By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Jun 02, 2020
देश में स्वदेशी की लहर ज़ोर मार रही है। आज ट्विटर पर #ByeByeIndiaOnlyBharat के संग 1 लाख ट्वीट किए जा चुके हैं। ज़ाहिर है कि देशवासियों की भावनाएं स्वदेशी उपयोग करने और केवल भारतीय उत्पादों/सेवाओं को अपनाने के पक्ष में बलवती हो रही हैं। ट्विटर पर निरंतर आते ट्वीट ज़ाहिर करते हैं कि अपने देश का गौरव सबसे पहले है।
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अब चाहे वैश्विक ब्रांड हों, या बहुराष्ट्रीय कंपनियां या फिर क्रॉस लैवल भारतीय ब्रांड हर कोई खुद को लोकल से कनेक्ट करने की कोशिश कर रहा है। वोकल फॉर लोकल और आत्म निर्भर मुहिम का ही यह असर है कि ये सब अपने भारतीय होने का परिचय देकर जनता का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। ट्विटर पर #BoycottChinaproducts भी खूब घूम रहा है। पिछले कुछ दिनों में चीनी उत्पादों का बॉयकॉट करने की अपील कई मशहूर हस्तियों द्वारा की गई है जिनमें सोनम वांगचुक, मिलिंद सोमन, अरशद वारसी, आयुष्मान खुराना आदि शामिल हैं। बहुतों ने चीनी उत्पाद और ऐप जैसे टिकटॉक त्यागने का कदम उठाया है और लोगों से आग्रह किया है कि वे भी देशहित में ऐसा ही करें।
#MadeInIndiaproducts का समर्थन करते हुए योग गुरु बाबा रामदेव और पहले इंडियन आइडल व गायक अभिजीत सावंत ने भी जनता से अपील की है भारतीय ऐप्स व ब्रांड जैसे फ्लिपकार्ट, शेयरचैट, रोपोसो, जियो, अमूल, आईटीसी आदि को अपनाएं। ताकि भारतीय ब्रांडों की प्रगति हो और भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि हो।इंडियन आइडल फेम अभिजीत सावंत ने कहा, ’’नागरिक होने के नाते यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम आत्म निर्भर बनें। यदि 130 करोड़ लोग भारत में बने सामान और ऐप्स का इस्तेमाल शुरु कर देंगे जैसे शेयरचैट, जियो, फ्लिपकार्ट, आदि तो इसका विश्वव्यापी असर होगा। इससे हमारे देश का कारोबार बढ़ेगा।’’ पाश्र्वगायक अभिजीत सावंत ने कहा कि जहां भी, जब भी संभव होगा वह मेड इन इंडिया उत्पादों को प्रोत्साहित करेंगे।
इस विषय पर जानीमानी वकील और ऐक्टिविस्ट सुश्री वर्षा मधुकर ने जापान की आर्थिक प्रगति का जिक्र करते हुए कहा, ’’दूसरे विश्व युद्ध के बाद जब जापान की अर्थव्यवस्था ध्वस्त हो गई तब जापानियों ने अपने देश में ही बने उत्पादों, सामान और सेवाओं को समर्थन देना शुरु किया। उस राष्ट्रव्यापी आंदोलन से न केवल अर्थव्यवस्था में नए प्राण आए बल्कि देश का गौरव भी लौट आया। मेरा दृढ़ विश्वास है कि बतौर भारतीय हमें शारीरिक, मानसिक व आर्थिक रूप से एक दुस्साहसी कदम उठाना होगा और भारत की शक्ति दिखानी होगी और जो उन्नति हम करना चाहते हैं उसके लिए लंबी छलांग लगानी होगी। हम सभी को एक नया चित्र बनाना होगा वो चित्र जो नए भारत और उसकी आकांक्षाओं का होगा।’’