By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 05, 2026
(योषिता सिंह) संयुक्त राष्ट्र, पांच सितंबर भारत ने महाद्वीपों के भूभाग को ‘‘अधिक सटीकता से प्रदर्शित’’ करने के उद्देश्य से विश्व मानचित्र में सुधार से जुड़े संयुक्त राष्ट्र महासभा के एक प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 193 सदस्यों ने शुक्रवार को ‘मानचित्र में सुधार: वैश्विक मानचित्रण प्रतिनिधित्व में संतुलन कायम करना और दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों, विशेष रूप से अफ्रीका का समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना’ शीर्षक वाले प्रस्ताव को भारी बहुमत से पारित किया। टोगो द्वारा पेश प्रस्ताव के पक्ष में 164 देशों ने मतदान किया।
उन्होंने कहा, ‘‘हमारा मानना है कि समाज भूगोल और अपने आसपास की दुनिया के विभिन्न हिस्सों के तुलनात्मक आकार को किस तरह समझता है, इसमें मानचित्रों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।’’ भारत ने हालांकि प्रस्ताव के दायरे को लेकर अपनी समझ स्पष्ट करते हुए कहा, ‘‘हमारा मानना है कि इस प्रस्ताव का उद्देश्य ‘इक्वल एरिया’ (भूभागों के क्षेत्रफल का वास्तविक अनुपात बनाए रखने वाली) मानचित्रण पद्धतियों के व्यापक इस्तेमाल को बढ़ावा देना और उन पर विचार करना है, न कि ‘इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन’ या किसी अन्य खास मानचित्रण पद्धति का समर्थन करना।’’ पुरी ने कहा कि ‘इक्वल एरिया’ पद्धतियां विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इनमें महाद्वीपों और विभिन्न क्षेत्रों के भूभागों का आपसी क्षेत्रफल वास्तविक अनुपात में बना रहता है। उन्होंने कहा, ‘‘इससे उन विकृतियों को दूर करने में मदद मिल सकती है जो आकार, दिशा या दूरी जैसी अन्य भौगोलिक विशेषताओं को बनाए रखने के लिए तैयार मानचित्रण पद्धतियों के कारण भूभागों के आकार को लेकर हमारी धारणा में पैदा होती हैं। साथ ही, अलग-अलग मानचित्रण पद्धतियां अलग-अलग उद्देश्यों के लिए उपयोगी होती हैं।
कोई एक पद्धति हर तरह के इस्तेमाल के लिए उपयुक्त नहीं हो सकती।’’ पुरी ने कहा, ‘‘इसलिए हमारा मानना है कि यह प्रस्ताव प्रौद्योगिकी और पद्धति के मामले में तटस्थ रहना चाहिए। हमारा प्रतिनिधिमंडल ऐसी का समर्थन करता है जो देशों, संस्थानों और मानचित्रकारों को अपनी जरूरत के अनुसार सबसे उपयुक्त पद्धति चुनने की स्वतंत्रता देते हुए अधिक सटीक मानचित्रण को प्रोत्साहित करे।’’ उन्होंने कहा कि भारत का रुख केवल इस सिद्धांत तक सीमित है कि जहां उद्देश्य महाद्वीपों के भूभागों के तुलनात्मक आकार को वास्तविक अनुपात में बनाए रखना हो, वहां ‘इक्वल एरिया’ पद्धतियों को प्रोत्साहित किया जाए। पुरी ने कहा, ‘‘इस तरह प्रस्ताव का उद्देश्य भी कायम रहेगा और किसी एक खास मानचित्रण पद्धति को अनावश्यक प्राथमिकता देने या ‘इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन’ समेत किसी विशेष पद्धति का समर्थन करने से भी बचा जा सकेगा।
इसलिए भारत ने इस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया।’’ प्रस्ताव में कहा गया कि ऐतिहासिक रूप से बरकरार मानचित्रण संबंधी विकृतियों के कारण महाद्वीपों के आकार को लेकर लोगों की समझ, शिक्षा, संस्कृति, भू-राजनीति और सामाजिक-आर्थिक क्षेत्रों पर असर पड़ा है तथा ये ऐतिहासिक पूर्वाग्रहों को दर्शाती हैं। प्रस्ताव के अनुसार, इन्हें दूर करने से विशेष रूप से अफ्रीकी महाद्वीप के संबंध में मान्यता, न्याय और विकास को बढ़ावा मिलेगा। प्रस्ताव में कहा गया कि ‘इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन’ महाद्वीपों के भूभागों के आकार को अधिक सटीक तरीके से दर्शाता है।
इसमें सदस्य देशों को उनके इस्तेमाल के उद्देश्य के अनुसार ऐसी मानचित्रण पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित किया गया है जो महाद्वीपों के आकार और भौगोलिक वास्तविकताओं को अधिक सटीक रूप से दर्शाती हों। इनमें ‘इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन’ भी शामिल है। ‘मर्केटर प्रोजेक्शन’ विश्व मानचित्र बनाने की वह पद्धति है जिसे मानचित्रकार गेरार्डस मर्केटर ने 1569 में तैयार किया था।
इसमें महाद्वीपों के वास्तविक भूभाग का आकार सटीक रूप से नहीं दिखता और अफ्रीका वास्तविक आकार से छोटा जबकि उत्तरी यूरोप और उत्तरी अमेरिका बड़े दिखाई देते हैं। पाकिस्तान ने भी प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया। उसने कहा कि वह इस पहल के केवल उस मूल उद्देश्य का समर्थन करता है जिसमें महाद्वीपों के भूभागों को सटीक रूप से दर्शाने की बात है, न कि देशों के राजनीतिक मानचित्रों और सीमाओं में बदलाव की।