मज़बूत है भारतीय बैंकिंग व्यवस्था, सुरक्षित हैं बैंकों के ग्राहकों के हित

By प्रह्लाद सबनानी | Mar 11, 2020

हाल ही में भारतीय रिज़र्व बैंक ने निजी क्षेत्र के एक बैंक, येस बैंक, के लेन-देन पर अधिस्थगन का आदेश दिया है। इस अधिस्थगन आदेश के अनुसार, इस बैंक के जमाकर्ता, अगले आदेश तक रुपए 50,000 तक की जमाराशि ही अपने खातों से निकाल पाएँगे एवं यह बैंक अब नए निवेश नहीं कर सकेगा। इस बैंक के बोर्ड को स्थगित कर भारतीय स्टेट बैंक के एक अनुभवी कार्यपालक को बैंक का प्रशासक नियुक्त किया गया है। 

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इसी प्रकार, येस बैंक में भी पिछले लगभग 18 माह से वित्तीय समस्याएँ देखने में आ रहीं थी एवं बैंक द्वारा अतिरिक्त पूँजी की व्यवस्था हेतु लगातार प्रयास किए जा रहे थे। परंतु, बैंक को अतिरिक्त पूँजी की व्यवस्था करने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा था। येस बैंक के पास रुपए 2 लाख करोड़ की जमा राशियाँ हैं, बैंक की बैलेन्स शीट का आकार रुपए 4 लाख करोड़ का है तथा बैंक के पास लगभग 50 लाख ग्राहक है। इतने बड़े आकार के बैंक पर यदि उसके ग्राहकों का विश्वास टूट जाए तो इसका प्रभाव पूरे बैंकिंग उद्योग पर भी पड़ सकता है एवं अन्य बैंक भी इसके प्रभाव में आ सकते हैं। येस बैंक की ग़ैर निष्पादनकारी आस्तियाँ बढ़कर 8 प्रतिशत हो गई हैं। शायद पूर्व में ग़ैर निष्पादनकारी आस्तियों की पहचान सही तरीक़े से नहीं की गई है। अतः बैंक में तरलता के साथ ही शोध-अक्षमता की समस्या भी दिखाई दे रही है। येस बैंक दरअसल अपने ग्राहकों को उनकी जमाराशियों पर तुलनात्मक रूप से अधिक ब्याज प्रदान कर रहा था एवं इन जमाराशियों को तुलनात्मक रूप से अधिक जोखिम भरी आस्तियों में निवेश कर रहा था ताकि अधिक से अधिक लाभ कमाया जा सके। इस प्रकार की नीति पर चलने के कारण बैंक को नुक़सान उठाना पड़ा है एवं ग़ैर निष्पादनकारी आस्तियों की मात्रा में तेज़ी से वृद्धि देखने में आई है। साथ ही, बैंक में निगमित अभिशासन सम्बंधी कुछ मुद्दे भी सतह पर दिखाई देने लगे थे। अतः उक्त वर्णित समस्त बिंदुओं पर गहनता पूर्वक विचार करते हुए भारतीय रिज़र्व बैंक को उक्त वर्णित कठोर क़दम उठाने पड़े हैं। 

देश में भारतीय रिज़र्व बैंक, विभिन्न वित्तीय संस्थानों के लिए अंतिम ऋणदाता के रूप में कार्य करता है। अतः भारतीय रिज़र्व बैंक ने येस बैंक को विफल होने से बचाने के लिए देश हित में यह निर्णय लिया कि भारतीय स्टेट बैंक के एक अनुभवी कार्यपालक को येस बैंक का प्रशासक नियुक्त किया है ताकि वह येस बैंक की वित्तीय स्थिति का सही तरीक़े से आँकलन कर सके एवं आवश्यकता अनुसार भारतीय स्टेट बैंक येस बैंक में अपना निवेश पूँजी के रूप में कर सके। भारतीय स्टेट बैंक, येस बैंक में लगभग 49 प्रतिशत तक की हिस्सेदारी ख़रीद सकता है। 

केंद्र सरकार, भारतीय रिज़र्व बैंक एवं भारतीय स्टेट बैंक लगातार यह घोषणा कर रहे हैं कि येस बैंक के आकार को देखते हुए उसे विफल होने नहीं दिया जाएगा क्योंकि इस बैंक से लगभग 50 लाख ग्राहकों के हित जुड़े हुए हैं, देश की अर्थव्यवस्था में इस बैंक का योगदान है एवं बैंक के कई कर्मचारी भी कार्यरत हैं। अतः देश में येस बैंक के ग्राहकों को बिल्कुल भी परेशान होने की ज़रूरत नहीं है। येस बैंक में कार्यपालक के नियुक्त किए जाने के बाद से ऐसे संकेत मिलने भी लगे हैं कि भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा येस बैंक पर लगाए गए अधिस्थगन आदेश को शीघ्र ही हटाया भी जा सकता है एवं बैंक में सभी बैंकिंग कार्य सुचारू रूप से होने लगेंगे। 

येस बैंक में उत्पन्न हुई उक्त परिस्थितियाँ बैंक के अपने निर्णयों के चलते ही उत्पन्न हुई हैं। यह बैंकिंग की प्रणालीगत असफलता के चलते नहीं हुआ है एवं पूर्व में भी देश में इस प्रकार की कई घटनाएँ देखने में आई हैं, जिन्हें सफलता पूर्वक सम्हाल लिया गया है। वर्ष 2006-07 में बैंक ओफ़ राजस्थान में भी इसी प्रकार की परिस्थितियाँ उत्पन्न हुई थीं। बैंक ऑफ़ राजस्थान का आईसीआईसीआई बैंक में विलय कर दिया गया था। इसी प्रकार, आईसीआईसीआई बैंक में भी तरलता सम्बंधी समस्या को हल करने हेतु भारतीय स्टेट बैंक आगे आया था एवं रुपए 1,000 करोड़ रुपए की तरलता प्रदान की थी जिसके चलते आईसीआईसीआई बैंक को भी तरलता के संकट से उबार लिया गया था। ग्लोबल ट्रस्ट बैंक का भी ऑरीएंटल बैंक ओफ़ कामर्स में विलय कर इसी प्रकार की समस्या को हल कर लिया गया था। 

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भारतीय बैंकिंग उद्योग आज बहुत ही मज़बूत स्थिति में है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लागू पूँजी पर्याप्तता सम्बंधी बाज़ल कमेटी के नियमों को भारतीय बैंकों में लागू किया जा चुका है एवं आज भारत में कई सरकारी क्षेत्र एवं निजी क्षेत्र के बैंकों का पूँजी पर्याप्तता अनुपात बेंचमार्क से कहीं अधिक है। अतः यह पूरी उम्मीद की जानी चाहिए की येस बैंक में आए संकट को भारतीय रिज़र्व बैंक एवं भारतीय स्टेट बैंक द्वारा सफलता पूर्वक हल कर लिया जाएगा एवं येस बैंक के ग्राहकों को बिल्कुल भी घबराने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए। हाँ, येस बैंक में घटित उक्त वर्णित घटनाक्रम के चलते भारतीय रिज़र्व बैंक को अपने निरीक्षण तंत्र को मज़बूत किए जाने की आवश्यकता ज़रूर उभर कर सामने आई है। 

-प्रह्लाद सबनानी

सेवानिवृत्त उप-महाप्रबंधक

भारतीय स्टेट बैंक

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