By अभिनय आकाश | Apr 03, 2026
आज भारत सिर्फ हथियार खरीद नहीं रहा है बल्कि दुनिया को मेक इन इंडिया मेक इन इंडिया हथियारों की ताकत दिखा रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जो आंकड़े शेयर किए हैं वो किसी ऐतिहासिक जीत से कम है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट ₹38,424 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। पिछले साल यानी 2024-25 के आंकड़ों को देखें तो वहां से यहां तक का सफर किसी रॉकेट की रफ्तार जैसा लग रहा है। वित्त वर्ष 2024-25 में ₹3622 करोड़ वित्त वर्ष 202526 में ₹38424 करोड़ यानी कि नेट इजाफा 14802 करोड़ का और प्रतिशत में वृद्धि 62.66% की। यह ग्रोथ अपने आप में बहुत बड़ी ग्रोथ मानी जा रही है। लेकिन यहां पर एक बात बता दें किसी भी देश के लिए एक साल के भीतर अपने निर्यात को 60% से ज्यादा बढ़ाना लगभग नामुमकिन माना जाता है। खासकर डिफेंस सेक्टर में पिछले 5 सालों की बात करें तो भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट लगभग तीन गुना बढ़ गया है। यह आंकड़ा सिर्फ एक नंबर नहीं है। यह दुनिया का भारत की इंजीनियरिंग और स्वदेशी तकनीक पर बढ़ते भरोसे का सर्टिफिकेट है।
इसमें छोटे देशों से लेकर विकसित देश तक शामिल हैं। और अगर देखा जाए तो भारत के एक्सपोर्ट बास्केट में यह चीजें टॉप पर हैं। सबसे पहले ब्रह्मोस मिसाइल, फिलीपींस जैसे देशों के साथ हुई डील ने भारत को लंबी दूरी की मिसाइलों के क्लब में खड़ा कर दिया है। आकाश डिफेंस सिस्टम, कई मिडिल ईस्ट देश और अफ्रीकी देश इसमें दिलचस्पी दिखा रहे हैं। पिनाका मल्टीबैरल रॉकेट लांचर, कई देश इस हथियार में भी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। और सबसे बड़ी बात बुलेट प्रूफ जैकेट और रडार। भारत दुनिया के बेहतरीन रडार और पर्सनल प्रोटेक्टिव गियर बनाने वाले देशों में से एक बन गया है और कई देशों के पास यह इक्विपमेंट्स भेजे भी जा रहे हैं। यहां बड़ी बात यह है कि जो कंपनियां एक्सपोर्ट करती हैं उनमें भी बढ़ोतरी हुई है। यह नंबर 128 से बढ़कर 145 हो गया है। यानी नए खिलाड़ी मैदान में उतर रहे हैं।
यह कोई रातोंरात चमत्कार नहीं हुआ। के पीछे सोची समझी रणनीति है। सरकार ने ऑनलाइन पोर्टल और एसओपी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर को इतना सरल बना दिया कि एंड यूजर सर्टिफिकेट और एक्सपोर्ट अथोराइजेशन के लिए कंपनियों को अब सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ते। सरकार ने करीब 500 से ज्यादा डिफेंस आइटम्स की एक लिस्ट जारी की जिनका भारत में इंपोर्ट पूरी तरह बैन कर दिया गया। इसका असर यह हुआ कि स्वदेशी सामान की खरीद बढ़ी और अब भारतीय सेना खुद मेड इन इंडिया उत्पादों को आजमा रही है। तो ग्लोबल मार्केट में भारत की ब्रांड वैल्यू भी इससे काफी बढ़ गई।