By एकता | Oct 25, 2026
भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पश्चिमी मोर्चे पर किए गए सटीक और नपे-तुले हमलों ने यह साबित कर दिया कि अब कोई भी लक्ष्य वायुसेना की पहुंच से बाहर नहीं है।
उन्होंने कहा कि इस अभियान ने देश की पहली जवाबी रक्षा पंक्ति और मजबूत रणनीतिक रोकने वाली ताकत के रूप में वायु शक्ति की अहम भूमिका को एक बार फिर पूरी दुनिया के सामने साबित किया है।
चार दिनों तक चले इस अभियान की अगुवाई करने वाले एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा कि इस सफलता के बाद सेना को लापरवाह नहीं होना चाहिए। इसके बजाय अपनी क्षमताओं को लगातार मजबूत करते रहना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर से सबसे बड़ा सबक यह मिला कि सेना को हमेशा कई विकल्प खुले रखने चाहिए। दुश्मन की रणनीति बदलते ही अपनी रणनीति में भी तेजी से बदलाव करने की क्षमता होनी चाहिए।
उन्होंने कहा, "एक क्षमता-केंद्रित सेना ही ऐसा कर सकती है, क्योंकि वह किसी एक हथियार पर निर्भर न रहकर कई विकल्पों का इस्तेमाल कर सकती है।" इसी लचीलेपन की वजह से वायुसेना तनाव को अपने नियंत्रण में रखते हुए कार्रवाई करने में सफल रही।
पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में पिछले साल मई में ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया गया था। इसके तहत पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले इलाकों में आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए गए। यह 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के बाद सीमा पार भारत की सबसे साहसिक सैन्य कार्रवाई थी।
इस अभियान के दौरान भारत ने 9 प्रमुख आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। पाकिस्तान की ओर से आतंकी संगठनों को पनाह देना जारी रखने के बाद वायुसेना ने उसके सैन्य ठिकानों पर भी हमला किया। ये हमले रावलपिंडी जैसे सैन्य मुख्यालय के बेहद करीब तक पहुंचे।
वायुसेना प्रमुख ने बताया कि भारत में विकसित कुछ हथियार प्रणालियों ने शानदार प्रदर्शन किया और दुश्मन के इलाके में काफी अंदर तक गंभीर नुकसान पहुंचाया। इसके साथ ही भारतीय वायुसेना ने पूरे अभियान के दौरान आम नागरिकों को नुकसान न पहुंचाने और शून्य आकस्मिक नुकसान के अपने संकल्प का पूरी तरह पालन किया।
उन्होंने साफ किया कि ऑपरेशन सिंदूर की सफलता किसी एक हथियार या लड़ाकू विमान की वजह से नहीं मिली। इसके पीछे सटीक खुफिया जानकारी, नेटवर्क आधारित अभियान, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, सटीक मार करने वाले हथियार और मजबूत हवाई सुरक्षा व्यवस्था का संयुक्त तालमेल था।
भारतीय वायुसेना की स्वदेशी नेटवर्क आधारित हवाई सुरक्षा व्यवस्था ने पाकिस्तानी सेना की ओर से दागे गए कई ड्रोनों और लंबी दूरी के हथियारों को हवा में ही नाकाम कर दिया। वायुसेना प्रमुख ने बताया कि भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए वायुसेना निगरानी, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, ड्रोन रोधी प्रणाली, सुरक्षित नेटवर्क और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित प्रणालियों पर ध्यान दे रही है।
वायुसेना प्रमुख ने कहा कि वायुसेना का लक्ष्य विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय विजन से जुड़ा है। इसके तहत भारतीय वायुसेना ऐसी बहु-क्षेत्रीय एयरोस्पेस शक्ति बनना चाहती है, जो आत्मनिर्भर और तकनीकी रूप से उन्नत हो। साथ ही वह देश के आर्थिक और सामरिक हितों की रक्षा करने में पूरी तरह सक्षम हो।