरी इलाकों के लिए महंगाई दर क्रमशः 6.08 प्रतिशत और 4.88 प्रतिशत रही।
पिछले हफ़्ते, महंगाई की चिंताओं के बीच रिज़र्व बैंक ने बेंचमार्क लेंडिंग रेट (रेपो रेट) को 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दिया था।
सितंबर में फूड महंगाई दर बढ़कर 7.74 प्रतिशत हो गई
जनवरी में नई इंडेक्स सीरीज़ जारी होने के बाद से सितंबर में महंगाई दर अपने सबसे ऊंचे स्तर पर थी। सितंबर में फूड महंगाई दर बढ़कर 7.74 प्रतिशत हो गई, जबकि पिछले महीने यह 5.97 प्रतिशत थी। इस बढ़ोतरी के साथ, महंगाई दर रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) के 4 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर चली गई, हालांकि यह सेंट्रल बैंक की 2-6 प्रतिशत की स्वीकार्य सीमा के भीतर ही है। रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) ने महंगाई की चिंताओं के बीच पिछले हफ़्ते रेपो रेट को 0.25 प्रतिशत बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दिया था।
प्याज की कीमतों में ज़बरदस्त बढ़ोतरी
कंज्यूमर फूड प्राइस इंडेक्स (CFPI) से मापी जाने वाली फूड महंगाई दर अगस्त के 5.97 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर में 7.74 प्रतिशत हो गई। मुख्य चीज़ों में, प्याज की कीमतों में सबसे ज़्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई। प्याज के लिए महंगाई दर अगस्त के 48.78 प्रतिशत से बढ़कर 108.09 प्रतिशत हो गई। लहसुन की महंगाई दर 43.60 प्रतिशत से बढ़कर 54.62 प्रतिशत हो गई, जबकि नींबू की कीमतें पिछले महीने के 15.15 प्रतिशत के मुकाबले बढ़कर 36.41 प्रतिशत हो गईं।
अन्य सभी क्षेत्रों में भी महंगाई बढ़ी
इनके अलावा, सितंबर में पर्सनल केयर, सोशल प्रोटेक्शन और अन्य सामान व सेवाओं में महंगाई दर 13.75 प्रतिशत रही, जबकि रेस्टोरेंट और होटलों में रहने-खाने की सेवाओं की कीमतें 9.36 प्रतिशत बढ़ गईं। ट्रांसपोर्ट में महंगाई दर 5.01 प्रतिशत रही, जिसमें निजी गाड़ियां चलाने का खर्च 7.46 प्रतिशत बढ़ा। हेल्थ सेक्टर में महंगाई दर 1.40 प्रतिशत; हाउसिंग और यूटिलिटीज में 2.74 प्रतिशत; और एजुकेशन सेवाओं में 3.94 प्रतिशत रही।
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