जिन्हें समझा मरा, वो लौट आए जिंदा! IRGC कमांडर को देख दुश्मन सन्न

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अभिनय आकाश । Apr 3 2026 12:44PM

आरोप यह भी लगा कि मिसाइल हमलों और उनके नतीजों को लेकर गलत आंकड़े तक पेश किए गए। लेकिन इन तमाम दावों के बीच ईरान का आधिकारिक रुख बिल्कुल अलग है। तेरान किसी भी तरीके की अंदरूनी मतभेद को सिरे से खारिज कर रहा है और इसके बजाय अपनी मिसाइल और ड्रोन ताकत को दुनिया के सामने प्रदर्शित कर रहा है। यानी एक तरफ सवाल जो पश्चिमी मीडिया उठा रहा है।

खाड़ी में जंग अपने चरम पर है। आसमान में गूंजती मिसाइलों की आवाज, ड्रोन की भनभनाहट और जलते शहरों के बीच अब एक नई तस्वीर सामने आई है। ईरान की सबसे ताकतवर सैन्य इकाई आईआरजीसी के एयररोस्पेस चीफ फिर से मैदान में लौट आए हैं। मेजर जनरल माजिद मौसमी जिनको लेकर कुछ वक्त पहले तक गायब होने या फिर इसरली हमलों में मारे जाने की खबरें चलाई जा रही थी। अब खुद युद्ध के बीच सक्रिय नजर आने लगे हैं। ईरानी स्टेट मीडिया द्वारा जारी वीडियो में मौसमी को अंडरग्राउंड मिसाइल बेस का दौरा करते हुए सैनिकों से मिलते हुए और ऑपरेशन की ब्रीफिंग लेते हुए देखा गया। यह वही वक्त है जब जंग लगातार तेज हो रही है और ईरान पर अमेरिका और इसराइल के हमले जारी हैं। लेकिन दूसरी तरफ ईरान भी झुक नहीं रहा, रुक नहीं रहा। उसकी तरफ से मिसाइल और ड्रोन अटैक खाड़ी के तमाम देशों समेत इजराइल पर बेरुकावट की जा रही है। लेकिन इन हमलों के बीच ईरान ने एक अलग ही तस्वीर दिखाने की कोशिश भी की है। वो है एकजूटता की ताकत और जवाबी क्षमता की। 

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बैलस्टिक मिसाइलों के विशाल भंडार और लगातार हो रहे ल्च यह संकेत भी देने लगे हैं कि ईरान सिर्फ बचाव नहीं कर रहा बल्कि आक्रामक रणनीति के साथ मैदान में डटा हुआ है। हालांकि इस कहानी का एक दूसरा पहलू जो पश्चिमी मीडिया रिपोर्ट कर रहा है। कई रिपोर्ट्स के मुताबिक माजिद मौसमी को लेकर आईआरजीसी के अंदर सवाल खड़े हो रहे हैं। कुछ सूत्रों का दावा है कि जंग के शुरुआती दौर में उनकी अनुपस्थिति एयरस्पेस यूनिट को कमजोर बना चुकी है और इस दौरान हुए नुकसान के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। यहां तक कि उनके खिलाफ शीर्ष नेतृत्व तक शिकायतें पहुंचने की भी बात सामने आई।

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आरोप यह भी लगा कि मिसाइल हमलों और उनके नतीजों को लेकर गलत आंकड़े तक पेश किए गए। लेकिन इन तमाम दावों के बीच ईरान का आधिकारिक रुख बिल्कुल अलग है। तेरान किसी भी तरीके की अंदरूनी मतभेद को सिरे से खारिज कर रहा है और इसके बजाय अपनी मिसाइल और ड्रोन ताकत को दुनिया के सामने प्रदर्शित कर रहा है। यानी एक तरफ सवाल जो पश्चिमी मीडिया उठा रहा है। दूसरी तरफ ईरान बिना टूटे शक्ति प्रदर्शन और इसी बीच जंग लगातार और खतरनाक होती जा रही है। इस पूरे संघर्ष में एक और बड़ा मोड़ सामने आया। अमेरिका की रणनीति और उसकी अनिश्चितता की। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जहां बार-बार जंग खत्म करने की बातें करते हैं, वहीं जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। 

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ईरान अब खुले तौर पर अमेरिका को चुनौती दे रहा है और यहां तक कह रहा है कि वाशिंगटन को खुद नहीं पता कि इस जंग में बाहर कैसे निकला जाए। तेहरान का दावा है कि अमेरिका अपने लक्ष्य हासिल करने में नाकाम रहा है और इसी वजह से अब रणनीति बदलने पर मजबूर है। वहीं रूसी राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन के करीबी सहयोगी ने भी अमेरिका की इस जंग पर सवाल खड़े किए। इन सबके बीच ईरान लगातार यह संदेश देने की कोशिश में है कि भारी नुकसान झेलने के बावजूद वह कमजोर नहीं पड़ा बल्कि पहले से ज्यादा संगठित और आक्रामक होकर उभरा है। जैसे-जैसे जंग पांचवें हफ्ते में प्रवेश कर चुकी है। सवाल यही है क्या यह संघर्ष अब एक नए संतुलन की ओर बढ़ रहा है। जहां दबाव के बावजूद ईरान खुद को मजबूत साबित करने में सफल हो रहा है। क्या महज ₹18 लाख का एक सस्ता ड्रोन 800 करोड़ के अत्याधुनिक अमेरिकी फाइटर जेट को मात दे सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दावा करते हैं कि ईरानी सेना जजर हो चुकी है। लेकिन इराक के आसमान से आई इन तस्वीरों ने एक नई बहस छेड़ दी है। देखिए कैसे ईरान का शाहे ड्रोन दुनिया के सबसे घातक शिकारी F15 की आंखों में धूल झोंक कर अपने टारगेट को तबाह कर देता है।

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